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रविवार, 15 जनवरी 2012

जिंदगी तो अब मुझे सोने नहीं देती-गीत : नागेश पांडेय 'संजय'


गीत : नागेश पांडेय 'संजय'
चित्र : रामेश्वर वर्मा 
उस शपथ से मुक्त कर दो,
वह शपथ साथी! मुझे रोने नहीं देती।
सुसंचित जलराशि को खुद में समेटे,
सिंधु ने कब किसी सरिता को पुकारा ?
कामना ले बूँद की वह रो रहा हो,
दृश्य ऐसा फिर मिले शायद दुबारा।
बूँद तो है बूँद उसका प्रस्फुटन क्या,
और साथी! शमन भी क्या!
सिंधु को ही शुष्क कर दो,
विशदता उसकी उसे खोने नहीं देती।
अनगिनत दैदीप्य तारक और विधु भी
अंक में जिसके बनाए हों बसेरा।
वही नभ जब दीपिका से ज्योति माँगे,
कहे-‘यह होगा बड़ा उपकार तेरा।’
सराहें उस दीपिका का भाग्य, या फिर
भाव नभ का पूज्य मानें ?
इन्हें अब संयुक्त कर दो,
क्यों नियति इनका मिलन होने नहीं देती ?
प्राप्य को खोकर कहो किसके लिए अब
वरूँ मैं अमरत्व, जीवन को सवारूँ  ?
हँसूं तो कैसे हँसूं मैं बिन तुम्हारे,
नहीं वश अपना अकेले जग निहारूँ ।
प्राण का संबंध तो अभिशाप बनकर
छल रहा है, इसलिए अब
शयन से नाता अमर दो,
जिंदगी तो अब मुझे सोने नहीं देती।

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

बिछे पथ पर नयन


 डा. आकुल
(1)
हैं उसी के हित बिछे पथ पर नयन , 
लौट कर जो फिर कभी आता नहीं .
(2)
तुम सलज गुलाब थीं , 
मृदु गंध बनकर उड़ गयीं . 
रह गए हैं शूल प्रतिपल , 
प्राण में चुभते हुए .

 डा. आकुल

शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

भले तुम पूजो मुझे



गीत : डा. नागेश पांडेय ' संजय ' 

भले तुम पूजो मुझे भगवान कहकर
किंतु मैं खुद को पुजारी मानता हूँ।

हृदय-मंदिर में जलाए दीप सुधि का,
मैं तुम्हारे नाम का जप कर रहा हूँ।
किसी दिन मैं स्वयं आहुति बन जलूँगा,
मैं अभी तो मौन हो तप कर रहा हूँ।
भले तुम वर लो मुझे वरदान कहकर
किंतु मैं खुद को भिखारी मानता हूँ।

बना ली मन में  तुम्हारी मूर्ति मैंने,
इसे श्रद्धा कहो या अपराध कह लो।
धृष्टता समझो अगर तो दंड दे दो,
या कि इस अनुराग को चुपचाप सह लो।
भले तुम भूलो मुझे अनजान कहकर,
किंतु  मैं  संबंध  भारी  मानता  हूँ।

मैं  निरा  पाषाण  था,  तुमने  तराशा
और  मेरा  रूप  मनभावन  गढ़ा है।
हूँ प्रखर, संपूर्ण इसका श्रेय तुमको
क्या कहूँ यह अनुग्रह कितना बड़ा है।
भले तुम खुश हो मुझे विद्वान कहकर,
किंतु मैं खुद को अनाड़ी मानता हूँ।

कवि परिचय

कवि परिचय
डा. नागेश पांडेय 'संजय' , 
 शिक्षा : एम्. ए. {हिंदी, संस्कृत }, एम्. काम. एम्. एड. , पी. एच. डी. [विषय : बाल साहित्य के समीक्षा सिद्धांत }, स्लेट [ हिंदी, शिक्षा शास्त्र ] ; 
सम्प्रति :  विभागाद्यक्ष , बी. एड. राजेंद्र प्रसाद पी. जी. कालेज , मीरगंज, बरेली .

