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गुरुवार, 5 मई 2011

धर्मनिरपेक्षता-- उदगम और भारतीय परिवेश में प्रासंगिकता

यह लेख आशुतोष नाथ तिवारी जी ने " हल्ला बोल" पर लिखे हैं, हमें लगा की यह एक गैर विवादित जानकारी भरा लेख है, लिहाजा बिना आशुतोष जी की अनुमति से यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ, यदि BBLM के संचालको को आपत्ति हो तो हटा सकते हैं। ...............

धर्मनिरपेक्षता, और सेकुलर श्वान : आयातित विचारधारा का भारतीय परिवेश में एक विश्लेषण:

धर्मनिरपेक्षता, और सेकुलर शब्द अक्सर सुनने में आता है हमारी रोजमर्रा की जीवनचर्या में..आइये प्रयास करते हैं इसका उदगम और भारतीय परिवेश में प्रासंगिकता.
इतिहास और उदगम: धर्मनिरपेक्षता शब्द का जनक जॉर्ज जेकब हॉलीयाक को माना जाता है,जो की मूलतः एक व्याख्याता और संपादक था..


ये राबर्ट ओवेन की विचारधारा से प्रभावित था जो समाजवाद के संस्थापक सदस्यों में से एक थे..राबर्ट ओवेन के विचार से
" सभी धर्म एक ही हास्यस्पद परिकल्पना पर आधारित हैं.जो मनुष्य को एक कमजोर मूर्ख पशु,उग्रता से पूर्ण धर्मांध व्यक्ति,एक कट्टरवादी या घाघ पाखंडी बनाती है"

अब सेकुलर शब्द को गढ़ने वाले व्यक्ति के गुरु की विचारधारा ये थी तो शिष्य के सिधांत की स्वतः ही परिकल्पना की जा सकती है..आइये एक तथ्य और जान ले सेकुलर शब्द गढ़ने वाले हॉलीयाक के गुरु के बारे में अपने इस धर्म विरोध सिधांत के कुछ वर्षों बाद ओवेन ने आध्यात्म की राह पकड़ ली..


मुझे नहीं लगता की आध्यात्म किसी धर्म का विरोध सिखाता है क्यूकी यदि आध्यात्म बुढ़ापे का दर्शन है तो धर्म जवानी का ज्ञान..

जेकब हॉलीयाक ने १८४२ में ईशनिंदा के लिए ६ महीने हवालात में गुजारे..हवालात से बाहर आ के, इसने द मूवमेंट और द रिजनर नामक पत्र निकालना शुरू किया और इन पत्रों के मूल में था इसी धर्म विरोध... हेलियक ने इस पत्र के माध्यम से एक नई व्योस्था का आह्वान किया जो विज्ञान और तर्कों पर आधारित हो..इस व्यवस्था का नामकरण उसने "सेकुलरिज्म"किया जिसका भारतीय समानार्थी रूप हम "धर्मनिरपेक्षता" प्रयोग करते हैं..शाब्दिक रूप में इसकी कुछ परिभाषाएं हैं..

१ वो जीवन पद्धति जिनका आधार आध्यात्मिक अथवा धार्मिक न हो..
२ धार्मिक व्योस्था से मुक्त जीवन शैली..
३ वो राजनैतिक व्यवस्था जिसमें सभी धर्मो के लोग सामान अधिकार के पात्र हो.प्रसाशन एवं न्याय व्यवस्था निर्माण में धार्मिक रीती रिवाजों का हस्तक्षेप न हो..
४ ऐसी व्योस्था जो किसी धर्म विशेष पर आधारित न हो और शासनिक नीतियों का नियमन किसी धर्म विशेष को ध्यान में रख कर न किया जाए..

परिभाषा से और इतिहास से स्पष्ट है की इस शब्द का जन्म ही धर्म विरोध के स्थानीय और समसामयिक कारणों के फलस्वरूप हुआ..इसे हम एक जीवन पद्धति और समाज पद्धति के रूप में कैसे स्वीकार लें???

