बृज की भूमि भई है निहाल |
आनंद-कंद प्रकट भये बृज में,विरज भये बृज ग्वाल |
आशिस देंय विष्णु ब्रह्मा शिव, मुसुकावैं गोपाल |
पुरजन परिजन हरख मनावें, जनमु लियो नंदलाल |
बाजहिं, ढोल, मृदंग ,मंजीरा, नाचहिं बृज के बाल |
सुर दुरलभ छवि निरखि-निरखि छकि श्याम' भये हैंनिहाल ||
8/21/2011 01:21:00 pm
shyam gupta


Posted in:
0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें