सीमाओं पर डट जाओ; माँ की आन पे मिट जाओ ; दुश्मन से जा टकराओ ; मार दो या मर जाओ ; ye kahte nikle dam जय भारत माता की !
लक्ष्य से विचलित ना हो मन ; रखना सुरक्षित अपना वतन ; शत्रु की चाल को करके विफल; दिखला देना बाहुबल; बस लबो पे रहे हरदम जय भारत माता की . जय हिंद ! शिखा कौशिक [विख्यात ]
सिन्दूरी सुबह है ...उजली हर रात है अपने वतन की तो जुदा हर एक बात है जितने नज़ारे हैं जन्नत से प्यारे है भारत तो धरती को रब की सौगात है .
बासन्ती मादकता मन को लुभाती है रंगीले फागुन में सृष्टि रंग जाती है गर्मी मिटाने आती सावन फुहारे है सब ऋतुओं में आ जाती उत्सव बहारे हैं गहरे निशा के तम में उज्जवल प्रभात है भारत इस धरती .............................
पर्वत हिमालय जैसा सिर पर एक ताज है पावन गंगा हर लेती हम सबके पाप है बागों में कोयल गाती कितना सुरीला है अपने वतन में सब कुछ कितना रंगीला है सूखी -प्यासी धरती पर ठंडी बरसात है भारत इस धरती को ..... शिखा कौशिक [विख्यात ]