बुधवार, 4 मई 2011

आस






दूर जाने की कोशिश
तेरे और करीब ले आती है ,
पत्थर बनने की कोशिश
पानी बन बह जाती है !
तेरे होने के अहसास से
जीवन में आस जुडती जाती है ,
इस कारण -
दूर जाने की कोशिश
बेकार ही हो जाती है ................




प्रियंका राठौर 

4 टिप्पणियाँ:

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" ने कहा…

श्रीमान जी,मैंने अपने अनुभवों के आधार ""आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें"" हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है. मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग www.rksirfiraa.blogspot.com पर टिप्पणी करने एक बार जरुर आयेंगे.ऐसा मेरा विश्वास है.

sushma 'आहुति' ने कहा…

bhut hi khubsurat hai panktiya...

गंगाधर ने कहा…

khubsurat

नेहा भाटिया ने कहा…

प्रियंका जी खूबसूरत रचना के लिए आपको बधाई.

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