इंसान के हाथ में
लालच की कुल्हाड़ी थी
कुल्हाड़ी की सत्ता थी
धन लालच के चक्कर में
बेरहमी से चल रही थी
सबसे बड़ा पेड़ घबरा गया
बाकी पेड़ों से कहने लगा
पहला वार मुझ पर होगा
तुम्हारा नंबर बाद में
आयेगा
हिम्मत ना हारना
जो किस्मत में लिखा
सहना होगा
अब इंसान भ्रष्ट हो गया
माँ बाप को भी नहीं
छोड़ता
पेड़ों को क्या छोड़ेगा
निरंतर
शोषण पेड़ों का किया
पानी को व्यर्थ बहाया
अब धरती को भी नहीं
छोड़ेगा
लालच में भूल गया
बिना पेड़ पानी के कैसे
जियेगा ?
05-06-2011
1001-28-06-11
(५ जून विश्व पर्यायवरण दिवस पर)
6/05/2011 06:33:00 pm
Nirantar
Posted in:
5 टिप्पणियाँ:
बहुत बढ़िया रचना
यह बात हमें बात रखनी चाहिए कि बिना जल और वृक्षों के जीवन कैसे होगा....
आपको फॉलो भी कर लिया है...ताकि आगे भी पढ़ने को मिलता रहे...आप भी आइए...
इस लालच का अंत कहाँ होगा...
बढ़िया रचना
बढ़िया रचना
एक टिप्पणी भेजें