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सोमवार, 28 अगस्त 2017

पत्रकार प्रेस क्लब (पीपीसी)की प्रदेश स्तरीय बैठक सम्पन्न


पत्रकार प्रेस क्लब (उत्तर प्रदेश) की प्रदेश स्तरीय बैठक आज दिनांक 27ध्08ध्17 को वाराणसी स्थित वाराणसी के जिलाण्यक्ष पवन पाण्डेय के आवास शिवम पैलेस पर सम्पन्न हुई। बैठक के मुख्य अतिथि प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम पाठक रहे तथा अध्क्षता क्लब के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष हरीश सिंह ने की। 
कार्यक्रम का शुभरम्भ वरिष्ठ पदाधिकारियों के माल्यर्पण व स्वागत के उपरान्त हुआ। 

पत्रकार प्रेस क्लब की उत्तर प्रदेश इकाई के समस्त पदाधिकारिगण जिसमे प्रदेश, मंडल एवम सभी जिलों के पदाधिकारियों के औपचारिक स्वागत सत्कार, आपसी परिचय, अतिथियों के उदबोधन के बाद , हिंदुस्तान समाचार पत्र के छायाकार स्व0 विजय यादव जी की असायमिक निधन पर शोक प्रकट करते हुए 2 मिनट का मौन रखकर उनकी दिवंगत आत्मा की शान्ति की प्रार्थना की गई। उसके उपरांत संगठन की रीति नीति, वर्तमान में पत्रकार जगत के हितार्थ किये जा रहे उल्लेखनीय कार्य, पत्रकार जगत के भविष्य एवं पत्रकारों और उनके परिवार की सुरक्षा हेतु विस्तृत चर्चा की गई। 

प्रदेश अध्यक्ष श्री घनश्याम पाठक जी द्वारा कई नवागत पत्रकारों की जिज्ञासा को सरल तरीके से जानकारी देते हुए संतुष्ट किया गया। इस अवसर पर संगठन के समस्त पदाधिकारी एवम कई विशिष्ट सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक का आयोजन जिला अध्यक्ष वाराणसी श्री पवन पांडेय जी द्वारा किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पीपीसी के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री हरीश सिंह जी के साथ मंच संचालन प्रदेश अध्यक्ष श्री घनश्याम पाठक जी द्वारा किया गया।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री घनश्याम पाठक जी ने पत्रकारों से जुडी कई समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, पत्रकारों के हित एवम सुरक्षा के लिए कई सुझाव एवं उपाय निर्देशित किये। पत्रकार साथियों को हर सम्भव सहायता का भरोसा दिलाने के साथ ही उन्होंने ऐसे पत्रकारों को सलाह एवम चेतावनी भी दी की कोई भी साथी अपने व्यक्तिगत स्वार्थों या दुर्भावनाओं से ग्रसित होकर पत्रकारिता या संगठन का उपयोग करने की कोशिश ना करे।
प्रदेश अध्यक्ष जी के साथ बैठक में मौजूद प्रदेश संयोजक श्री विनय मौर्या जी, प्रदेश उपाध्यक्षगण श्री हरीश सिंह जी, श्री संतोष पांडेय,श्री कृष्ण कुमार द्विवेदी, श्री सोनू सिंह, प्रदेश संगठन मंत्री श्री मदन मोहन शर्मा, पूर्वांचल प्रभारी श्री प्रवीण यादव(यश), प्रदेश सचिव श्री गौरव शुक्ला जी ने जिलेवार सभी पदाधिकारियों एवम सदस्यों की समस्याओं एवम उनकी सलाह पर विचार विमर्श किया।
बैठक में कई वक्ताओं ने अपना अपना मत और विचार मंच पर लघु वाक्यों में प्रस्तुत किया। ऐसे ही वक्ताओं की कड़ी में प्रदेश उपाध्यक्ष श्री सोनू सिंह द्वारा पंचकुला में हुई वीभत्स घटना में मीडियाकर्मियों के साथ हुए हिंसक व्यवहार को देखते हुए समाचार संकलन करते समय स्वयं की सुरक्षा का पूरा ध्यान देने की सलाह दी। जिलाउपाध्यक्ष जौनपुर अखिलेश सिंह जी में कहा कि संगठन के प्रत्येक सदस्य सबको एक परिवार के रूप लेकर चलना होगा तभी संगठन का सही अर्थ होगा। इसी तरह पीपीसी यूपी के प्रदेश संयोजक श्री विनय मौर्या जी, पूर्वांचल संयोजक श्री प्रवीण यश जी, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री सन्तोष पांडेय जी, समेत संगठन कई के सदस्यों एवम पदाधिकारियों द्वारा पत्रकार हित के अपनी बातें रखीं।
इस प्रादेशिक बैठक में प्रदेश अध्यक्ष जी श्री घनश्याम पाठक जी के साथ संगठन के प्रदेश संगठन मंत्री श्री मदन मोहन शर्मा जी, वाराणसी मंडल अध्यक्ष श्री पवन त्रिपाठी जी, मंडल अध्यक्ष मिर्जापुर श्री राहुल सिंह जी,जिला संरक्षक वाराणसी श्री सकल देव सिंह जी, जिला उपाध्यक्ष वाराणसी श्री नवीन प्रधान जी  जिला अध्यक्ष चंदौली श्री आशुतोष तिवारी जी, जिला संयोजक चंदौली श्री मुकेश मौर्या जी, जिला अध्यक्ष जौनपुर श्री कृपाशंकर यादव जी,जिला संयोजक जौनपुर
 श्री लालचंद निषाद जी, जिला संयोजक भदोही श्री 
समीर वर्मा जी, आशीष सोनी जी, रामलाल साहनी जी, 
संजीव शर्मा चंद्रप्रकाश तिवारी, अनूप शुक्ला, विक्रम 
मल्होत्रा, रेवती रमण शर्मा, नीरज कुमार मौर्या, 
उमेश कुमार उपाध्याय, उपेंद्र कुमार यादव, कैलाश 
प्रसाद साहनी, दिनानाथ, राजेंद्र प्रसाद सिंह, पुष्कर मिश्र, 
सुधीर कुमार विश्वकर्मा, संजीव शर्मा, विवेक कुमार,
 गोविंद कुमार श्रीवास्तव, दिलीप कुमार मौर्या,
 मिथिलेश कुमार सिंह, चंद्र प्रकाश तिवारी, प्रभु नारायण प्रजापति, जितेंद्र कुमार अग्रहरि, आनंद चतुर्वेदी, मदन मोहन मिश्रा, योगेश श्रीवास्तव, डॉक्टर बीपी यादव, आशीष भूषण सिंह, मनीष तिवारी, प्रभात रस्तोगी, अरुण पटेल, संतोष सिंह, राजीव सेठ, अमरदीप, राजकुमार, केएल शाही, मुकेश मिश्रा, धर्मेंद्र पांडेय, पिंकू सरदार, कृष्णकांत मिश्रा, अभिनव कुमार पांडेय, वीरेंद्र पांडेय, पंकज पांडेय, संजय कुमार मिश्रा, राजेंद्र कुमार पांडेय, राजेश कुमार मिश्र, अवनीश कुमार दुबे, संतोष कुमार दुबे, मुहम्मद जावेद, ओम प्रकाश,  दिलीप सिंह, भरत निधि तिवारी, सुरेंद्र सिंह, वली अहमद, रामकृष्ण पांडेय, शुभम सिंह, दीपक तिवारी, सुनील प्रजापति, रामाज्ञा यादव, शशिकांत मौर्य, कमलेश यादव, राजेश मिश्र, गुलजार अली, विनोद कुमार सिंह, अजीत सिंह, संतोष नागवंशी, मोहम्मद इरफान हाशमी, मंजीत कुमार पटेल, बजरंगी प्रसाद, कृष्णा सिंह, विवेक यादव, विकी मध्यानी, पंकज कुमार पांडेय, रामलाल साहनी, महेश कुमार मिश्रा समेत सैंकड़ो पत्रकार साथी पुरे जोश के साथ शामिल हुए। 





