आज रविवार का दिन हैं..कल ब्लोगेर मीट से थोडा देर से आया..सुबह देर से नींद खुली तो मोबाइल में एक सन्देश देख कर स्तब्ध रह गया..
"हरीश जी के भतीजे श्री उपेंदर जी नहीं रहे"..मैंने बात तो नहीं की हरीश भाई से क्यूकी परिस्थितिया नहीं होंगी ऐसी इस समय ..
बस इतना ही कहूँगा इश्वर उपेन्द्र जी आत्मा को शांति दे और दुखी परिवर को इस परिस्थिति से बाहर आने की शक्ति..
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः ।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ।।
इस आत्माको शस्त्र काट नहीं सकते,आग जला नहीं सकती,
जल गला नहीं सकता और वायु सूखा नहीं सकता ...
श्रधांजलि
"हरीश जी के भतीजे श्री उपेंदर जी नहीं रहे"..मैंने बात तो नहीं की हरीश भाई से क्यूकी परिस्थितिया नहीं होंगी ऐसी इस समय ..
बस इतना ही कहूँगा इश्वर उपेन्द्र जी आत्मा को शांति दे और दुखी परिवर को इस परिस्थिति से बाहर आने की शक्ति..
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः ।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ।।
इस आत्माको शस्त्र काट नहीं सकते,आग जला नहीं सकती,
जल गला नहीं सकता और वायु सूखा नहीं सकता ...
श्रधांजलि
5/01/2011 10:57:00 am
आशुतोष की कलम
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