मंगलवार, 15 दिसंबर 2015

शनिवार, 12 दिसंबर 2015

मंगलवार, 8 दिसंबर 2015

सत्‍यमेव जयते ! ... (?): इस पर बोलिए हुजूर...

सत्‍यमेव जयते ! ... (?): इस पर बोलिए हुजूर...: लोकसभा में सांसद अभिषेक सिंह बड़े दिनों बाद टीवी पर लोकसभा की कार्रवाई का सीधा प्रसारण देखा, देखने की वजह थी, सांसद (राजनांदगांव) कार्य...

शनिवार, 22 नवंबर 2014

’दुष्यंत कुमार सम्मान’ से सम्मानित होंगे युवा साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव

प्रसिद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ’आगमन’ ने लोकप्रिय युवा लेखक व साहित्यकार एवं सम्प्रति इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव को इस वर्ष के ’दुष्यंत कुमार सम्मान-2014’ के लिए चयनित किया है। उक्त सम्मान श्री यादव को 23 नवम्बर को नोएडा में आयोजित आगमन वार्षिक सम्मान समारोह में प्रदान किया जायेगा। उक्त जानकारी संस्था के संस्थापक श्री पवन जैन ने दी।

गौरतलब है कि सरकारी सेवा में उच्च पदस्थ अधिकारी होने के साथ-साथ साहित्य, लेखन और ब्लाॅगिंग के क्षेत्र में भी चर्चित श्री यादव की अब तक कुल 7 पुस्तकें 'अभिलाषा' (काव्य-संग्रह, 2005) 'अभिव्यक्तियों के बहाने' व 'अनुभूतियाँ और विमर्श' (निबंध-संग्रह, 2006 व 2007), India Post : 150 glorious years  (2006), 'क्रांति-यज्ञ : 1857-1947 की गाथा' (संपादित, 2007), ’जंगल में क्रिकेट’ (बाल-गीत संग्रह-2012) एवं ’16 आने 16 लोग’(निबंध-संग्रह, 2014) प्रकाशित हो चुकी हैं। उनके व्यक्तित्व-कृतित्व पर एक पुस्तक ‘‘बढ़ते चरण शिखर की ओर: कृष्ण कुमार यादव‘‘ (सं0 डाॅ0 दुर्गाचरण मिश्र, 2009, आलोक प्रकाशन, इलाहाबाद) भी प्रकाशित हो चुकी  है। श्री यादव देश-विदेश से प्रकाशित तमाम पत्र पत्रिकाओं एवं इंटरनेट पर भी प्रमुखता से प्रकाशित होते रहते हैं।

 कृष्ण कुमार यादव को इससे पूर्व उ.प्र. के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव द्वारा ’’अवध सम्मान’’, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरी नाथ त्रिपाठी द्वारा ’’साहित्य सम्मान’’, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री शेखर दत्त द्वारा ”विज्ञान परिषद शताब्दी सम्मान”, परिकल्पना समूह द्वारा ’’दशक के श्रेष्ठ हिन्दी ब्लाॅगर दम्पति’’ सम्मान, विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार द्वारा डाॅक्टरेट (विद्यावाचस्पति) की मानद उपाधि, भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘’डाॅ0 अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान‘‘, साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, राजस्थान द्वारा ”हिंदी भाषा भूषण”, वैदिक क्रांति परिषद, देहरादून द्वारा ‘’श्रीमती सरस्वती सिंहजी सम्मान‘’, भारतीय बाल कल्याण संस्थान द्वारा ‘‘प्यारे मोहन स्मृति सम्मान‘‘, ग्वालियर साहित्य एवं कला परिषद द्वारा ”महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला‘ सम्मान”, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ‘‘भारती रत्न‘‘, अखिल भारतीय साहित्यकार अभिनन्दन समिति मथुरा द्वारा ‘‘महाकवि शेक्सपियर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान‘‘, भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ द्वारा ’’पं0 बाल कृष्ण पाण्डेय पत्रकारिता सम्मान’’, सहित विभिन्न प्रतिष्ठित सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ-साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु तमाम सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त हो चुकी हैं।   

