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गुरुवार, 21 अप्रैल 2011

चाँद की ठंडक का राज़

बहुत
थका हुआ था
लेटते ही सो गया
नींद में खो गया
सपनों की दुनिया में
पहुँच गया
चाँद से मिलना हुआ
वो मुस्करा रहा था
उसने हाथ बढ़ाया
फिर गले से लगाया
मैंने हाथ मिलाया
फिर गले से लगा
हाथ मैं गर्माहट थी
मिलने में आत्मीयता थी
मुझे आश्चर्य हुआ
चाँद की ठंडक का पता था
गर्माहट का अंदाज़ ना था
मैंने
आश्चर्य से चाँद को देखा
गर्माहट का राज़ पूछा
चाँद ने जवाब दिया
ठंडक मेरी गयी नहीं
अब भी उतना ही ठंडा हूँ
जब भी मिलता हूँ
गर्माहट से मिलता हूँ
निरंतर
दिल खोल कर मिलता हूँ
चाँद की ठंडक का राज़
मुझे पता चल गया

बुधवार, 20 अप्रैल 2011

लोगों बिना ना रह पाते लोग


दर्द बाटने आते लोग
दर्द बढ़ा कर जाते लोग
बड़े बेदर्द  होते लोग
लोगों के लिए
 जान भी देते लोग
जान कर भी
अनजान बनते  लोग
अपने को
नज़दीक बताते लोग
दिल से दूर होते लोग
निरंतर भरमाते लोग
लोग
बताते लोगों की बात
सच को झूंठ,झूंठ को सच
बनाते लोग
लोगों को लूटते लोग
लोगों को सब दे देते लोग
लोगों बिना ना रह
पाते लोग
715-138-04-11

सोमवार, 18 अप्रैल 2011

आठ पापों का घड़ा

एक बार कवि कालीदास बाज़ार घूमने निकले. एक स्त्री घड़ा और कुछ कटोरियाँ लेकर बैठी थी. ग्राहकों के इंतजार में. कविराज को कौतूहल हुआ की यह महिला क्या बेचती है, पास जाकर पूछा...
" बहन तुम क्या बेचती हो..? "
"मैं पाप बेचती हूँ, मैं स्वयं लोंगो से कहती हूँ मेरे पास पाप है, मर्जी है तो ले लो, फिर भी लोग चाह पूर्वक ले जाते हैं." महिला ने कुछ अजीब सी बात कही, कालिदास उलझन में पड़ गए.  पूछा..
"घड़े में कोई पाप होता है"
महिला बोली " हां.. हा. होता है, जरूर होता है, देखो जी मेरे इस घड़े में आठ पाप भरे हुए है. : "बुद्धिनाश" "लड़ाई-झगडे"  "पागलपन"  "बेहोशी", "विवेक का नाश", "सद्गुण का नाश", "सुखों का अंत", और "नरक में ले जाने वाले तमाम दुष्कृत्य"
"अरे बहन इतने सारे पाप बताती है तो आखिर है क्या तेरे घड़े में...?" कालिदास की उत्सुकता बढ़ रही थी. 
वह स्त्री बोली    "शराब............शराब........  शराब .....यह शराब ही उन सब पापो की जननी है, जो शराब पीता है वह इन आठों पापो का शिकार बनता है." कालिदास उस महिला की चतुराई पर खुश हो गए. 
महानुभावो के वचन.
"मैं मद्यपान को चोरी-डकैती, दुराचार व वेश्यावृत्ति से भी ज्यादा भयंकर पाप-चेष्टा मानता हूँ. क्रूर व्यक्तियों से भी शराबी  ज्यादा क्रूर हो सकता है, लेकिन शराबी निस्तेज क्रूर है ".......... महात्मा गाँधी 

"जो पुरुष नशीले पदार्थो का सेवन करता है वह घोर पाप करता है." ............ भगवान बुद्ध 

"अल्लाह ने लानत फरमाई है शराब पर, पीने और पिलानेवाले पर, बेचने और खरीदने वाले पर और किसी भी प्रकार का सहयोग देने वाले पर".................  - हज़रत मुहम्मद पैगम्बर  

और मैंने कहा.......
जाम पर जाम पीने से क्या फायदा,
रात बीती सुबह को उतर जाएगी,
तू हरिरस {प्रभु} की प्यालियाँ पी ले,
तेरी जिन्दगी सुधर जाएगी..

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