भारतीय परिवेश में एक विश्लेषण:इस शब्द की उत्पत्ति ईसाई धर्म के खिलाफ हुई थी ..ये मेरे समझ के बाहर है की ये हिन्दू बहुल हुन्दुस्थान में कैसे और क्यों लागू किया गया..और शायद इस परिकल्पना को मूर्त रूप देते समय क्या हमारे संविधान निर्माताओं ने ये नहीं सोचा की, भारत ऐसा देश है जहा हर १० किलोमीटर पर पानी का स्वाद और ५० किलोमीटर में पूजा पद्धति बदल जाती है.जिन्होंने सदियों से धार्मिक व्योस्थाओं पर आधारित समाज और कानून का पालन किया है वो अचानक सेकुलर कैसे हो जाएँगे..और अपने ही संविधान के दूसरे भागों में मुह की खायी हमारे नीति निर्माताओं ने..
सेकुलरिज्म का मतलब है की "ऐसी व्योस्था जो किसी धर्म विशेष पर आधारित न हो और शासनिक नीतियों का नियमन किसी धर्म विशेष को ध्यान में रख कर न किया जाए."जी नहीं हमारा संविधान एक तरफ भारत को सेकुलर कहता है और दूसरी ओर हिन्दू विवाह अधिनियम लागू करता है..एक तरफ सेकुलर कानून है जिसमें मुश्लिम की शादी मुस्लिम धार्मिक कानूनों और तलाक ३ बार तलाक तलाक तलाक बोलने से होता है.. जिस सेकुलरिज्म का मूल धर्म विरोध था, वह अब धर्म के घालमेल से क्या साबित करना चाहता है..विरोधाभास बार बार यही दर्शाता हैं की सेकुलर जैसी कोई विचारधारा हमारे समाज में अवस्थित नहीं हो सकती, हाँ विशेषकर राजनितिक लोगों के धर्म की सेकुलर खेती में खाद पानी का काम करती है..
भारतीय परिवेश के लिए अक्सर कई अलग अलग विद्वान अलग अलग राय देते हैं इस मुद्दे पर कोई कहता है की इसका मतलब धर्मविरोध नहीं है, इसका अर्थ है "सभी धर्मों की समानता"..तो ये तो हमारे मूल अधिकारों में भी है, समानता का अधिकार क्या जरुरत है सेकुलर तड़का लगाने की,और हम उस सेकुलरिज्म को सर्व धर्म सम्भाव के लिए सीढ़ी मानतें है जिसकी उत्पत्ति ही धर्म विरोध के धरातल पर हुई थी..
तो क्या हमारी सदियों पुरानी हिंदुत्व की अवधारणा इस आयतित विचारधारा के सामने नहीं ठहरती,जिसके मूल में सर्व धर्म सम्भाव और सहिष्णुता है???हिंदुत्व ने आज तक सभी धर्मों को स्वीकार किया और स्थान दिया सम्मान दिया..
सेकुलरिज्म नामक बिदेशी बालक ने अभी जन्म लिया किलकारियां भरने की उम्र गयी नहीं की गुलाम मानसिकता और सत्ता और कानून के मठाधिशों ने इसका राज्याभिषेक कर इसे युगों युगों पुरानी संस्कृति और विचारधारा के सामने खड़ा कर दिया...
वस्तुतः अभी सेकुलरिज्म की परिभाषा ही विवादित है हर व्यक्ति हर संस्थान अपने तरह से विश्लेषण करता है..जैसे किसी चारित्रिक पतन के गर्त में जा चुकी स्त्री के बच्चे के पिता के नाम के विश्लेषण में हम सबकी अपनी अपनी राय होगी..हमारे भारतीय राजनैतिक परिवेश में इस विवादित बच्चे को गोद ले कर सबने अपनी अपनी रोटियां सकने का प्रबंध कर लिया..
भारत के परिवेश में गर्त की पराकाष्ठा ये है की सेकुलर होने के लिए आप को धर्म विरोधी नहीं होना है अगर आप हिन्दू विरोधी हैं तो आप सेकुलर है अगर आप मुश्लिम धर्म के समर्थक हैं तो आप सेकुलर हैं..राजनैतिक विचारधारों की बात करे तो एक धड़ा है जो हिन्दू समर्थन के नाम का झंडा लिया है और वो साम्प्रदायिक है...चलिए मान लिया की वो धड़ा साम्प्रदायिक है ..तो वो लोग जो मुश्लिम धर्म का समर्थन कर रहें है वो कैसे साम्प्रदायिक नहीं है...
