"कौन हो ,क्या चाहिए ?"उसने दरवाज़े को थोडा सा खोलकर झिरी से झांकते हुए पूछा था .
"मुसाफिर हूँ ,रात भर ठहरना चाहता हूँ ."
"कौन हिंदू हो क्या ?"
"नहीं "
"सिक्ख तो दीखते नहीं. फिर तो जरूर ईसाई होंगे ,है ना ."
"मै ईसाई भी नहीं हूँ "
"तो मुसलमान ?"
"जी नहीं "
"क्या मतलब ? तो कौन हो तुम?" वह झल्लाया था.
" इंसान "
"क्या कहा इंसान ?"
तभी किचन से आवाज़ आई थी " कौन है जी ,दरवाज़े पर ?"
उसने भडाक से दरवाज़ा बंद करते हुए कहा था " कोई सिरफिरा पागल है , साला "
3/27/2011 03:20:00 pm
प्रदीप नील वसिष्ठ
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