सोमवार, 27 जनवरी 2020

सरहदों के मौसम एक से 
बस अलग था तो 
मार दिया जाना पंछियों का
जो उड़कर उस पार हो लिए

रंगनी थी दिवार
कि जब तक खून लाल ना हो
जमीन भींग ना जाए
और हम सोते रहें

देर रात जश्न मनाते 
शराब पी बे- सूद
अपनी औरतों को मारते
हम अलग नहीं

चौराहे 
अलग रंग के
अलग शहरों के 
घटना एक सी
रेप कर दिया
चाकू मार दिया
हम एक हैं अलग नहीं

ये खून हरा है
खून बहेगा तबतक
जबतक वो लाल नहीं होता
मरेगी औरतें, मारेगा आदमी
होंगे रेप
चलेंगे चाकू

आदमी सोच रहा
हम हरे खून वाले 
जब बहेंगे 
तब बहेगा जहर 
तो खून लाल कर दो देवता
या पानी बना बहा दो सब
आ जाने दो प्रलय
अब जलमग्न हो जाने पर ही धूल पाएगी दुनिया

हम हो पायेंगे इंसान
तब ये खून लाल होगा

Deepti Sharma

मंगलवार, 3 दिसंबर 2019

#क्या वाकई निर्भया

जो दिखाई देता है, हम सभी जानते हैं कि वह हमेशा सत्य नहीं होता है किन्तु फिर भी हम कुछ ऐसी मिट्टी के बने हुए हैं  कि तथ्यों की जांच परख किए बगैर दिखाए जा रहे परिदृश्य पर ही यकीन करते हैं और इसका फायदा भले ही कोई भी उठाता हो लेकिन हम अपनी भावुकतावश नुकसान में ही रहते हैं. 
अभी दो दिन पहले ही तेलंगाना में एक पशु चिकित्सक डॉ प्रियंका रेड्डी की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गयी और हत्या भी ऐसे कि लाश को इस बुरी तरह जला दिया गया कि उसकी पहचान का आधार बना एक अधजला स्कार्फ और गले में पड़ा हुआ गोल्ड पैंडैंट और मच गया चारों ओर कोहराम महिला के साथ निर्दयता का, सोशल मीडिया पर भरमार छा गई #kabtaknirbhaya की, सही भी है नारी क्या यही सब कुछ सहने को बनी हुई है, क्या वास्तव में उसका इस दुनिया में कुछ भी करना इतना मुश्किल है कि वह अगर घर से बाहर कहीं किसी मुश्किल में पड़ गई तो अपनी इज्ज़त, जिंदगी सब गंवाकर ही रहेगी, आज की परिस्थितियों में तो यही कहा जा सकता है किन्तु अगर बाद में सच कुछ और निकलता है तब हम सोशल मीडिया पर क्या लिखेंगे? सोचिए.
          स्टार भारत पर प्रसारित किए जा रहे सावधान इंडिया में दिखाए गए एक सच ने मुझे यह सोचने पर मजबूर कर दिया और उनकी दिखाई गई एक सत्य घटना के बारे में सर्च की और थोड़ी मशक्कत के बाद मुझे वह घटना इस तरह प्राप्त भी हो गई, जिसे आप सब भी पढ़ सकते हैं -
कक्षा आठ की छात्रा आरती हाथरस के मुरसान थाना क्षेत्र के गांव करील में पिछले छह साल से अपने मामा भूरा के घर रह रही थी। गांव वालों ने बताया कि भूरा के घर से धुंआ उठने पर जब वे घर के अंदर गए तो उन्हें आरती जली मिली। थोड़ी देर तक तो वे समझे कि ये बहू ममता है, लेकिन बाद में उसकी पहचान आरती के रूप में हुई। दरअसल ग्रामीणों को आरती की पहचान में इसलिए गफलत हुई क्योंकि उसके हाथ में चूड़ियां और पांव में बिछुआ थे। ममता ने आरती को क्यों मारा, इस बारे में किसी को कुछ पता नहीं है। वारदात के समय मामी और भांजी ही घर पर थे।
ऐसे ही थोड़ा अवलोकन अब इस मामले का करते हैं, ध्यान दीजिये - 
डॉक्टर को हैदराबाद-बेंगलुरु हाईवे पर स्थित जिस टोल प्लाजा पर आखिरी बार देखा था, वहां से करीब 30 किमी दूर एक किसान ने गुरुवार सुबह उसका जला हुआ शव देखा। उसने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर के परिवार के लोगों को घटनास्थल पर बुलाया। अधजले स्कार्फ और गले पड़े गोल्ड पेंडेंट से डॉक्टर के शव की पहचान हुई। पुलिस को आसपास से शराब की बोतलें भी मिलीं। 
        जैसे कि उपरोक्त पहले मामले में............ आगे पढ़ें नीचे दिए लिंक 👇
शालिनी कौशिक एडवोकेट 

मंगलवार, 26 नवंबर 2019

हम बेख़बर थे.....!!

हम बेख़बर थे ,अपने कल के लिए
क़दम ठिठके ,एक पल के लिए।

बहुत दूर जाते, दिखे वो सभी
रुक गए थे राह में, जिनके लिए।

मन्ज़िल की राह, कुछ दुशवार थी
हाथों से कांटे चुने थे इनके लिए।

जख़्म रिसते रहे,पर दर्द काफूर था
नहीं वक़्त था ,उफ़ करने के लिए।

आसमां में दिखी,एक चिड़िया उड़ती हुई
चोंच में दबाए कुछ तिनके लिए।

कमलेश' आबाद है दुनिया इस उम्मीद पर
 कुछ छोड़ जाएं अच्छा
कल के लिए।।💐

शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

हम बेख़बर थे ...!!💐

हम बेख़बर थेअपने कल के     लिए
क़दम  ठिठके एक पल के लिए।

वो बहुत दूर जाते, दिखे वो     सभी
रुक गए थे राह में, जिनके लिए।

मन्ज़िल की राह, कुछ दुशवार    थी
हाथों से कांटे चुने थे इनके लिए।

जख़्म रिसते रहे,पर दर्द काफूर   था
नहीं वक़्त था ,उफ़ करने के लिए।

आसमां में दिखी,एक चिड़िया उड़ती हुई
चोंच में दबाए कुछ तिनके लिए।

कमलेश' आबाद है दुनिया इस उम्मीद पर,
कुछ ना कुछ छोड़ जाएं अच्छा
कल के लिए।।💐

शुक्रवार, 19 जनवरी 2018

बुधवार, 17 जनवरी 2018

शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

बुधवार, 22 नवंबर 2017

सोमवार, 13 नवंबर 2017

शुक्रवार, 10 नवंबर 2017

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