
2/07/2012 01:36:00 pm

Shikha Kaushik
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नारी दुर्गा है ''चिकनी -चमेली '' नहीं !
''हू ला ला'' पर थिरके कदम
''शीला-मुन्नी'' पर निकले है दम
नैतिकता का है ये पतन
दूषित हो गया अंतर्मन
ओ फनकारों करो कुछ शर्म
शालीन नगमों का कर लो सृजन
फिर से सजा दो लबो पर हर दम
वन्देमातरम .....वन्देमातरम !
नारी का मान घटाओ नहीं
प्राणी है वस्तु बनाओ नहीं
तराने रचो तो रचो सोचकर
शक्ति है नारी तमाशा नहीं
नारी की महिमा का फहरे परचम
फिर से सजा दो ..........
नारी है देवी पहेली नहीं
दुर्गा है ''चिकनी -चमेली '' नहीं
इसका सम्मान जो करते नहीं
फनकारी के काबिल नहीं
बेहतर है रख दें वे अपनी कलम
फिर से सजा दो ..............
शिखा कौशिक

1/22/2012 02:08:00 pm

Shikha Kaushik
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सावधान रहें ऐसे गुरु -चेले से !
गुरु का करते हैं वंदन !
तंत्र सिखा दो मन्त्र सिखा दो
सिखा दो जादू टोना
खाली झोली लाया हूँ मैं
भर दो चांदी सोना ;
गुरु का करते ...............
वशीभूत करने का मुझको
अब तो मन्त्र बता दो ;
कैसे ठगते जनता को हैं ?
ये षड्यंत्र सिखा दो ,
गुरु का करते हैं ......
भोली जनता बलि का बकरा
कैसे है बन जाती ?
राज खोल दो आज गुरु जी
बात समझ नहीं आती ,
गुरु का करते .........
चेले ने जब पैर दबाये
तब गुरु जी ये बोले ...
सबसे पहले साथ में रखो
बड़े बड़े से झोले ,
गुरु का करते ....
झोले लेकर जनता के फिर
बीच में तुम को जाना ;
झाड़ -फूंक का ढोंग रचाकर
अपना रंग जमाना ,
गुरु का करते हैं वंदन ...
जगा के लालच कहना मैं
दुगने कर दूंगा गहने ;
गहने हाथ में आ जाये
फिर किस्मत के क्या कहने !
गुरु का करते ...
सबकी आँखें बंद कराकर
रफूचक्कर हो जाना ,
पुलिस जो पकडे कभी तुम्हे
फिर उसको भेंट चढ़ाना ,
गुरु का करते हैं ............
चेले मैंने आज तुम्हे
सारी विद्या दे डाली ;
बस तुम रीत निभाते रहना
गुरु दक्षिणा वाली ,
गुरु का करते ....
शिखा कौशिक