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रविवार, 10 अप्रैल 2011

क्या जनलोकपाल विधेयक से भ्रष्टचारियों पर लगेगा अंकुश?

भष्टाचार के खिलाफ अब तक देश में तीन बडे आंदोलन हो चुके है। सबसे पहला आंदोलन 1974 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के द्वारा चलाया गया था। यह आंदोलन बिहार में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ था। हालांकि यह आंदोलन संपूर्ण क्रांति के तौर पर फैला था। लेकिन इस आंदोलन का कितना असर पडा, यह हम सब बिहार की हालत देखकर समझ सकते हैं।


इसके बाद दूसरा आंदोलन विश्वनाथ प्रताप सिंह द्वारा 1987 में चलाया गया था।यह बोफोर्स तोप सौदे के घोटाले से जुडा था। यह आंदोलन भी देश की आवाज बना था। बोफोर्स तोप के मामले में कुछ लोगों के नाम सामने आये, लेकिन बात वहीं की वहीं रही।बोफोर्स तोप घोटाले में किसी को कोई सजा नहीं हो पाई है और अब यह केस काफी लंबा होने की वजह से बंद कर दिया गया।
तीसरा आंदोलन 5 अप्रैल 2011 को अन्ना हजारे ने किया। अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई और जन लोकपाल विधेयक बनाने की मांग लेकर अनशन पर बैठ गये। उनके साथ देश के सामाजिक कार्यकर्ताओं स्वामी अग्निवेश, अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी, स्वामी रामदेव व श्री श्री रविशंकर भी इस मुहिम में शामिल हुए। धीरे-धीरे उनके साथ पूरा देश इस जंग में शामिल हो गया। भ्रष्टाचार के खिलाफ इस मुहीम में लोगों को जोडने का सबसे बड़ा माध्यम सोशल साइटें बनी। जनता के एक साथ इतनी बडी संख्या में जुडने से सरकार को झुकना पडा। गई और उन्होंने अन्ना हजारे की मांगों को मानते हुए जन लोकपाल विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक से लोगों को उम्मीदें तो बहुत है, पर देखना यह है कि इस विधेयक से लोगों को कितनी राहत मिलती है और क्या यह विधेयक अपनी कसौटी पर खरा उतर पाएगा ?

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