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शुक्रवार, 11 जनवरी 2013

दोष मेरा है...कविता ...... डा श्याम गुप्त

                                

आज जब मैं हर जगह ,
छल द्वंद्व द्वेष पाखण्ड झूठ ,
 अत्याचार व अन्याय -अनाचार
को देखता हूँ ;
उनके कारण और निवारण पर ,
विचार करता हूँ ,
तो मुझे लगता है कि -
दोषी मैं ही हूँ ,
सिर्फ़ मैं ही हूँ ।

क्यों मैं आज़ादी के पचास वर्ष बाद भी
अंग्रेज़ी में बोलता हूँ ,
राशन की दुकान पर बैठ कर ,
झूठ बोलता हूँ , कम तोलता हूँ |

क्यों मैंबैंक के लाइन में लगना
अपनी हेठी समझता हूँ ,
यन केन  प्रकारेण  ,
पीछे से काम कराने को तरसताहूँ |

क्यों मैं 'ग्रेपवाइन' व 'ब्लोइंग मिस्ट'
 के ही पेंटिंग्स बनाता हूँ ,
'प्रसाद' और 'कालिदास' को भूलकर
शेक्सपीयर के ही नाटक दिखाता हूँ

क्यों मैं सरकारी गाडी में ,
भतीजे की शादी में जाता हूँ,
प्राइवेट यात्रा का भी ,
टीऐ पास कराता हूँ |

क्यों मैं किसी को जन सम्पत्ति -
नष्ट करते देखकर नहीं टोकता हूँ ,
स्वयं भला रहने हेतु
जन-धन की हानि नहीं रोकता हूँ |

क्यों मैं रास्ते रोक कर
शामियाने लगवाता हूँ ,
झूठी शान के लिए
अच्छे खासे सड़क को बर्वाद कराता हूँ |

क्यों मैं किसी सत्यनिष्ठ व्यक्ति को देखकर,
नाक-मुंह सिकोड़ लेता हूँ ,
सामने ही अपराध, भ्रष्टाचार ,लूट-खसोट , बलात्कार
होते देख कर भी मुंह मोड़ लेता हूँ

क्यों मैं कलेवा की जगह ब्रेकफास्ट व
खाने की जगह लंच उडाता हूँ ,
राम नवमी की वजाय , धूम धाम से
वेलेंटाइन डे मनाता हूँ |

क्यों मैं रिश्वत के पहिये को
और आगे बढाता हूँ,
एक जगह लेता हूँ
छत्तीस जगह देता हूँ |

क्यों मैं भ्रष्ट लोगों को वोट देकर
भ्रष्ट सरकार बनाता हूँ ,
अपने कष्टों की गठरी
अपने हाथों उठाता हूँ |

क्यों मैंने अपना संविधान
अन्ग्रेजी में बनाया ,
जो अधिकांश जन समूह की
समझ में ही न  आया |

आप लड़िये या झगडिये ,
दोष चाहे एक दूसरे पर मढिये ,
दोष इसका है न उसका है न तेरा है ,
मुझे शूली पर चढादो ,
दोष मेरा है।

शुक्रवार, 25 मार्च 2011

शिव पार्वती और सांसदो की खरीद फ़रोख्त का सच

 
    लंच टाईम मे दो गिलास छाछ  पीकर चैन की नींद सो रहे प्रभु शंकर को गरजने बरसने की आवाज आयी बाहर आकर प्रभु ने देखा सारे शिव गण पैकिंग मे लगे हैं और माता उनको सामान ठीक से रखने के लिये चिल्ला रही है । अचरज मे पड़े प्रभु ने माता से पूछा क्या बात है प्रिये आप सामान क्यों पैक करवा रहीं है । खबरदार जो मुझे आज के बाद प्रिये कहा माता भड़कीं अब मुझे टीवी पर मालूम पड़ेगा कि आप के मां बाप कौन हैं आप कहां पैदा हुये थे  और ये मुआ नंदी आपसे पहली बार कहां मिला था । मेरे पिता हिमालय ठीक ही कहते थे अब मैं कभी लौट के न आउंगी ।