बुधवार, 24 सितंबर 2014

मुहब्बतों के दायरों को यूँ कम ना कीजिये ,
जितना हो सके खुशबू को फैलने दीजीये

इसी की बदौलत है खुशियों की रोसनाई ,
शाम को सुबह की मुहब्बत में ढलने दीजिये
कर रहे भवरे शिद्दत से कलियों से आरज़ू ,
सब्र करो जनाब मुहब्बत से खिलने तो दीजिये
ये सारे मशायल दुनिया के हल हो जायेंगे ,
बस दिलों को दिलों से मिलने तो दीजिये
कमलेशसमझ जाएँ वो हाल--दिल अपना ,
बस मुहब्बत भरे लबों को हिलने तो दीजिये

मंगलवार, 5 अगस्त 2014

मित्रों प्रणाम, आप सबके स्नेह से मुझे तुलसी जयंती पर भोपाल के हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में दिनांक 3 अगस्त 2014 को मध्य प्रदेश तुलसी साहित्य अकादमी द्वारा वर्ष 2014 का "तुलसी सम्मान" प्रदान किया गया। संबंधित चित्र संलग्न है। डॉ सुधीर गुप्ता "चक्र" (हास्य-व्यंग्य कवि)

रविवार, 3 अगस्त 2014

गुरुवार, 31 जुलाई 2014

पत्थरों के शहर में जीते हैं सब
और जो हवा वो पीते हैं
उससे अब तक तो सबको जम जाना था
किन्तु ऐसा कभी भी नहीं हुआ
कि जीता-जीता अचानक कोई जम जाए
असल में नकली रिश्तों के बीच जीते हुए सबके
दिल ही ऐसे पत्थर हो जाया करते हैं कि फिर
देह का पत्थर हो जाना कोई मायने नहीं रखता
पत्थर कदम-कदम पर मिलते हैं
बाधाओं के रूप में और नफरत के रूप में 
जिन्दगी की इस बहती हुई नदी में
हमारा हर गलत कदम पत्थर ही होता है
किसी न किसी की राह में
यहाँ तक कि खुद हमारी ही राह में
अक्सर दिखाई देते हुए पत्थरों से
न दिखाई देने वाले पत्थर ज्यादा खतरनाक होते हैं
किन्तु उन्हीं पर हमारा ध्यान नहीं जा पाता !!
और जब ध्यान जाता है,पत्थर बहुत बड़े हो चुके होते हैं
धरती पर के हमारे कुनबे की आपसी कलह और नफरत
और हवा-पानी आदि सब कुछ के विषैले हो जाने
हमारे बीच इन पत्थरों के चट्टान हो जाने की कहानी है
जिन पत्थरों से डरने-टूटने और भय की बातें करते हुए हम
उन्हीं पत्थरों की भयावह चट्टानों पर खड़े
अब न तब गहरी घाटियों में समा जाने वाले हैं हम
और आश्चर्य कि हम अब तक तो ये भी नहीं जानते !!??

गुरुवार, 15 मई 2014

मर कर जीना सीख लिया


अब दुःख दर्द में भी मैने मुस्कुराना सीख लिया
जब से अज़ाब को छिपाने के सलीका सीख लिया।

बेवफाओं से इतना पड़ा पाला कि अब
इल्तिफ़ात से भी किनारा लेना सीख़ लिया।

झूठे कसमें वादों से अब मैं कभी ना टूटूंगा
ग़ार को पहचानने का हुनर जो सीख लिया।

वो कत्लेआम के शौक़ीन हैं तो क्या हुआ
मैंने भी तो अब मर के जीने का तरीका सीख़ लिया।

सुनसान रास्तों पर चलने से अब डर नहीं लगता
मैंने अब इन पर आना-जाना सीख लिया। 
शब्दार्थ :::
इल्तिफ़ात- मित्रता
ग़ार- विश्वासघात
अज़ाब - पीड़ा

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