शनिवार, 5 अप्रैल 2014

उत्तर प्रदेश-- जाति के चक्रव्यूह को कैसे भेद पायेगी भाजपा

जाति आधारित पार्टियों सपा बसपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की चुनौती
देश की राजनीति में मौजूदा समय एक अजीब सा माहौल बन चुका है। पहली बार देखा जा रहा है कि कोई एक व्यक्ति पार्टी से उपर उठकर चुनाव मैदान में उतरा हुआ है और यह माहौल सिर्फ एकतरफा ही नहीं वरन् हर तरफ से बना हुआ है। जो राजनीतिक सरगर्मिंया बढ़ी हुई हैं उसमें एक तरफ भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री प्रत्याषी नरेन्द्र दामोदर दास मोदी हैं तो दूसरी तरफ सारी राजनीतिक पार्टियां एकजुट होती दिखायी दे रही हैं। सर्वविदित है कि दिल्ली की कुर्सी पर वहीं विराजित होता है जिसके उपर उत्तर प्रदेष का हाथ होता है। वह हाथ चाहे बाहर से हो अन्दर से। हालांकि चुनावी सर्वे में यह बात उभर कर सामने आ रही है कि भजपा उत्तर प्रदेष में सबसे अधिक सीटे्र हासिल करने वाली पार्टी बनेगी, किन्तु सवाल यह भी उठता है कि यहां पर जातीय आधार पर ध्रुवीकरण हो चुके वोटों को भाजपा कैसे अपने पक्ष में कर पायेगी। क्या जाति के इस चक्रव्यूह को तोड़कर उत्तर प्रदेष में भजपा अपनी धमक जमा पायेगी।
गौरतलब है कि उत्तरप्रदेष कांग्रेस के हाथों से निकलने के बाद जाति आधारित पार्टियों ने अपनी जड़े जमा ली हैं। प्रदेष की सत्ता पर काबिज समाजवादी पार्टी पिछड़ी जाति विषेश कर यादव वोटों पर अपनी बपौती समझने के साथ मुस्लिम वोट पर भी अपना अधिकार समझती है। वहीं दलितों की मसीहा बनकर उभर चुकी बहुजन समाजवादी पार्टी पिछले दो दषक से दलित वोटों पर अपना कब्जा जमाये हुये है। देखा यह भी गया है कि जबसे जाति आधारित दल सपा बसपा ने प्रदेष में अपना अधिपत्य जमाया है। तभी से सवर्ण जाति के वोटर अनिष्चय के हालात में जी रहे हैं। व्यापारी वर्ग के साथ सवर्ण वोट पर भाजपा का कब्जा भले ही समझा जाता रहा है किन्तु सपा बसपा के अस्तित्व में आने के बाद यह वर्ग भी गेंद की तरह कभी एक पाले में जाता है तो कभी दूसरे की गोद में बैठने के लिये विवष होता है। पिछले विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो समाजवादी पार्टी के सरकार में बढ़ते अपराध और कानून व्यवस्था से उबकर तथा बसपा की सोषल इंजीनियरिंग के चलते ब्राह्णों के साथ अन्य जाति के वोटरों ने भी प्रदेष की कुर्सी मायावती को सौंप दी। हालांकि मायावती के षाशनकाल में कानून व्यवस्था सख्त दिखायी दी किन्तु सत्ता में आते ही दलित समाज पर अंकुष सरकार नहीं लगा पायी। जिसका परिणाम रहा कि सवर्णों की जमीन पर कब्जा और भारी तादात में फर्जी एससी एसटी के मुकदमें होने लगे। यहां तक कि दलितों को बिजली का नंगा तार कहा जाने लगा। सवर्ण समाज अपमान के घूंट पीकर चुप रहने के लिये विवष रहा। जिसका परिणाम 2012 के विधानसभा चुनाव में दिखायी दिया। पूर्व के षासनकाल में हुई समाजवादी सरकार की लचर व्यवस्था को भूलकर लोगों ने फिर उसे सत्ता सौंप दी।
हालांकि यह कहा जा सकता है कि यह लोकसभा चुनाव है और विधानसभा चुनाव की गणित यहां मायने नहीं रखती। फिर भी जातीय समीकरण को नजरअंदाज इस चुनाव में भी नहीं किया जा सकता। सर्वे पोल भले ही भाजपा की बढ़त बता रहें हो किन्तु ऐसे सर्वेक्षण अधिकतर षहरी क्षेत्रों में किये जाते हैं जहां वोटरों का षिक्षित तबका रहता है। इसके इतर जातीय समीकरण ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक प्रभावी होते हैं, जहां के वोटरों पर सपा बसपा जैसी जातीय पार्टियां प्रभावी हैं।
आज के चुनावी परिवेष में नजर डालें तो यह चुनाव दूसरे आम चुनावों से अलग दिखायी दे रहा है। भारतीय जनता पार्टी नरेन्द्र मोदी के हिन्दुत्व वाली छवि को भुनाने में लगी है तो और पार्टियों मोदी के विरोध में कथित धर्मनिरपेक्षता का राग अलाप रही हैं। अन्य दलों के निषाने पर भाजपा नहीं बल्कि नरेन्द्र मोदी दिखायी दे रहे हैं। अन्य दलों के नेता मोदी के खिलाफ जो तीर तरकष में से निकाल कर चल रहे हैं उसका उसका लबोलुआब यह है कि मोदी मुसलमानों के दुष्मन हैं और वे यदि सत्ता में आये तो मुसलमानों का जीना दूभर हो जायेगा।
उत्तर प्रदेष में सपा बसपा दो प्रमुख दल अभी तक यहीं समझ रहे हैं कि एक विषेश जाति के वोट बैंक पर उनका कब्जा है ही यदि मुस्लिम वोटरों को अपने पक्ष में कर लिया तो चुनावी नैया पार कर जायेंगे। सपा का घोशणा पत्र इस बात को खुद ही प्रमाणित कर रहा है। दूसरी तरफ बसपा की मंषा भी किसी से छुपी नहीं है, उसके पास वोट बैंक का एक बड़ा हथियार है जिसमें सेंध लगा पाना अन्य दलों के लिये टेढ़ी खीर ही है। प्रदेष में जातीय समीकरण के अनुसार ही उसने टिकटों का वितरण किया है। बसपा का अपना वोट बैंक और प्रत्याषी की जाति का वोट पाकर बसपा भी दिल्ली पहुंचने का सपना संजो चुकी है।
अब मुस्लिम समुदाय के मतों पर नजर डाली जाय तो वे अभी तक अनिष्चय की स्थिति में दिखायी दे रहे हैं। भले ही अपने भाशणों में मोदी विकास और सुषासन की बात कह रहे हैं किन्तु उनकी हिन्दूवादी छवि के कारण मुस्लिम वोट पर कुछ खास प्रभाव पड़ता दिखायी नहीं दे रहा है। मुस्लिम वोटरों की मंषा इस बार सपा या बसपा के पक्ष में नहीं बल्कि उसके पक्ष में दिख रहा है जो भाजपा के प्रत्याषी को परास्त करने की क्षमता रखता है।
लोकसभा चुनाव में मोदी के लहर की बात करें तो निष्चित रूप से मोदी की लहर चल रही है। विशेष कर युवा वोटरों पर मोदी का काफी असर दिख रहा है। मोदी की हिन्दुत्ववादी छवि इस बार काफी प्रभाव दिखा सकती है। इसका एक कारण यह है कि सपा का मुस्लिम प्रेम उसके वोट बैंक को रास नहीं आ रहा है। और दूसरा कारण यह भी है कि मंहगाई, भ्रश्टाचार के कारण कांग्रेस के षासनकाल से उब चुकी जनता अब उससे निजात भी पाना चाहती है। लोगों में यह चर्चा भी जोरों पर हो रही है कि दिल्ली की सत्ता पर कांग्रेस या भाजपा के अलावा दूसरा कब्जा करने में सक्षम नहीं है। सपा बसपा जैसे दल अंततागत्वा कांग्रेस को ही समर्थन देकर सत्ता सौंप देगी और उन्हें फिर वहीं त्रासदी झेलने के लिये विवष होना पड़ेगी। इसका असर यह है कि इस चुनाव में खुद अपनी सरकार चुनना चाहते हैं। भले ही भाजपा के लिये जातिगत चक्रव्यूह भेदना मुष्किल दिखायी दे रहा है किन्तु भाजपा के रणनीतिकार यदि ग्रामीण वोटरों पर अपनी पकड़ मजबूत कर लिये तो चुनावी हवा का रूख अप्रत्याषित रूप से बदल भी सकता है।