पहले तो प्रभु हड़बड़ाये फ़िर माजरा समझ मे आने पर बोले बेड़ा गर्क हो ये इंडिया टीवी वालो का । फ़िर गुस्से मे आकर माता से बोले क्या ये अनाप-शनाप चैनल देखती  रहती हो, इनका काम तो यही है कि भोले भाले लोगो को बेवकूफ़ बना कर टी आर पी बढ़ाना और कम से कम अपनी योग माया से चेक तो किया होता बस लगी सामान पैक करने । क्या आप जानती नही हो कि मेरा जन्म अनन्त परमेश्वर की माया से हुआ है ।अपनी गलती पर खिसियाकर माता बोली अरे वो तो मै कल संसद मे हुआ क्या ये देखने के लिये गयी थी तो शिव गण इंडिया टीवी देख रहे थे कि मै भी बैठ गयी ।

आप बताईये मै कौन से चैनल मे देखूं लोक सभा चैनल मे तो दोनो ओर के एक से एक वक्ता बोलते हैं कि समझ मे ही नही आता कौन सच्चा कौन झूठा जिसकी बात सुनो वही सही लगता है और लड़ते झगड़ते इतना है कि आधी बात तो समझ मे ही नही आती । प्रभु अब सोच मे पड़ गये बोले ऐसा तो कोई चैनल ही नही है जो सही बात बताये जिसको जहां से पैसा मिलता है उसी की भाषा बोलता है प्रिये इसी को तो येलो जर्नलिस्म बोलते हैं वैसे आज कल सभी चैनल सरकार से ही पैसा लेते हैं और उसी का पक्ष लेते हैं ।

माता बोली क्या एनडीटीवी भी ऐसा ही है । प्रभु मुस्कुराये कल शाम की न्यूज नही देखी क्या स्टिंग आपरेशन की खबर इस तरह घुमा फ़िरा कर बता रहे थे कि मानो बीजेपी ही चोर है और कांग्रेस उसके जाल मे फ़स गयी थी । माता ने कहा अरे फ़िर जनता कहां जाये ऐसा क्यो हैं प्रभु । ऐसा इसीलिये है प्रिये कि आज भारत की मीडिया हिन्दी भाषी लोगो को मूर्ख समझती है इसलिये हिंदी टीवी और अखबार सिवाय हत्या बलात्कार आदि के कुछ भी नही पेश करते देखा नही आज पत्रिका अखबार ने केवल एक छोटे से कालम मे कल की संसद की घटना छापी है । मीडिया का मानना है कि केवल अंग्रेजी जानने वाले लोगो को ही सच्ची खबर देनी चाहिये । ऐसे लोग वोट भी नही देते इसलिये मीडिया से सरकार भी नाराज नही होती ।

अच्छा आप ही बताईये प्राणनाथ क्या सच है । सच ये है प्रिये कि सांसद बिके थे लेकिन कांग्रेस ने नही खरीदे थे ये काम समाजवादी पार्टी के अमरसिंग ने किया था । अब समाजवादी पार्टी को क्या फ़ायदा था कि वो पहले अमर सिंग की बेईज्जती को भूल कर न्यूक्लियर डील का समर्थन करने पहुच गयी यही नही सांसद खरीदने मे भी लग गयी ये गहन शोध का विषय है । अब ये बीजेपी वाले लोग सही बात कहते नहीं हैं और समझते भी नही है मनमोहन सच तो कह रहे हैं कांग्रेस खरीदने मे शामिल नही है वह तो पहले ही न्यूक्लियर डील मे अमेरिका के हाथ  बिक चुकी थी । अब बिका हुआ कोई किसी को क्या खरीदेगा भला । जो कुछ किया भी है वह अमेरिका के इशारे पर किया है । विकीलीक क्या बता रहा है दूतावास का आदमी चेक करने गया था काम सही तरीके से हो रहा है कि नही । पर आडवानी अमेरिका के खिलाफ़ एक शब्द नही बोले डील परमाणू के खिलाफ़ नही बोले अब ये लोग भी तो ........

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