गुरुवार, 31 मार्च 2011

प्रेम काव्य-महाकाव्य --तृतीय सुमनान्जलि--प्रेम-भाव ---डा श्याम गुप्त ......


  प्रेम काव्य-महाकाव्य--गीति विधा  --     रचयिता---डा श्याम गुप्त  

  -- प्रेम के विभिन्न  भाव होते हैं , प्रेम को किसी एक तुला द्वारा नहीं  तौला जा सकता , किसी एक नियम द्वारा नियमित नहीं किया जासकता ; वह एक विहंगम भाव है | प्रस्तुत  सुमनांजलि- प्रेम भाव को ९ रचनाओं द्वारा वर्णित किया गया है जो-प्यार, मैं शाश्वत हूँ, प्रेम समर्पण, चुपके चुपके आये, मधुमास रहे, चंचल मन, मैं पंछी आजाद गगन का, प्रेम-अगीत व प्रेम-गली शीर्षक से  हैं |---प्रस्तुत है प्रथम रचना.... प्यार ....


          १- प्यार .....
          (गीत )
उपनिषद् की ज्ञान धारा !,
मूँद लेना नयन अपने  ||

सर्जनाएं,   वर्जनाएं,
नीति की सब व्यंजनायें |
मंद करलो निज स्वरों को,
प्रीति-स्वर जब गुनगुनाएं |
संहिताओ ! प्रेम स्वर में-
गुनागुनालो छंद अपने |
मूँद लेना नयन अपने ||

धर्म दर्शन मान्यताओ !
योग3 पथ की भावनाओ!
सांख्य और मीमांसाओ !५ 
रोक लेना तर्क अपने |
नैयायिको! भूल जाना,
सब प्रमेय-प्रमाण अपने |

मूँद लेना नयन अपने ||

शांत ठहरी झील-तल से,
प्यार की लहरें उठी हैं |
ज्ञान की अज्ञानता के,
अहं से टकरा उठी हैं |
झील की उत्ताल लहरो !
रोक लेना भंवर अपने |

मूँद लेना नयन अपने ||

आज मन के तोड़ बंधन,
रीति के सब ज्ञान मंथन |
प्रेम जीवन गीत गाने,
चल पड़े  दो मीत उन्मन |
पंथ के हे कंटको ! तुम-
रोक लो संधान अपने |

मूँद लेना नयन अपने ||

प्यार की उमड़ी घटाएं ,
धुंध के पथ खोलती हैं |
शाम-सिंदूरी, हवाओं -
में महावर घोलतीं हैं |
प्यार लेकर आगया है,
थाल भर रंगीन सपने |

मूँद लेना नयन अपने ||

वेद की पावन ऋचाओ,
प्रेम का संगीत गाओ |
उपनिषद् की ज्ञान धारा ,
प्रीति के स्वर गुनगुनाओ |
प्यार लेकर आगया है,
सौख्य के उपहार कितने |

मूँद लेना नयन अपने || -----क्रमश: प्रेम भाव -द्वितीय  रचना - मैं शाश्वत हूँ ...

{कुंजिका ---  १=भारतीय  अध्यात्म-ज्ञान के उच्चतम श्रोत ....वेदों के आध्यात्मिक -पक्ष का वर्णन करने वाले शास्त्र , उपनिषद् अर्थात व्यवधान रहित सम्पूर्ण,सर्वांग ज्ञान....सामीप्येन नितरां प्राप्नुवन्त परंब्रह्म ...जिस विद्या से परब्रह्म का सामीप्य पाया जाता है | परमेश्वर, परमात्मा-ब्रह्म और आत्मा के स्वभाव और सम्बन्ध का  दार्शनिक और ज्ञानपूर्वक वर्णन...२ =वेदों का मूल मन्त्र वाला खण्ड , ये वैदिक वांग्मय का पहला हिस्सा है जिसमें काव्य रूप में देवताओं की यज्ञ के लिये स्तुति की गयी है । इनकी भाषा वैदिक संस्कृत है। चार वेद होने की वजह से चार संहिताएँ हैं,ऋग्वेद संहिता दुनिया का  सर्वप्रथम ग्रन्थ है|....३ से ६ तक = भारतीय षड-दर्शन के अंग ....७= वेदों के मन्त्र ...


2 टिप्पणियाँ:

सारा सच ने कहा…

मेरी लड़ाई Corruption के खिलाफ है आपके साथ के बिना अधूरी है आप सभी मेरे ब्लॉग को follow करके और follow कराके मेरी मिम्मत बढ़ाये, और मेरा साथ दे ..

गंगाधर ने कहा…

badhiya..

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