उत्तर प्रदेश-- जाति के चक्रव्यूह को कैसे भेद पायेगी भाजपा

जाति आधारित पार्टियों सपा बसपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की चुनौती
देश की राजनीति में मौजूदा समय एक अजीब सा माहौल बन चुका है। पहली बार देखा जा रहा है कि कोई एक व्यक्ति पार्टी से उपर उठकर चुनाव मैदान में उतरा हुआ है और यह माहौल सिर्फ एकतरफा ही नहीं वरन् हर तरफ से बना हुआ है। जो राजनीतिक सरगर्मिंया बढ़ी हुई हैं उसमें एक तरफ भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री प्रत्याषी नरेन्द्र दामोदर दास मोदी हैं तो दूसरी तरफ सारी राजनीतिक पार्टियां एकजुट होती दिखायी दे रही हैं। सर्वविदित है कि दिल्ली की कुर्सी पर वहीं विराजित होता है जिसके उपर उत्तर प्रदेष का हाथ होता है। वह हाथ चाहे बाहर से हो अन्दर से। हालांकि चुनावी सर्वे में यह बात उभर कर सामने आ रही है कि भजपा उत्तर प्रदेष में सबसे अधिक सीटे्र हासिल करने वाली पार्टी बनेगी, किन्तु सवाल यह भी उठता है कि यहां पर जातीय आधार पर ध्रुवीकरण हो चुके वोटों को भाजपा कैसे अपने पक्ष में कर पायेगी। क्या जाति के इस चक्रव्यूह को तोड़कर उत्तर प्रदेष में भजपा अपनी धमक जमा पायेगी।
गौरतलब है कि उत्तरप्रदेष कांग्रेस के हाथों से निकलने के बाद जाति आधारित पार्टियों ने अपनी जड़े जमा ली हैं। प्रदेष की सत्ता पर काबिज समाजवादी पार्टी पिछड़ी जाति विषेश कर यादव वोटों पर अपनी बपौती समझने के साथ मुस्लिम वोट पर भी अपना अधिकार समझती है। वहीं दलितों की मसीहा बनकर उभर चुकी बहुजन समाजवादी पार्टी पिछले दो दषक से दलित वोटों पर अपना कब्जा जमाये हुये है। देखा यह भी गया है कि जबसे जाति आधारित दल सपा बसपा ने प्रदेष में अपना अधिपत्य जमाया है। तभी से सवर्ण जाति के वोटर अनिष्चय के हालात में जी रहे हैं। व्यापारी वर्ग के साथ सवर्ण वोट पर भाजपा का कब्जा भले ही समझा जाता रहा है किन्तु सपा बसपा के अस्तित्व में आने के बाद यह वर्ग भी गेंद की तरह कभी एक पाले में जाता है तो कभी दूसरे की गोद में बैठने के लिये विवष होता है। पिछले विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो समाजवादी पार्टी के सरकार में बढ़ते अपराध और कानून व्यवस्था से उबकर तथा बसपा की सोषल इंजीनियरिंग के चलते ब्राह्णों के साथ अन्य जाति के वोटरों ने भी प्रदेष की कुर्सी मायावती को सौंप दी। हालांकि मायावती के षाशनकाल में कानून व्यवस्था सख्त दिखायी दी किन्तु सत्ता में आते ही दलित समाज पर अंकुष सरकार नहीं लगा पायी। जिसका परिणाम रहा कि सवर्णों की जमीन पर कब्जा और भारी तादात में फर्जी एससी एसटी के मुकदमें होने लगे। यहां तक कि दलितों को बिजली का नंगा तार कहा जाने लगा। सवर्ण समाज अपमान के घूंट पीकर चुप रहने के लिये विवष रहा। जिसका परिणाम 2012 के विधानसभा चुनाव में दिखायी दिया। पूर्व के षासनकाल में हुई समाजवादी सरकार की लचर व्यवस्था को भूलकर लोगों ने फिर उसे सत्ता सौंप दी।