क्या हज में सब्सिडी देना साम्प्रदायिकता के दायरे में आता है??क्यूंकि ये तो सेकुलरिज्म के मूल सिधांत का उलंघन हुआ जो कहता है की "प्रसाशन एवं न्याय व्यवस्था निर्माण में धार्मिक रीती रिवाजों का हस्तक्षेप न हो.."
लेकिन छुद्र राजनैतिक स्वार्थ के वशीभूत हो कर इसे सेकुलरिज्म कहते हैं हमारे व्योस्था चलाने वाले और हिन्दू समारोह में शिरकत करना भी साम्प्रदायिकता का द्योतक लगता है इन सेकुलर श्वानो को..
सेकुलर श्वान शब्द मेरे मन में एक प्राणी को देख कर आया जिसका मुख एकलव्य ने अपने वाणों से इस प्रकार बंद कर दिया था की वो अपनी प्राकृतिक आवाज निकलने में असमर्थ हो गया.. अब एकलव्य तो आज के युग में पैदा नहीं होते और इन श्वानो का मुख हर समय तुष्टिकरण और हिंदुविरोध की नैसर्गिक आवाज भो भो भो भो निकालता रहता है सत्ता,पैसे और प्रचार की हड्डियों के लिए..सेकुलर श्वान सबसे ज्यादा हिन्दू धर्म में पैदा हो गएँ हैं और इस का कारण हमारी गुलाम मानसिकता अपने आप को हीन समझने का जो प्रबंधन मैकाले ने किया था उस हीन भावना के बबूल रूपी वृक्ष को आज तक खाद पानी दे रहें हैं ये सेकुलर श्वान.
हम अपनी गुलाम मानसिकता की अभिव्यक्ति के लिए सेकुलर बनने में किस कदर खोये हैं..
एक उदहारण अमेरिका का देना चाहूँगा "in the god we trust " का जी हाँ ये शब्द मिलेगा आप को अमेरिका के डालर पर लिखा हुआ जिस देश की जी हुजूरी हमारे व्योस्था के महानुभाव भी करते हैं..अमेरिका के सिक्के और डालर पर लिखा ये शब्द उनके धार्मिक ग्रन्थ बाइबिल से लिया गया है..इस शब्द का विरोध भी हुआ अमेरिका में मगर वहां के सरकार ने इन लोगों के सामने न झुकते हुए अपनी संस्कृति से समझौता नहीं किया.. और आप इसे पढ़ सकते हैं डालर पर "in the god we trust:" के रूप में लिखा हुआ..
मगर क्या ये संभव है की भारत के सिक्के पर या नोट पर जय श्री राम लिखा जा सके???.यहाँ तो दूरदर्शन के चिह्न सत्यम शिवम् सुन्दरम में शिव का नाम आने के कारण तुस्टीकरण करते हुए बदल दिया गया..ऐसे कई उदहारण मिल जाएँगे..यहाँ वही गुलाम मानसिकता इस्तेमाल हुई जो मैकाले ने दी थी की अपने संस्कार और धर्म को गौण मानो और विरोध करो:.
अभी भारतीय परिवेश में ये सेकुलरिज्म का सिधांत अपरिपक्व सा महसूस होता है और जिसका इस्तेमाल हर तीसरा ब्यक्ति अपनी उल जलूल मानसिकता हो सही ठहराने के लिए करता है..सेकुलरिज्म उस तर्क और विज्ञान को आधार मानता है जो बार बार अपनी ही परिकल्पना को संशोधित करता रहता है..और फिर कुछ दिनों बाद उसे उन्नयन के नाम पर पलट देता है..वस्तुतः ये विज्ञान और धर्म की पूर्णकालिक द्वन्द है जिसे सेकुलरिज्म का नाम दे कर अपनी राजनैतिक विचारधारा को सही ठहराने की सीढ़ी बना साम्प्रदायिकता और सांप्रदायिक समाज की परिकल्पना की जाती है..


