आर एस एस की सलाह पर अंधविश्वाश करते हुए अध्-खिलाड़ी बाबा रामदेव यादव ने जो अति-आत्मविश्वाश दिखने की चेष्टा की उसके पीछे आर एस एस का ही हाथ है क्यूंकि रामदेव को बलि का बकरा बना कर RSS सत्ता पर पुनः पहुंचना चाहती है. उन्हें भगवाधारी एक ईमानदार टाईप का व्यक्ति चाहिए था और एक ईमानदार नेता टाईप व्यक्ति चाहिए था. तो अन्ना और रामदेव से बेहतर कौन हो सकता था. सो RSS ने बाबा और अन्ना का जो इस्तेमाल किया वह आम जनता में लोकप्रिय भी रहा और जनता ने उन्हें हांथों हाँथ लिया भी. बीजेपी अथवा RSS को इससे मतलब नहीं है कि भष्टाचार ख़त्म हो अथवा नहीं और न ही कला धन आये अथवा नहीं बल्कि वह किसी भी क़ीमत पर 'नौ सौ चूहे खा कर बिल्ली हज को चली' को चरितार्थ करते हुए आम जनता में अपनी छवि को भला बनाते हुए आगामी चुनावों में सत्ता हासिल करने का घिनौना षड्यंत्र करने में पूरी तरह से व्यस्त है और वह इसके लिए कुछ भी करने को राज़ी है.
ज़रा सोचिये कि भले मानुस की तरह बाबा रामदेव यादव योग सिखा रहे थे चलो भैया दवा भी बेच रहे थे तो अब उन्हें राजनीति का कीड़ा किसने कटवा दिया जो वो अपनी औक़ात को भूल गए. आखिर उनके पीछे कौन कौन है जो उन्हें नचा रहे हैं. कल का बयान भी उनका देश द्रोहियों वाला था कि वे अपनी सेना बनायेंगे और अगली मर्तबा किसी भी अनशन अथवा शिविर में पुलिस आती है तो उनका हथियारों से लैस होकर मुक़ाबला करेंगे. वे अभी भी RSS के तर्ज पे और उनकी सलाह पे बयान पे बयान दे रहे हैं.
बाबा रामदेव अगर रामलीला मैदान में हलाक हो जाते तो किसको सबसे ज्यादा फायेदा पहुँचता? हाँ, सही सोचा आपने...! बीजेपी को ! आर एस एस अथवा बीजेपी ने उनकी हत्या की पूरी साजिश कर रखी थी. बाबा का पूरा प्लान फिक्स था. सुबोधकांत सहाय जो कि पहले भाजपा सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं के साथ कपिल सिब्बल समेत तीन मंत्री भी थे. इधर बाबा को अपनी मौत नज़दीक आते देख भागना ही पड़ा वरना देश में जोश भरने वाला एक बाबा उर्फ़ नेता मामूली सपाई कार्यकर्ता से भी गया गुज़रा निकल गया और भाग निकला वो भी औरतों के कपडे पहन कर. वैसे बाबा का भागना ज़रूरी था क्यूंकि आरएसएस के छिपे हुए लोग उन्हें मार ही डालते.
6/09/2011 03:37:00 pm
Saleem Khan
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