गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011

मेरी पहली फोन फ्रेंड

आज मैं अपने जीवन का वह राज बताने जा रहा हूँ, जो राज कोई भी व्यक्ति  अपने परिवार के अलावा कही नहीं बता सकता. लोग मुझ पर हंसेगे, इसे मेरा बेटा भी पढ़ेगा.......  किन्तु मुझे कोई डर नहीं..आज मैं एक बड़े झूठ का पर्दाफाश करूँगा..................
      दिल की बात                           परिवार के साथ
बहुत पहले की बात है. जब रिलायंस मो. 500 रु. मिल रहा था. मैंने भी एक ले लिया.. मैं बता दू  मुझे मो. का बहुत शौक था. उससे  पहले हथौड़े साईज की मो. भी इस्तेमाल कर चुका था. हा तो मैं बता रहा था. मैं एक दिन मो. लेकर हाथ में खेल रहा था. उसी दौरान मेरे एक मित्र गिरीश का एक  sms आया. कोई शायरी थी..      उसी शायरी को मैं ५ न. ऊपर के नो. और ५ नो  . नीचे के ........... उस sms को फोरवर्ड कर दिया. फिर एक महिला का फ़ोन आया उसने पूछा sms कैसे किया, मैंने कहा गलती से हो गया............ फिर मैं डर गया हे भगवन यह क्या किया कही लेने के देने न पर जाय........... फिर दूसरे दिन एक no . से sms आया........... उसने लिखा था...... who R U   u know me r mistak.............. maine likha .................... mistak i,m sorry,,,,,,,,,,,,,,,,, phir udhar se likha aaya........... sher achchha laga dubara bhejo............ maine phir us sher ko bheja aur yek aur peechhe laga diya............... फिर परिचय पूछे जाने.............. जब  उसने बताया ....... {नाम नहीं} फ्रॉम मुंबई .......... तो एक बार फिर मेरी रूह कांप गयी...............  लेकिन वह अच्छी लड़की थी.......... बेचारी को हम पर रहम आ गया............. वह जान  गयी की  यह डरपोक पंछी है................ अधिक शरारत नहीं करेगा.................मेरी भी खोई हिम्मत धीरे धीरे लौटने लगी ........ वह भी जानती थी की अचानक फ़ोन करू तो कही इस बन्दे का हार्ट अटैक न हो जाय........... लिहाज हम लोग 1o   दिन sms का ही खेल खेलते रहे................ एक दिन उसी नो. से फ़ोन की घंटी बजी तो मेरी रूह कांप गयी.. .......... किसी तरह हिम्मत कर फ़ोन उठाया बात हुयी ................ फिर होती ही गयी .... एक साल तक  हम लोग फ़ोन पर ही बता करते रहे........ एक बार मैं मुंबई गया तो उससे मिलने पूना गया......... बाप रे बाप............. २०० KM .... हम लोग मिले घूमे बात किये फिर उसी दिन मैं मुंबई लौट आया ..................... फिर उसकी शादी हो गयी................ किसी इंजिनियर साहेब से............. उनसे भी मेरी बात हुयी........... हम मिलने की बात जरुर कहे किन्तु फिर कभी नहीं मिल पाए,........... इसी बीच मेरा मो. खो गया और उसका no. भी............. दोनों लोग बिछुड़ गए किन्तु आज तक मैं उसे भूल नहीं पाया ............... हम दोनों एक अच्छे दोस्त रहे................ कोई इस सम्बन्ध का मतलब चाहे जी निकले ............ किन्तु 1500 किलोमीटर दूर रहकर............. उसके बाद कई वर्षो से हम मिले नहीं किन्तु हमारे बीच एक रिश्ता कायम हो चुका था..... एक पवित्र दोस्ती का.................... यही वजह रही जिसके कारण हम उसे नहीं भूल पाए.............  और शायद वह भी हमें.............. एक दिन मैं उसे याद करके ऑरकुट पर खोजा नहीं मिली.......... फिर गूगल सर्च उसका नाम डाला और वह मिल गयी............. मैंने उसे मेल भेजा उसमे लिखा.............
no name ..  pata nahi kyo mujhe lag raha hai tum wahi ००००००  ho jo mujhe
makad bulati thi. aur main tumse milne pune gaya tha. plese batao na.
main tumhe aaj tak nahi bhoola hu.
haris from bhadohi ,....
यह मेल मैंने  १५ जनवरी २०११ १०:१९ अपराह्न को भेजा था..................... उधर से कोई जवाब नहीं आया मैं निराश हो गया......... आज अचानक   २३ फरवरी २०११ १०:४६ अपराह्न  को उसका मेल आया..   यह देखते ही मैं इतना खुश हुआ की उसे शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता......... उसे मैंने   इस प्यारे से घर

उत्तरप्रदेश ब्लॉगर्स असोसिएसनमें दावत दी है.............

वह एक विश्वविद्यालय में प्रोफेषर है..... आज मैं अपने घर के सारे  सदस्यों के बीच बुलाया है......... और अपने इस परिवार के बीच अपना एक झूठ कबूल रहा हूँ ............ जो मैंने उसे खोने के डर से हमेशा  छुपाया............ उस समय मेरी शादी हो चुकी थी जो मैंने उसे कभी नहीं बताया................. आज मैं अपने इस परिवार के सामने माफ़ी मांगता हूँ ...... यदि मेरी शादी नहीं हुयी होती तो ००००००००००००००००००००००

आप सभी को याद होगा मैंने कहा था..... इस सामुदायिक ब्लॉग का एक अपना मकसद है........... लोग आरोप लगते रहे और मैं शांत रहा........ आज वह समय आ गया है........ कल हम बताएँगे ..................

उत्तरप्रदेश ब्लागर एसोसिएसन का क्या है मकसद........?

5 टिप्पणियाँ:

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

उस शेर को भी इस पोस्ट में लिख दिया होता makad जी ।

हरीश सिंह ने कहा…

अरे वह अनवर भाई आप अभी तक जग रहे है....................दूसरा झटका ...................माकड़ का मतलब बन्दर होता है........

शिवकुमार ( शिवा) ने कहा…

अच्छा लेख ..

शिव शंकर ने कहा…

इश्क इश्क ये है इश्क वाह भाई साहब आखिर हमें मिला ही दिया बिछड़े दोस्त से .

Minakshi Pant ने कहा…

बहुत खुबसूरत लगा आप दोनों का ये परिचय |

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