बुधवार, 6 अप्रैल 2011

हाँ शाहिद हम तंगदिल हैं !


हाँ शाहिद हम तंगदि हैं ! 
इसीलिए हम पाकिस्तानियों
की तरह अपनी धरती पर
आतंकवादी तैयार नहीं करते
और न ही कसाब जैसे हैवानों को
भेजते हैं आपके देश में
मासूमों का क़त्ल करने .

हाँ शाहिद हम तंगदिल हैं !
इसीलिए अपने जवान बेटों को
शहीद  करवाकर भी
शुरू कर देते हैं समझौता
एक्सप्रेस और भेजते हैं बुलावा
क्रिकेट मैच देखने का ,
जबकि तुम बड़े दिल वाले
आज तक मुंबई हमले की
अपनी साजिश को स्वीकार नहीं
करते और नकार देते हो
हमारे द्वारा प्रस्तुत हर
सबूत को .

हाँ शाहिद हम तंगदिल हैं
और हमारे राष्ट्र पिता भी
तो तंगदिल थे जिन्होंने
पचपन करोड़ देकर तुम्हारे
राष्ट्र को आर्थिक सुद्रढ़ता  
प्रदान करनी चाही
बदले में तुम बड़े दिल वालों ने
उस पैसे से हथियार जुटा कर
हम पर ही हमला कर डाला .

हाँ शाहिद हम तंगदिल हैं
तुम जैसे बड़े दिल वालों से
लाख गुना बेहतर क्योंकि
हम हिन्दुस्तानी है
केवल हिन्दुस्तानी .

''जय हिंद '

9 टिप्पणियाँ:

शालिनी कौशिक ने कहा…

हाँ शाहिद हम तंगदिल हैं
तुम जैसे बड़े दिल वालों से
लाख गुना बेहतर क्योंकि
हम हिन्दुस्तानी है
केवल हिन्दुस्तानी .
shahid kee tippani par aapki ye kavita roopi panktiyan seedha v sateek ktaksh hain

आकाश सिंह ने कहा…

शिखा दीदी आपने तो शाहिद की बोलती बंद कर दिया | मैं यही सोच रहा था की अभी तक किसी का मुंह क्यों नही खुला | अच्छी कविता के लिए आभार |

शिखा कौशिक ने कहा…

Shalini ji v Akash ji bahut bahut aabhar .

ana ने कहा…

aapne to shadid ke mooh par tamacha jad diya....sashakta kavita...iski awashyakta thi ....aapne kar dikhaya

Dr. shyam gupta ने कहा…

वाह !! ईंट का जबाव पत्थर से...सुन्दर...

हरीश सिंह ने कहा…

shikha ji main bahar tha, mamla samajh nahi pa raha hu. kya bat hai hame bhi bataye. waise kavita achchhi hai.

दर्शन लाल बवेजा ने कहा…

करुणा पूर्ण वीर रस :)

तीसरी आंख ने कहा…

बेहतरीन टिप्पणी है, साधुवाद

kirti hegde ने कहा…

swagat....

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