एक बार कवि कालीदास बाज़ार घूमने निकले. एक स्त्री घड़ा और कुछ कटोरियाँ लेकर बैठी थी. ग्राहकों के इंतजार में. कविराज को कौतूहल हुआ की यह महिला क्या बेचती है, पास जाकर पूछा...
" बहन तुम क्या बेचती हो..? "
"मैं पाप बेचती हूँ, मैं स्वयं लोंगो से कहती हूँ मेरे पास पाप है, मर्जी है तो ले लो, फिर भी लोग चाह पूर्वक ले जाते हैं." महिला ने कुछ अजीब सी बात कही, कालिदास उलझन में पड़ गए. पूछा..
"घड़े में कोई पाप होता है"
महिला बोली " हां.. हा. होता है, जरूर होता है, देखो जी मेरे इस घड़े में आठ पाप भरे हुए है. : "बुद्धिनाश" "लड़ाई-झगडे" "पागलपन" "बेहोशी", "विवेक का नाश", "सद्गुण का नाश", "सुखों का अंत", और "नरक में ले जाने वाले तमाम दुष्कृत्य"
"अरे बहन इतने सारे पाप बताती है तो आखिर है क्या तेरे घड़े में...?" कालिदास की उत्सुकता बढ़ रही थी.
वह स्त्री बोली "शराब............शराब........ शराब .....यह शराब ही उन सब पापो की जननी है, जो शराब पीता है वह इन आठों पापो का शिकार बनता है." कालिदास उस महिला की चतुराई पर खुश हो गए.
महानुभावो के वचन.
"मैं मद्यपान को चोरी-डकैती, दुराचार व वेश्यावृत्ति से भी ज्यादा भयंकर पाप-चेष्टा मानता हूँ. क्रूर व्यक्तियों से भी शराबी ज्यादा क्रूर हो सकता है, लेकिन शराबी निस्तेज क्रूर है ".......... महात्मा गाँधी
"जो पुरुष नशीले पदार्थो का सेवन करता है वह घोर पाप करता है." ............ भगवान बुद्ध
"अल्लाह ने लानत फरमाई है शराब पर, पीने और पिलानेवाले पर, बेचने और खरीदने वाले पर और किसी भी प्रकार का सहयोग देने वाले पर"................. - हज़रत मुहम्मद पैगम्बर
और मैंने कहा.......
जाम पर जाम पीने से क्या फायदा,
रात बीती सुबह को उतर जाएगी,
तू हरिरस {प्रभु} की प्यालियाँ पी ले,
तेरी जिन्दगी सुधर जाएगी..