हालांकि यह कहा जा सकता है कि यह लोकसभा चुनाव है और विधानसभा चुनाव की गणित यहां मायने नहीं रखती। फिर भी जातीय समीकरण को नजरअंदाज इस चुनाव में भी नहीं किया जा सकता। सर्वे पोल भले ही भाजपा की बढ़त बता रहें हो किन्तु ऐसे सर्वेक्षण अधिकतर षहरी क्षेत्रों में किये जाते हैं जहां वोटरों का षिक्षित तबका रहता है। इसके इतर जातीय समीकरण ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक प्रभावी होते हैं, जहां के वोटरों पर सपा बसपा जैसी जातीय पार्टियां प्रभावी हैं।
आज के चुनावी परिवेष में नजर डालें तो यह चुनाव दूसरे आम चुनावों से अलग दिखायी दे रहा है। भारतीय जनता पार्टी नरेन्द्र मोदी के हिन्दुत्व वाली छवि को भुनाने में लगी है तो और पार्टियों मोदी के विरोध में कथित धर्मनिरपेक्षता का राग अलाप रही हैं। अन्य दलों के निषाने पर भाजपा नहीं बल्कि नरेन्द्र मोदी दिखायी दे रहे हैं। अन्य दलों के नेता मोदी के खिलाफ जो तीर तरकष में से निकाल कर चल रहे हैं उसका उसका लबोलुआब यह है कि मोदी मुसलमानों के दुष्मन हैं और वे यदि सत्ता में आये तो मुसलमानों का जीना दूभर हो जायेगा।
उत्तर प्रदेष में सपा बसपा दो प्रमुख दल अभी तक यहीं समझ रहे हैं कि एक विषेश जाति के वोट बैंक पर उनका कब्जा है ही यदि मुस्लिम वोटरों को अपने पक्ष में कर लिया तो चुनावी नैया पार कर जायेंगे। सपा का घोशणा पत्र इस बात को खुद ही प्रमाणित कर रहा है। दूसरी तरफ बसपा की मंषा भी किसी से छुपी नहीं है, उसके पास वोट बैंक का एक बड़ा हथियार है जिसमें सेंध लगा पाना अन्य दलों के लिये टेढ़ी खीर ही है। प्रदेष में जातीय समीकरण के अनुसार ही उसने टिकटों का वितरण किया है। बसपा का अपना वोट बैंक और प्रत्याषी की जाति का वोट पाकर बसपा भी दिल्ली पहुंचने का सपना संजो चुकी है।
अब मुस्लिम समुदाय के मतों पर नजर डाली जाय तो वे अभी तक अनिष्चय की स्थिति में दिखायी दे रहे हैं। भले ही अपने भाशणों में मोदी विकास और सुषासन की बात कह रहे हैं किन्तु उनकी हिन्दूवादी छवि के कारण मुस्लिम वोट पर कुछ खास प्रभाव पड़ता दिखायी नहीं दे रहा है। मुस्लिम वोटरों की मंषा इस बार सपा या बसपा के पक्ष में नहीं बल्कि उसके पक्ष में दिख रहा है जो भाजपा के प्रत्याषी को परास्त करने की क्षमता रखता है।
लोकसभा चुनाव में मोदी के लहर की बात करें तो निष्चित रूप से मोदी की लहर चल रही है। विशेष कर युवा वोटरों पर मोदी का काफी असर दिख रहा है। मोदी की हिन्दुत्ववादी छवि इस बार काफी प्रभाव दिखा सकती है। इसका एक कारण यह है कि सपा का मुस्लिम प्रेम उसके वोट बैंक को रास नहीं आ रहा है। और दूसरा कारण यह भी है कि मंहगाई, भ्रश्टाचार के कारण कांग्रेस के षासनकाल से उब चुकी जनता अब उससे निजात भी पाना चाहती है। लोगों में यह चर्चा भी जोरों पर हो रही है कि दिल्ली की सत्ता पर कांग्रेस या भाजपा के अलावा दूसरा कब्जा करने में सक्षम नहीं है। सपा बसपा जैसे दल अंततागत्वा कांग्रेस को ही समर्थन देकर सत्ता सौंप देगी और उन्हें फिर वहीं त्रासदी झेलने के लिये विवष होना पड़ेगी। इसका असर यह है कि इस चुनाव में खुद अपनी सरकार चुनना चाहते हैं। भले ही भाजपा के लिये जातिगत चक्रव्यूह भेदना मुष्किल दिखायी दे रहा है किन्तु भाजपा के रणनीतिकार यदि ग्रामीण वोटरों पर अपनी पकड़ मजबूत कर लिये तो चुनावी हवा का रूख अप्रत्याषित रूप से बदल भी सकता है।

सोमवार, 13 जून 2011

बाबा रामदेव के नाम पर हो-हल्ला क्यों...?

