
7/28/2011 10:20:00 pm

Shikha Kaushik
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इसे महारानी लक्ष्मीबाई का सम्मान कहें या अपमान ?यह हमारी भावनाओं के साथ एक खिलवाड़ जैसा है .अमेरिका की प्रतिष्ठित टाइम पत्रिका ने हाल ही में पति के बचाव में दीवार बनकर खड़ी होने वाली दुनिया की जाबांज पत्नियों की एक सूची जारी की जिसमे झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई को आठवां स्थान दिया गया है .कई समाचार पत्रों ने इसे बहुत बड़ी उपलब्धि माना पर जरा ध्यान दीजिये उनसे ऊपर किस किस को स्थान दे दिया गया है -
*इलेनोर रूजवेल्ट -[पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति की पत्नी ] को ''प्रथम स्थान''
उपलब्धि -नस्लवाद,गरीबी व् लिंगभेद पर खुलकर अपनी बात रखी .
*जुने कार्टर फिश -कार्टर परिवार से सम्बन्ध.अच्छी गायिका ,डांसर ,गीतकार ,अभिनेत्री और लेखक .इन्हें तीसरा स्थान दिया गया .
*साराह पालिन -सबसे कम उम्र की महिला जो अलास्का की गवर्नर बनी .इन्हें पांचवां स्थान दिया गया .
*इलेन दी.गेनेरेस -छठवां स्थान -खुले तौर पर माना कि ये एक समलैंगिक हैं .आस्ट्रेलिया की अभिनेत्री .
*सातवाँ स्थान दिया गया है -मिशेल ओबामा को जो वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति की पत्नी हैं .फैशन आइकोन व् रोल मॉडल ke रूप में उभरी हैं
इन सब से नीचे आठवां स्थान हमारी रानी लक्ष्मीबाई को दिया गया है .टाइम पत्रिका ने यह जानकारी नहीं दी है कि सूची किस आधार पर बनाई गयी है ? ऐसी सूचियाँ बनाना और उसमे अतार्किक रूप से हमारे आदर्श चरित्रों को नीचे स्थान देना पत्रिका ke लेखक मंडल ke दिमागी दिवालियापन को तो जाहिर करता ही है साथ ही हमारे दिल को भी चोट पहुंचाता है .झांसी की रानी ke महान साहस की तुलना किसी से भी करना असंभव है फिर इस सूची में जो नाम उनसे ऊपर दिए गए हैं वे तो तुलनात्मक रूप से कहीं ठहरते ही नहीं .भारत सरकार को इस सम्बन्ध में उचित कदम उठाने चाहिए ताकि आगे से किसी भी देश की कोई भी पत्रिका हमारे आदर्श चरित्रों को अपनी सूची में शामिल करते समय उचित स्थान दें .
शिखा कौशिक

7/09/2011 03:45:00 pm

शिखा कौशिक
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''एक हल्की बात कर देती है किरदार तार-तार !''
ब्लॉग जगत अपने मूल स्वरुप में बुद्धिजीवियों का समूह है .ब्लॉग जगत में ऐसी हल्की बात की उम्मीद कोई भी सभ्य-सुशिक्षित ब्लोगर नहीं कर सकता है .ब्लोगर स्त्री है या पुरुष -क्या आप यह देखकर किसी के ब्लॉग पर जाते हैं ?आप ब्लॉग पर पोस्ट की गयी रचना-आलेख पर ध्यान देते हैं या प्रोफाइल में चिपकी ब्लोगर की फोटो पर ? मेरा मानना है कि कोई भी सभ्य ब्लोगर सिर्फ पहचान के लिए प्रोफाइल फोटो पर एक नज़र डाल लेता है .ऐसे में यदि कोई आपको बार-बार यह सलाह दे कि आप ब्लॉग पर अपने प्रोफाइल में ''अच्छी फोटो ''लगायें इससे पाठकों की संख्या बढती है तो इसे आप क्या सलाह देने वाले के दिमाग का दिवालियापन नहीं कहेंगे !
जो पाठक आपकी रचनाओं के स्थान पर आपकी फोटो पर ज्यादा ध्यान देते हैं -वे पाठक हैं ही कहाँ ?वे तो दर्शक हैं .उनके लिए तो बहुत सामग्री नेट पर अन्यत्र भी उपलब्ध है .ऐसे ब्लोगर न तो साहित्य प्रेमी कहे जा सकते हैं और न ही विशुद्ध आलोचक .वे केवल तफरी करने के लिए ब्लॉग बना कर बैठ गएँ हैं .ब्लॉग जगत में सुन्दर चेहरों को फोटो में तलाशने का उद्देश्य रखने वाले ऐसे ब्लोगर्स को यह जान लेना चाहिए कि यदि ब्लॉग को प्रसिद्द करने का यही तरीका होता तो न तो अच्छा लिखने वालों को कोई पूछता और न ही उम्रदराज ब्लोगर्स को जबकि ब्लॉग जगत में दोनों की ही महत्ता सिर चढ़ कर बोल रही है .
यदि सुन्दर फोटो लगाकर कोई ब्लॉग जगत में अपनी पाठक संख्या बढाने का ख्वाब देखता है तो यह केवल दिवास्वप्न ही है क्योंकि यदि ऐसा होता तो यहाँ भी फ़िल्मी हीरो-हिरोइन -मॉडल का बोलबाला हो चुका होता.इसके पीछे कारण यही है कि आम आदमी न तो उनकी तरह अपनी शारीरिक सुन्दरता को लेकर सचेत होता है और न ही उसके पास इन की तरह शरीर को सुन्दर-सुडोल बनाने का समय व् पैसा होता है .फिल्म-मॉडलिंग से जुड़े लोग अपने शरीर को दुकान के माल की तरह सजा-सवाँर कर रखते हैं क्योंकि यह उनके पेशे का हिस्सा है पर यहाँ ब्लॉग जगत में हम सभी का उद्देश्य मात्र अपने विचारों और भावों को अपने सामान आम लोगों तक संप्रेषित करना है व् अन्य ब्लोगर्स के विचारों से अवगत होना है .वास्तव में जो किसी को ऐसी घटिया सलाह देता है वह सबसे पहले किसी की निजता को चोट पहुंचाता है फिर सभ्यता की सीमाओं को लांघता है और इस सबके बाद वह स्वयं विचारकर देखे कि वह कितनी हल्की बात कर रहा है ! इससे उसका किरदार भी तो तार-तार हो जाता है .क्या ऐसा नहीं है ?