चाहता नहीं वो
लौट कर आएँ फिर से
आएँ भी तो मिले ना
हमसे
अब तन्हाई से
दोस्ती कर ली हमने
बहुत मुश्किल से
दिल को सम्हाला हमने
निरंतर बेवफाई देखी
हमने
ज़ख्मों को हरा ना
होने देंगे
अकेले में रो लेंगे
फिर चोट ना खाएँगे
बिना अपनों के
जी लेंगे
21-05-2011
906-113-05-11
5/21/2011 11:34:00 pm
Nirantar
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4 टिप्पणियाँ:
sundar prastuti.
ऐसी भी क्या बात है तेला जी...दिल मिले ना मिले हाथ मिलाते रहिये...
sakaratmak prastuti....
bhut hi sunder shabd rachna...
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