बहुत पहले मैं टीवी पर बाबा रामदेव जी का योग शिविर देख रहा था, बाबा के इस शिविर का सञ्चालन विदेश में हो रहा था. उस दौरान जब योग शिविर की समाप्ति हुयी तो वहा पर गाना बजने लगा " मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरा मोती, मेरे देश की धरती" " यह देश है वीर जवानों का" इस देश भक्ति गीत के साथ लोग भारत का तिरंगा लहरा रहे थे और झूम रहे थे, मजेदार बात यह थी की उस दौरान विदेशी भी झूम रहे थे. बहुत मनभावन लग रहा था यह दृश्य. उस दृश्य ने हमें स्वामी विबेकानंद की याद दी. जिन्होंने अम्रेरिका में जाकर देश का नाम बुलंद  किया. मैं देखता आ रहा हूँ बाबा अपना योग शिविर चाहे भारत में करें या विदेश में उन्होंने हमेशा देश भक्ति की बात ही की है. वे अपने योग शिविरों में हमेशा भ्रष्टाचार और काले धन के विरुद्ध आवाज़ बुलंद की है. बाबा चाहते तो वे सर्कार की हां में हां मिलाकर हमेशा सभी के चहेते बने रहते पर उन्होंने ऐसा नहीं किया. उन्होंने हमेशा राष्ट्रभक्ति और देश प्रेम की बात की. चाहे हिन्दू हो या मुसलमान सभी उनके समर्थक रहे. पर पिछले दिनों परिस्तिथियाँ  बदली  जब उन्होंने भ्रष्टाचार और काले धन जैसे मुद्दे को लेकर दिल्ली में आमरण अनशन किया. 
देखा जाता है की बुद्धिमान से बुद्धिमान व्यक्ति भी भ्रष्ट लोंगो के कुचक्र में फंस जाता है. बाबा भी फंसे, राजनीती के गंदे खेल से वाकिफ होने के बावजूद वे भ्रष्ट राजनीतिज्ञों  की चाल में फंस गए. पहली भूल उनसे तब हुयी जब उन्होंने मंत्रियों को पत्र लिखकर दे दिया. यह बात बाबा अनशन की शुरुआत में अपने समर्थको को बता देते तो सरकार की सारी चालाकी धरी की धरी रह जाती, पर उन्होंने विश्वास में खता खायी. बाबा यही पर मत खा गए और लोंगो को बोलने का मौका दे दिया. पर हमें विचार करना होगा की वे टक्कर किस से ले रहे थे, इस देश की भ्रष्ट सरकार से जो बाबा के आन्दोलन से डरी हुयी थी. और लोंगो को बोलने का मौका दे दिया, उन लोंगो को जिन्हें किसी की अच्छाईयाँ दिखाई नहीं देती बल्कि उन्हें बुराईयों को खोजने की आदत है. 
उस से पहले हमें यह सोचना होगा की बाबा का आन्दोलन किस के लिए था. आज देश की जो दुर्दशा है वह किसी से छुपी नहीं है. आज विश्व में हमारा देश भ्रष्टाचार दूसरे नंबर पर है. और उसी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वालो पर सरकार लाठी चार्ज करवा रही है. अपनी जान बचाने के लिए बाबा ने वाही किया जो उन्हें उचित लगा, उनका हम सभी के बीच रहना जरुरी है. आज कितने लोग हैं जो इस मुद्दे पर आवाज़ बुलंद कर रहे है. हो सकता है सरकार भगदड़ दिखाकर बाबा को जान से मरने की योजना बना चुकी थी और इसीलिए रात को उस समय यह कदम उठाया जब दूर दराज़ से आये लोग सो रहे थे. वास्तव में यह कांड जलियाँ वाला बाग से कमतर नहीं था. हमें सोचना होगा की इस देश को आज़ाद करने वाले क्रांतिकारियों को अपनी जान बचाने के लिए कई बार भागना पड़ा था. यह कायरता नहीं थी. पर जिन्हें इस देश से प्यार नहीं है उन्हें कमियां ही दिखाई देंगी. उन्हें कोई ठग कह रहा है तो कोई भगोड़ा. इससे बड़ी गन्दी मानसिकता हमारी क्या हो सकती है. 
इस देश में चाहे क्रन्तिकारी हो हो या महापुरुष सभी से चाहे अनचाहे अपने जीवन में भूल हो जाती है. यहाँ तक की छोटी मानसिकता रखने वालो ने मर्यादा पुरोसोत्तम भगवान राम पर भी अंगुली उठाई. 
देखा जाय तो बाबा एक पवित्र मकसद को लेकर संघर्ष कर रहे हैं. और इसमें सभी को साथ देना चाहिए. पर यहाँ पर भी लोग कांग्रेस की घटिया चाल में फंस गए. और उसी की तरह उन्हें RSS और BJP  का एजेंट बता दिया. यही तो सरकार चाहती थी. सरकार कभी नहीं चाहेगी की देश के लोग एकजुट हो क्योंकि आज़ादी के बाद से ही सत्ता संभल रही इस सरकार से जुड़े लोंगो के ही काला धन विदेशी बैंको में जमा हैं.  शर्म तो हमें आनी चाहिए की सत्ता से जुड़े लोग जो समझाना चाहते हैं वही लोग समझ रहे हैं. 
बाबा ने RSS और BJP  को अनशन में साथ लेने के लिए आमंत्रण नहीं दिया था. वे लोग खुद ही वहा गए. और बाबा ने किसी को मना भी नहीं किया था. उन्होंने कब कहा की मुस्लिम संगठन और अन्य राजनितिक पार्टियाँ उनके अनशन में न आयें. फिर लोग क्यों नहीं गए, 
राजनीती का गन्दा खेल खेलने वाले आम लोंगो को अपने भ्रम जाल में फंसाकर  गुमराह करते रहते हैं और हम गुमराह होते रहते हैं इसी का फायदा फंदेबाज लोग उठाते है. आज जरुरत इस बात की है कि दकियानूसी विचारो को छोड़कर देश हित के मुद्दे पर सभी एक जुट हो, यदि बाबा आज देशभक्ति, कालाधन और भ्रष्टाचार कि बात करते हैं तो हमें एकजुट होकर उनका साथ देना होगा. आज वे उचित मुद्दे को लेकर खड़े हुए हैं, हां जब हमें लगे कि वे गलत रास्ते  पर हैं तो हमें उनका विरोध करने को भी तैयार रहना होगा, पर बेवजह बाबा पर अंगुली उठाकर हम झूठी वाहवाही भले ही चाँद लोंगो कि बटोर ले पर यह भी सोचे कि यदि यही हालत बने रहे तो क्या आने वाली हमारी पीढ़ी सुख और शांतिपूर्वक रह पायेगी.

शुक्रवार, 10 जून 2011

साहित्यिक मंच पर धार्मिक विवाद उचित नहीं - BBLM आज शनिवार को पोस्ट लगाने पर प्रतिबन्ध है. बिना पूरी पोस्ट पढ़े टिपण्णी न करें .

