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शनिवार, 2 अप्रैल 2011
गुरुवार, 17 मार्च 2011
प्रेम की भाषा जाने कौन
प्रेम की भाषा कौन जाने
जो प्रेम करे वही पहचाने।
मौन शब्द में ईश वास करे
अपना सब कुछ त्याग करे।।
इन्सान में हो या जानवर
अटूट बन्धन ही प्रेम है।
जो प्रेम किसी से न कर पाये
जन्म लेना बेकार है।।
यह डोर है, दिल की हिलोर है
यह भावना जिस ओर है।
दुख भी वहां सुख प्योर है
न अपना-पराया, न जीत-हार है।।
-मंगल यादव, नोएडा
Posted in: प्रेम-महाभारत
4/02/2011 01:19:00 pm
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