
7/12/2011 10:51:00 pm

भारतीय ब्लॉग लेखक मंच
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. सभी लेखक भाई-बहनों को भारती ब्लॉग लेखक मंच की तरफ से प्रणाम. बंधुओ आज मैं पूरे पांच माह एक दिन का हो गया. मुझे स्थापित करने में क्या योगदान रहा आप सब भलीभांति परिचित है. जब मुझे इस सफ़र पर चलने के लिए कड़े नियम बना दिए गए तो आप लोग नियमो का पालन क्यों नहीं करते, मेरे बाल्यकाल में ही क्यों आप मुझे बेमतलब के लफड़े में डालते हैं. अब ऐसा नहीं होना चाहिए. नियमानुसार छह माह की अवधि पूर्ण करने पर नियमो का प्रयोग करना आवश्यक है. जो लेखक इन दिनों न तो कोई पोस्ट किये और न ही कोई टिपण्णी किये उन्हें मंच से कोई लगाव नहीं लिहाजा वे बाहर होंगे. नए व प्रतिभाशाली लेखको को मौका दिया जायेगा. आप लोग जानते है मुझे काफी दौड़ लगानी पड़ी. समकक्ष ही नहीं पुराने मंचो व संगठनो को पाठक संख्या व समर्थको से भी पीछे छोड़ दिया. अब मुझे भी नए रंग रूप में आना है. इसके लिए सलाहकारों की आवश्यकता होगी. जिसे हरीश जी, मिथिलेश जी और योगेन्द्र जी चुने. शीघ्र ही. भारतीय ब्लॉग लेखक मंच के लेखको को एक तोहफा देने जा रहे हैं योगेन्द्र जी और हरीश जी, जो अपने अभी सोचा नहीं होगा. मैंने पहले ही कहा था. छः माह में एक तोहफा BBLM के लेखको और पाठको को मिलेगा. नियम के तहत यहाँ पूरी पोस्ट लगानी है, उसके पश्चात् लिंक भी दिया जा सकता है. पर कुछ लेखक इसका पालन नहीं कर रहे है. लिहाजा एक लेखक की कुछ पोस्ट हटाई जा रही है. सभी को प्रणाम.

7/12/2011 09:24:00 pm

योगाचार्य विजय
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गेहूँ का ज्वारा अर्थात गेहूँ के छोटे-छोटे पौधों की हरी-हरी पत्ती, जिसमे है शुद्ध रक्त बनाने की अद्भुत शक्ति. तभी तो इन ज्वारो के रस को "ग्रीन ब्लड" कहा गया है. इसे ग्रीन ब्लड कहने का एक कारणयह भी है कि रासायनिक संरचना पर ध्यानाकर्षण किया जाए तो गेहूँ के ज्वारे के रस और मानव मानव रुधिर दोनों का ही पी.एच. फैक्टर 7.4 ही है जिसके कारण इसके रस का सेवन करने से इसका रक्त में अभिशोषण शीघ्र हो जाता है, जिससे रक्ताल्पता(एनीमिया) और पीलिया(जांडिस)रोगी के लिए यह ईश्वर प्रदत्त अमृत हो जाता है. गेहूँ के ज्वारे के रस का नियमित सेवन और नाड़ी शोधन प्रणायाम से मानव शारीर के समस्त नाड़ियों का शोधन होकर मनुष्य समस्त प्रकार के रक्तविकारों से मुक्त हो जाता है. गेहूँ के ज्वारे में पर्याप्त मात्रा में क्लोरोफिल पाया जाता है जो तेजी से रक्त बनता है इसीलिए तो इसे प्राकृतिक परमाणु की संज्ञा भी दी गयी है. गेहूँ के पत्तियों के रस में विटामिन बी.सी. और ई प्रचुर मात्रा में पाया जाता है.

गेहूँ घास के सेवन से कोष्ठबद्धता, एसिडिटी , गठिया, भगंदर, मधुमेह, बवासीर, खासी, दमा, नेत्ररोग,म्यूकस, उच्चरक्तचाप, वायु विकार इत्यादि में भी अप्रत्याशित लाभ होता है. इसके रस के सेवन से अपार शारीरिक शक्ति कि वृद्धि होती है तथा मूत्राशय कि पथरी के लिए तो यह रामबाण है. गेहूँ के ज्वारे से रस निकालते समय यह ध्यान रहे कि पत्तियों में से जड़ वाला सफेद हिस्सा काट कर फेंक दे. केवल हरे हिस्से का ही रस सेवन कर लेना ही विशेष लाभकारी होता है. रस निकालने के पहले ज्वारे को धो भी लेना चाहिए. यह ध्यान रहे कि जिस ज्वारे से रस निकाला जाय उसकी ऊंचाई अधिकतम पांच से छः इंच ही हो