सम्मानित लेखक बंधुओ, "भारतीय ब्लॉग लेखक मंच" अल्प समय में ही नित नई ऊँचाइयों को छू रहा है, इसमें आप सभी का महत्वपूर्ण योगदान है. पर पिछले कुछ दिनों से देख रहा हूँ. कुछ लोग अनायास ही अपने लेखो को धार्मिक विवाद का केन्द्र बना रहे हैं. अभिव्यक्ति की स्वंतत्रता का अधिकार सभी को है, पर उस स्वतंत्रता पर तब सवाल उठते हैं जब लोग दूसरे की भावनाए आहत करने लगते हैं. मैं नहीं चाहता की इस परिवार का कोई सदस्य बाहर निकले, जिस तरह लोग मिल जुल कर योगदान करते रहे हैं उसी तरह करते रहे. किसी विषय पर जब हम पोस्ट लिखें तो उसकी भाषा संसदीय होनी चाहिए. पोस्ट या टिप्पणिया ही हमारे मनोभावों को अभिव्यक्ति हैं. टिप्पणियों पर हमारा कोई अधिकार नहीं है. क्योंकि टिपण्णी वह भी करता है जो इस मंच का लेखक नहीं है. पर लेखको को यह ध्यान देना होगा की जो बाते हम कह रहे है उसकी भाषा क्या है और लोंगो पर उसका प्रभाव क्या पड़ेगा. यह एक "साहित्यिक मंच" है. यहाँ पर हिन्दू और मुसलमान को लक्ष्य बनाकर लेख लिखना कदापि उचित नहीं है. धार्मिक परिचर्चा, विवाद आदि के लिए कई सामूहिक मंच है. कोई बात यदि आपसी संबंधो में कटुता पैदा करे तो उन बातों से हमें परहेज़ करना होगा.
एक बार पुनः आप नियमो को पढ़े और उसी के अनुरूप पोस्ट करें, किसी सह्त्यिक मंच की गरिमा तभी है. जब उसके लेखक बुद्धिजीवी हो, और आप कितने बुद्धिजीवी है वह आपके लेखों से ही झलकता है. 
बंधुओ, हममे से कोई बहुत पढ़ा लिखा है और किसी ने अल्प शिक्षा प्राप्त की है, कोई उच्च पदों पर है तो कोई व्यवसायी, पत्रकार, चिकित्सक, समाजसेवी आदि है. कोई मोटा तो कोई पतला है, किसी के पास बहुत संम्पति होगी तो कोई बमुश्किल अपना परिवार चलाता है. इसके बावजूद हम सभी एक साथ जुड़े है जबकि अधिकतर लोग एकदूसरे को देखे भी नहीं है. फिर भी हमारा एक परिवार है.
हमारे कहने का भावार्थ सिर्फ इतना है की हमारी पहचान सिर्फ हमारे विचार और अभिव्यक्ति है. हमारे लेख ही हमारी पहचान है. 
बंधुओ इस मंच पर यह कही नहीं लिखा है की यह किस धर्म को बढ़ावा देता है. जरा गौर फरमाइए : भारतीय ब्लोगरों तथा लेखकों का एक सशक्त परिवार : इसके प्रत्येक शब्द की जो गरिमा है उस पर ध्यान दे. ..
भारतीय ......... इस मंच का लेखक "भारतीय" हो चाहे वह विश्व के कोने में कही भी रहता है. ....
ब्लोगरो तथा लेखको --  यहाँ पर हम एक परिवार के सदस्य हैं. हमारा धर्म ब्लोगिंग और जाति लेखक है. 
यह भूल जाय की हम हिन्दू मुसलमान  होने से पहले भारतीय है. जिस भारत की कल्पना हम सभी साकार करते है और वह अपनी कल्पना में, और यह सोच सिर्फ जुबान पर नहीं वरन दिल में भी होनी चाहिए... हम वह पत्रिका न जिसके कवर पर "आयुर्वेद" लिखा हो और अन्दर के पन्ने पर "अंग्रेजी और होमिओ पैथिक" दवाओ के नाम दिखे, धर्म के नाम पर हम सभी किसी न किसी ब्लॉग पर लड़ रहे हैं. 
सशक्त परिवार..... यदि आप चाहते हैं की  जब हम कभी किसी मोड़ पर मिले तो एक दुसरे से नजरे न चुरानी पड़े, तो सभी को कुछ देर के लिए  अपने अहम् को भूलने  की कोशिस करनी होगी चाहे वह हिन्दू हो या मुसलमान .
बिना किसी लाग लपेट के अब यह कहना चाहूँगा की अनवर भाई की यह पोस्ट.

घूंघट में सन्यासी : भारत के इतिहास में पहली बार, बाबा रामदेव जी का अनोखा 'योग'-दान

विवाद की शुरुआत का कारण बनी... क्योंकि उनका यह शीर्षक ही चिढाने के अंदाज़ में है. बाबा के करोडो अनुयायी हैं. इस मंच पर भी उनके कई भक्त है और कई विरोधी, यह बात हम भी मानते है की बाबा की सशत्र सेना बनाने की बात गलत है, जिसको बाबा ने भी अहसास किया, और अपनी बात वापस ली, अभी तक हम लोग ही बाबा का नाम जप रहे थे आज बाबा इतने बुरे हो गए. जब इन्द्रासन पर बैठने वालो को एक सन्यासी ने डिगा दिया तो सत्ता में बैठे लोग कैसे चाहेंगे की भ्रष्टाचार से लड़ने वाला एक साधारण व्यक्ति कैसे सिंहासन डिगाने का साहस करेगा. अपने विचार आप सभ्य भासा में दे सकते थे पर नहीं दिए. यही नहीं आज तो एक बंधू ने ५ मिनट में ३ पोस्ट लगा दिए. खैर जहाँ प्रेम है वहा पोस्ट के आंकड़े  मायने नहीं रखते, 

आज के बाद कृपया आप सभी जिम्मेदार बने अन्यथा, आप किसी के भी जाने का हमें दुःख होगा. उम्मीद है आप मंच की गरिमा का ध्यान रखेंगे... ध्यान दे यह हरीश सिंह, मिथिलेश द्विवेदी या योगेन्द्र पाल का विचार नहीं बल्कि ..... 

"भारतीय ब्लॉग लेखक मंच"  के हैं. 

जो भी ब्लोगर इस मंच के नियमो का अनुपालन नहीं करेगा. वह बाहर जा सकता है.

बुधवार, 1 जून 2011

प्रेस क्लब ने मनाया पत्रकारिता दिवस

प्रेस क्लब अध्यक्ष मिथिलेश द्विवेदी ने किया अतिथियों का स्वागत 
प्रेस क्लब भदोही के तत्वाधान में जनपद के जंगीगंज स्थित माँ विंध्यवासिनी इंटर कालेज के प्रांगण में ३० मई को पत्रकारिता दिवस एवं डॉ. श्यामकांत मिश्रा स्मृति अवार्ड का आयोजन किया गया, जिसमे मुख्य अतिथि रहे उत्तर प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता उच्चन्यायालय इलाहाबाद  जनाब जफ़र नैयर साहब, विशिस्ट अतिथि  उत्तर प्रदेश सरकार के स्थायी अधिवक्ता इलाहाबाद श्री एम सी त्रिपाठी. इस मौके पर भदोही  के सांसद पंडित गोरखनाथ पांडे, विधानसभा प्रभारी बसपा दिनेश सिंह, पत्रकार व बसपा नेता अजय मिश्रा, भाजपा नेता शैलेन्द्र दुबे, इस मौके पर पत्रकार राम श्रृंगार  द्विवेदी  {ब्यूरो चीफ- डीएनए }, प्रभुनाथ शुक्ल [ब्यूरो चीफ-हिंदुस्तान}, दिनेश पटेल {जी-टीवी}, रोहित गुप्ता { महुआ न्यूज़}, संजय श्रीवास्तव {दूरदर्शन} अरविन्द सिंह {दैनिक जागरण} रमेश मौर्य {हिन्दुस्तान} शमसुद्दीन मुन्ना{ सिटी न्यूज़} सहित तमाम पत्रकार मौजूद रहे. जिन्होंने आज की पत्रकारिता पर अपने विचार रखे.
इस मौके पर पूर्वांचल प्रेस क्लब के अध्यक्ष हरीश सिंह को उत्तरप्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता जफ़र नैयर साहब व प्रदेश सरकार के स्थायी अधिवक्ता एम सी त्रिपाठी ने पत्रकारिता में विशिष्ट योगदान के लिए   स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया . 
प्रेस क्लब भदोही के अध्यक्ष मिथिलेश द्विवेदी ने अथितियों को अंगवस्त्रम व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया.

गुरुवार, 26 मई 2011

समाजसेवा की अनोखी मिसाल है राजेश मिश्रा

भदोही जनपद ही नहीं वरन पूरे देश में समाजसेवा का दंभ भरने वाले लोंगो की तादात असंख्य है, पर ये कथित समाजसेवी कितनी समाजसेवा करते है यह किसी से छुपा हुवा भी नहीं है. पर ऐसे लोंगो के बीच ही कुछ लोग ऐसे भी हैं जो जनहित के मुद्दों पर समाजसेवा से पीछे नहीं हटते, उन्ही में से एक है भदोही जनपद के युवा समाजसेवी राजेश मिश्रा जी, " दैनिक जागरण" के  वाराणसी संस्करण में २५ मई को छपी यह रिपोर्ट पढ़े. 

कलिंजरा घाट पर बनेंगे,दो पक्के प्लेटफार्म

May 25,










ऊंज (भदोही) : बदहाल कलिंजरा गंगा घाट की तस्वीर बदलने जा रही है। घाट पर दो पक्के प्लेटफार्म बनेंगे। साथ ही टीनशेड की भी व्यवस्था करायी जायेगी। प्रकाश के लिए घाट पर उच्च क्षमता के सोलर लाइट भी लगाये जायेंगे। इस पर तीन लाख रुपये खर्च किये जायेंगे।
यह व्यवस्था किसी सरकारी निधि से नहीं हो रही है, बल्कि शवदाह को घाट पर पहुंचने वाले लोगों की फजीहत को देखते हुए युवा बसपा नेता राजेश मिश्र राजन ने अपने निजी खर्च से ऐसा कराने का एलान कर औरों के सामने एक नजीर पेश की है। इस नेक कार्य से 35 गांवों के बड़ी संख्या में लोगों को राहत मिलेगी। श्री मिश्र बुधवार को कोईरौना बाजार में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि जून माह में कार्य शुरू हो जायेगा। कोईरौना के हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार कराने की भी उन्होंने घोषणा की। कहा कि डीघ के कोइरौना बाजार सहित कुछ अन्य स्थानों पर भी सोलर लाइट की व्यवस्था निजी खर्च से करायी जायेगी। खेदौपुर गांव में जमीन की उपलब्धता पर उन्होंने एक पुस्तकालय भवन बनाने जाने की भी बात कही। बताया कि इन कार्यो पर तीन लाख रुपये खर्च किये जायेंगे।

परिवार में नाराज़गी होती ही है... पलायन क्यों..?

शीघ्र होगा संचालक मंडल का गठन 
"भारतीय ब्लॉग लेखक मंच" परिवार के सभी भाई-बहनों को को मेरा प्रणाम. 
दोस्तों मैंने आज जब इस ब्लॉग पर आया तो देखा हमारे दो प्रतिभाशाली युवा भाइयों के बीच  वैचारिक जंग छिड़ी हुयी है, देखा जाय तो मैं इस बात को हमेशा समर्थन देता हूँ की आपस में वैचारिक प्रतिद्वंदिता होना आवश्यक है. एक स्वस्थ परम्परा के साथ वाद-विवाद होने से निश्चित रूप से हमारा ज्ञानवर्धन ही होता है. पर तकलीफ तब होती है जब इसे लोग व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप का माध्यम बना लेते है. दोस्तों हम लोंगो के अन्दर हर प्रकार की प्रवित्तिया समाहित हैं. कहा भी गया है इन्सान अच्छाईयों और बुराइयों का एक पुतला है. {अब पुतला शब्द पर बहस न करें] अहिंसक और हिंसक दोनों प्रवित्तियां हमारे अन्दर ही विराजमान है. लिहाजा हम अगर यह कहे की हम कभी गलती कर ही नहीं सकते तो साफतौर पर हम झूठ बोल रहे है. बड़े से बड़ा विद्वान भी कही न कही गलत हो सकता है. 
हमारे कहने का अभिप्राय यह है की इस मंच की स्थापना आपसी भाईचारा और प्रेम की नीव पर रखी गयी है. यही कारन है की आज तक यह मंच विवादों से परे रहा है. हा सार्थक बहस के हम सदैव पक्षधर रहेंगे. धार्मिक मुद्दों को लेकर भले ही बहस छिड़े पर आरोप-प्रत्यारोप से परे. और हम विवाद से बचे रहे इसके लिए "नियम {अवश्य पढ़े}" भी बनाये गए. दोस्तों यह मात्र एक सामुदायिक ब्लॉग ही नहीं बल्कि यह प्रत्येक भारतीय ब्लॉग लेखको का यह परिवार है. और इस परिवार को विवाद रहित बनाये रखने की जिम्मेदारी सबकी है. 
परिवार को सुचारू रूप से संचालित करने की जिम्मेदारी परिवार के मुखिया  की होती है. पर मैंने खुद को कभी भी मुखिया नहीं माना, पर अब मैं इसकी आवश्यकता समझ रहा हूँ. मैं शीघ्र ही संचालक मंडल का गठन करूँगा और चयन किये गए मित्रो को इस परिवार के बारे में आपसी सहमती बनाकर पूर्ण रूप से निर्णय लेने की स्वतंत्रता होगी. 
उम्मीद है आप लोंगो का सहयोग बना रहेगा, धन्यवाद.