प्रकाशित पुस्तकें

आलोचना ग्रन्थ : बाल साहित्य के प्रतिमान ;
कविता संग्रह : तुम्हारे लिए ;
बाल कहानी संग्रह : १. नेहा ने माफ़ी मांगी २. आधुनिक बाल कहानियां ३. अमरुद खट्टे हैं ४. मोती झरे टप- टप ५. अपमान का बदला ६. भाग गए चूहे ७. दीदी का निर्णय ८. मुझे कुछ नहीं चहिये ९. यस सर नो सर ;
बाल कविता संग्रह : १. चल मेरे घोड़े २. अपलम चपलम ;
बाल एकांकी संग्रह : छोटे मास्टर जी
सम्पादित संकलन : १. न्यारे गीत हमारे २. किशोरों की श्रेष्ठ कहानियां ३. बालिकाओं की श्रेष्ठ कहानियां

संपर्क

ई -मेल- dr.nagesh.pandey.sanjay@gmail.com

शनिवार, 12 मार्च 2011

इस मन का अपराध यही है...


गीत /डा. नागेश पांडेय 'संजय' 

इस मन का अपराध यही है,
यह मन अति निश्छल है साथी ।

अपने जैसा समझ जगत को
मैंने हँसकर गले लगाया,
मगर जगत के दोहरेपन ने
साथी! मुझको बहुत रुलाया।

इस मन का अपराध यही है,
यह मन अति विह्वल है साथी ।

लाख सहे दुःख लेकिन जग को 
मैंने सौ-सौ सुख बाँटे हैं।
सब के पथ पर फूल बिछाए
अपने हाथ लगे काँटे हैं।

इस मन का अपराध यही है,
यह मन अति कोमल है साथी। 

जिसने सबको छाया बाँटी
उसके हिस्से धूप चढ़ी है।
सबके कल्मष धोने वाले
की इस जग में किसे पड़ी है ?
 इस मन का अपराध यही है,
यह मन गंगाजल है साथी।

संतापों की भट्ठी में यह
तपकर कुंदन सा निखरा है।
जितनी झंझाएँ झेली हैं,
उतना ही सौरभ बिखरा है।

इस मन का अपराध यही है,
यह मन बहुत सबल है साथी।

कवि परिचय

 मूलत : बाल साहित्यकार , बड़ों के लिए भी गीत एवं कविताओं का सृजन ; जन्म: ०२ जुलाई १९७४ ; खुटार ,शाहजहांपुर , उत्तर प्रदेश . माता: श्रीमती निर्मला पांडेय , पिता : श्री बाबूराम पांडेय ; शिक्षा : एम्. ए. {हिंदी, संस्कृत }, एम्. काम. एम्. एड. , पी. एच. डी. [विषय : बाल साहित्य के समीक्षा सिद्धांत }, स्लेट [ हिंदी, शिक्षा शास्त्र ] ; सम्प्रति : विभागाद्यक्ष ,
  बी. एड. राजेंद्र प्रसाद पी. जी. कालेज , मीरगंज, बरेली . १९८६ से साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय , . प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओं में गीत एवं कविताओं के अतिरिक्त बच्चों के लिए कहानी , कविता , एकांकी , पहेलियाँ और यात्रावृत्त प्रकाशित .बाल रचनाओं के अंग्रेजी, पंजाबी , गुजराती , सिंधी , मराठी , नेपाली , कन्नड़ , उर्दू , उड़िया आदि अनेक भाषाओं में अनुवाद . अनेक रचनाएँ दूरदर्शन तथा आकाशवाणी के नई दिल्ली , लखनऊ , रामपुर केन्द्रों से प्रसारित .

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आलोचना ग्रन्थ : बाल साहित्य के प्रतिमान ;
कविता संग्रह : तुम्हारे लिए ;
बाल कहानी संग्रह : १. नेहा ने माफ़ी मांगी २. आधुनिक बाल कहानियां ३. अमरुद खट्टे हैं ४. मोती झरे टप- टप ५. अपमान का बदला ६. भाग गए चूहे ७. दीदी का निर्णय ८. मुझे कुछ नहीं चहिये ९. यस सर नो सर ;
बाल कविता संग्रह : १. चल मेरे घोड़े २. अपलम चपलम ;
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सम्पादित संकलन : १. न्यारे गीत हमारे २. किशोरों की श्रेष्ठ कहानियां ३. बालिकाओं की श्रेष्ठ कहानियां

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