मेरे समझ से सेकुलर श्वानो को हिंदुत्व और गीता का अध्ययन करना चाहिए वो उन्हें एक सही,प्रमाणिक .सांस्कृतिक समाज एवं जीवन व्योस्था देने में समर्थ है जो उनके तर्क और विज्ञान के दृष्टिकोण से हर जगह विशुद्ध और प्रमाणिक है ..क्यूकी हिंदुत्व की अवधारणा सनातन है और इसका इतिहास ने राम और कृष्ण पैदा किये हैं न की मैकाले और डलहौजी..








आइये गर्व से कहें की हम हिन्दुस्थान में रहतें है और हम सेकुलर नहीं है क्यूकी हमने विश्व को समाजशास्त्र से लेकर आध्यात्म की शिक्षा दी है ...हम सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से सदियों से आत्मनिर्भर और हमें नहीं जरुरत है ऐसी सड़ी हुई आयतित अंग्रेजी विचारधारा की
जिसमें हमारे मूल आदर्शों की तिलांजलि देने रणनीति है.

जय हिंद जय हिन्दुस्थान

मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

हरेक आदमी अपने मत को सामने ला सकता है ताकि विश्व भर के लोग जान सकें कि वह मत उनके लिए कितना हितकर है ? Hindi blogging

हम सब एक परिवार हैं । हिंदी भाषा के कारण हमारे दरमियान प्यार की एक वजह भी दूसरों की अपेक्षा अधिक ही है और हक़ीक़त यह है कि हम आपस में प्यार करते भी हैं । यही वजह है कि राजनैतिक वर्चस्व के लिए लड़ने वालों ने अपने स्वार्थ के लिए धर्म-मत , जाति , संप्रदाय और भाषा-क्षेत्र के आधार पर हमेशा मानव जाति को बाँटा और एक को दूसरे से काटा लेकिन मनु के परिवार का मुखिया स्वयं ईश्वर है । उसने विज्ञान को उन्नति देकर तमाम राजनैतिक सरहदों को आज हमारे लिए बेमानी और व्यर्थ बना दिया है ।
अब योग का दौर आ चुका है । बंदा बंदे से जुड़े बिना रब को नहीं पा सकता । माँ , बाप , गुरू , अतिथि , जीवन साथी और पड़ौसी , बहुत से रूप और रिश्तों में हमारे चारों तरफ़ मालिक की अद्भुत रचनाएं मौजूद हैं । हम इन सबसे बहुत कुछ पाते हैं और देते भी हैं । इंटरनेट की सुविधा ने इस लेन देन को और भी ज़्यादा आसान और व्यापक बना दिया है।
ईश्वर की इस अनमोल कृपा और वरदान का लाभ उठाते हुए सभी हिंदी ब्लागर्स को यह कोशिश करनी चाहिए कि पूरे विश्व को यह बोध हो जाए कि वे मनु की संतान हैं इसीलिए वे Man या मनुष्य कहलाते हैं ।
...और सबसे पहले यह बोध हम हिंदी ब्लागर्स में आना चाहिए ।
पूरे विश्व मानव परिवार में शांति और समृद्धि आने का अब यही एकमात्र उपाय है।

नियम
हरेक हिंदी ब्लागर इसका सदस्य बन सकता है और भारतीय संविधान के खिलाफ न जाने वाली हर बात लिख सकता है ।
किसी भी विचारधारा के प्रति प्रश्न कर सकता है बिना उसका और उसके अनुयायियों का मज़ाक़ उड़ाये ।
मूर्खादि कहकर किसी को अपमानित करने का कोई औचित्य नहीं है ।
जो कोई करना चाहे केवल विचारधारा की समीक्षा करे कि वह मानव जाति के लिए वर्तमान में कितनी लाभकारी है ?
हरेक आदमी अपने मत को सामने ला सकता है ताकि विश्व भर के लोग जान सकें कि वह मत उनके लिए कितना हितकर है ?
इसी के साथ यह भी एक स्थापित सत्य है कि विश्व भर में औरत आज भी तरह तरह के जुल्म का शिकार है । अपने अधिकार के लिए वह आवाज़ उठा भी रही है लेकिन उसके अधिकार जो दबाए बैठा है वह पुरुष वर्ग है । औरत मर्द की माँ भी है और बहन और बेटी भी । इस फ़ोरम के सदस्य उनके साथ विशेष शालीनता बरतें , यहाँ पर भी और यहाँ से हटकर भी । औरत का सम्मान करना उसका अधिकार भी है और हमारी परंपरा भी । जैसे आप अपने परिवार में रहते हैं ऐसे ही आप यहाँ रहें और कहें हर वह बात जिसे आप सत्य और कल्याणकारी समझते हैं सबके लिए ।
These are some suggestion for learned members of this blog .
Please think about it.

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