सोमवार, 18 अप्रैल 2011

आठ पापों का घड़ा

एक बार कवि कालीदास बाज़ार घूमने निकले. एक स्त्री घड़ा और कुछ कटोरियाँ लेकर बैठी थी. ग्राहकों के इंतजार में. कविराज को कौतूहल हुआ की यह महिला क्या बेचती है, पास जाकर पूछा...
" बहन तुम क्या बेचती हो..? "
"मैं पाप बेचती हूँ, मैं स्वयं लोंगो से कहती हूँ मेरे पास पाप है, मर्जी है तो ले लो, फिर भी लोग चाह पूर्वक ले जाते हैं." महिला ने कुछ अजीब सी बात कही, कालिदास उलझन में पड़ गए.  पूछा..
"घड़े में कोई पाप होता है"
महिला बोली " हां.. हा. होता है, जरूर होता है, देखो जी मेरे इस घड़े में आठ पाप भरे हुए है. : "बुद्धिनाश" "लड़ाई-झगडे"  "पागलपन"  "बेहोशी", "विवेक का नाश", "सद्गुण का नाश", "सुखों का अंत", और "नरक में ले जाने वाले तमाम दुष्कृत्य"
"अरे बहन इतने सारे पाप बताती है तो आखिर है क्या तेरे घड़े में...?" कालिदास की उत्सुकता बढ़ रही थी. 
वह स्त्री बोली    "शराब............शराब........  शराब .....यह शराब ही उन सब पापो की जननी है, जो शराब पीता है वह इन आठों पापो का शिकार बनता है." कालिदास उस महिला की चतुराई पर खुश हो गए. 
महानुभावो के वचन.
"मैं मद्यपान को चोरी-डकैती, दुराचार व वेश्यावृत्ति से भी ज्यादा भयंकर पाप-चेष्टा मानता हूँ. क्रूर व्यक्तियों से भी शराबी  ज्यादा क्रूर हो सकता है, लेकिन शराबी निस्तेज क्रूर है ".......... महात्मा गाँधी 

"जो पुरुष नशीले पदार्थो का सेवन करता है वह घोर पाप करता है." ............ भगवान बुद्ध 

"अल्लाह ने लानत फरमाई है शराब पर, पीने और पिलानेवाले पर, बेचने और खरीदने वाले पर और किसी भी प्रकार का सहयोग देने वाले पर".................  - हज़रत मुहम्मद पैगम्बर  

और मैंने कहा.......
जाम पर जाम पीने से क्या फायदा,
रात बीती सुबह को उतर जाएगी,
तू हरिरस {प्रभु} की प्यालियाँ पी ले,
तेरी जिन्दगी सुधर जाएगी..

शनिवार, 16 अप्रैल 2011

हरीश सिंह के ब्लॉग पर एक निंदनीय लेख- कृपया विरोध करें

हरीश सिंह के ब्लॉग डंके की चोट पर  पर एक निंदनीय लेख लगा है..शायद अनवर जमाल ने लिखा है..शिवलिंग के बारे में..
आप सब से अनुरोध है की उस लेख को पढ़ें और अपना विरोध या समर्थन(अगर कर सके तों) प्रदर्शित करें..

उन्होंने शीर्षक गलत लगाया है सिर्फ मुस्लिम ब्लागर ही नहीं, सभी हिन्दू ब्लागर भी इसका विरोध करें. क्योंकि कुछ लोंगो की मानसिकता हिन्दू धर्म को और अराध्य को बदनाम करने की है, जब कुरान और इस्लाम के बारे में  कोई लिखता है तो मुस्लिम भाई चिल्लाने लगते हैं. सच बोलने की ताकत है तो अपना विचार अवश्य रखें.
मैं निंदा करता हूँ ऐसे वाहियात लेख की...सच तो ये है की ये निंदा के लायक भी लेख नहीं है..
अनवर भाई धार्मिक भावनाओं से न खेले..अब हालत बदल रहें है...
आशय समझ गए होंगे...हिन्दू अब पंगु नहीं रहा...
मत धैर्य की परीछा लें हमारी . अनवर भाई..


आखिर सहने की सीमा होती है..
सागर के उर में ज्वाला सोती है..
मलयानिल कभी बवंडर बन ही जाता है..
भोले शिव का तृतीय नेत्र खुल ही जाता है...
लेखों,जेहादी नारों से हथियारों से..
हिन्दू का शीश नवा लोगे ये मत सोचो..
हिंसा और सेकुलरिज्म के हथियारों से
शिव पर ऊँगली तुम उठा लोगे ये मत सोचो............

कृपया विश्व बंधुत्व की भावना का सम्मान करें..एक दुसरे का सम्मान करें.. और समाज को तोड़ने वालों को मुहतोड़ जवाब दे,

ॐ नमः शिवाय

मंगलवार, 15 मार्च 2011

LBA और AIBA के प्रमुख प्रचारक पद से इस्तीफा

 

दोस्तों लखनऊ ब्लोगर असोसिएसन की परिकल्पना सलीम भाई ने १ दिसंबर २००९ को की थी. इसकी नीव इतनी मजबूत थी की आज यह संगठन एक विशालकाय वृक्ष बन चुका है. सच तो यह है की यह सारा श्रेय सलीम भाई को ही जाता है. इस संगठन के जो भी पदाधिकारी रहे  या हैं उन्होंने अपना कर्तव्य ठीक ढंग से निभाया की नहीं मैं कहने का अधिकारी नहीं हूँ पर मुझे एहसास होता है की मैं अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन अब सही तरीके से नहीं कर पा रहा हूँ. मैं इस संगठन का प्रमुख प्रचारक हूँ. पर पूरा ध्यान हमने "भारतीय ब्लॉग लेखक मंच" पर लगा दिया है. मैं यहाँ पर कभी कभी ही आ पाता हूँ. मैं सलीम भाई से अनुरोध करता हूँ की इस पद की जिम्मेदारी किसी ऐसे व्यक्ति को दे जो संगठन को मजबूत करने में सहयोग करे. मैं इस परिवार का सदस्य हूँ और हमेशा बना रहूँगा. जब भी आवश्यकता पड़ेगी एक सलाहकार के रूप में मौजूद रहूँगा. यदि आप लोंगो को आपत्ति न हो तो मैं इस पद से त्यागपत्र देना चाहता हूँ. साथ ही यही अनुमति मैं AIBA  के लिए भी चाहूँगा.
पुनश्च: १५ मार्च को मेरा जन्म दिन है जब मैं इस नश्वर जगत में पहली साँस ली आज मैं ४२ वर्ष का हो गया. आप सभी भाइयों से आशीर्वाद चाहूँगा. सभी को प्रणाम ...

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