
12/10/2012 10:30:00 am

Nirantar
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तुम्हें पा
ना सका
ज़िन्दगी संवार
ना सका
तन्हाई को दोस्त
सुकून को
दुश्मन बना
लिया
समंदर की उम्मीद
में
चुल्लू भर
पानी भी नहीं
मिला
चेहरा मायूस
हो गया
होंसला टूट
गया
तुमने बेरुखी
से कह दिया
हमने कभी मोहब्बत
का
इरादा ही नहीं
किया
828-12-06-11-2012
सुकून,ज़िन्दगी,तन्हाई,
मोहब्बत,शायरी,

6/17/2011 07:53:00 pm

Nirantar
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वो देखते अक्स
तुम्हारा अपने दिल में
तुम देखते
अक्स उनका आईने में
तुमने दिल उन्हें दिया
उन्होंने
सौदा रूह का किया
तुमने
मोहब्बत नाम दिया
उन्होंने इबादत समझा
निरंतर मकसद तुम्हारा
उन्हें पाना
उन्होंने रास्ता
खुदा के घर का जाना
तुम्हें अपनी मंजिल
समझा
17-06-2011
1061-88-06-11

6/11/2011 01:27:00 pm

Nirantar
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मन की खिड़की
दिल का दरवाज़ा खुला
रखता हूँ
मेहमानों का निरंतर
इंतज़ार करता हूँ
सब्र नहीं खोता
किस जात,
किस रंग का होगा ?
कब आयेगा ?
नहीं सोचता
दिल के सौदे में कोई
मोल भाव नहीं करता
हर आने वाले का
इस्तकबाल करता
दिल मिले
जब तक रखता हूँ
ना मिले तो प्यार से
विदा करता हूँ
ना मलाल करता
ना रंज कोई रखता हूँ
नए मेहमान से
मिलने का अरमान
कभी ख़त्म नहीं होता
उम्मीद में
वक़्त गुजारता हूँ
11-06-2011
1033-60-06-11

5/21/2011 11:34:00 pm

Nirantar
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चाहता नहीं वो
लौट कर आएँ फिर से
आएँ भी तो मिले ना
हमसे
अब तन्हाई से
दोस्ती कर ली हमने
बहुत मुश्किल से
दिल को सम्हाला हमने
निरंतर बेवफाई देखी
हमने
ज़ख्मों को हरा ना
होने देंगे
अकेले में रो लेंगे
फिर चोट ना खाएँगे
बिना अपनों के
जी लेंगे
21-05-2011
906-113-05-11

3/24/2011 07:32:00 pm

Nirantar
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क्यों सोचते
तुम हो अकेले
वो भी साथ तुम्हारे
जो नाम तुम्हारा
नफरत से लेते
दिन रात तुम्हें कोसते
चर्चे शहर में करते
चाहते नहीं तो क्या
निरंतर याद तो करते
जो भी है दिल में
साफ़ साफ़ बताते
बेहतर हैं उनसे
जो अपना तो कहते
दिल में जहर रखते
भूले से याद ना करते
देख कर मुस्काराते
पीछे से मुंह चिडाते
इधर हाथ मिलाते
उधर खंजर मारते
24-03-03
497—167-03-11