बुधवार, 20 अप्रैल 2011

ये ''हॉरर किलिंग '' हैं

आजकल हर ओर ''औनर किलिंग '' के नाम पर लड़कियों को मौत के घाट उतारा जा रहा है .मेरा मानना है कि ये ''हॉरर किलिंग '' हैं .15 से २० साल की युवतियों को परिवार की मर्यादा के नाम पर मौत के घाट उतारना अमानवीय कृत्य तो है ही साथ ही यह आज की प्रगतिशील नारी शक्ति को ठेंगा दिखाना भी है जबकि अधिकांश  लड़कियां अपने परिवार का नाम ऊँचा कर रही हैं .ऐसे में इज्जत के नाम पर उनका क़त्ल न करके बहुत सोच विचार के बाद परिवार को कोई निर्णय लेना चाहिए .लड़कियां चौखट से बाहर आकर कैसे हर कसौटी पर खरी उतरती हैं इन्हें मैंने इन शब्दों में व्यक्त करने का प्रयास किया है -

लड़कियां जब चौखट से 
बाहर आती हैं 
उनके साथ पग-पग चलती 
है कुल की मर्यादा 
पिता का स्वाभिमान 
माता का विश्वास 
भाई की हिदायतें 
और अनंत स्वप्नों 
की श्रृंखला  ,
लड़कियां हर कसौटी
पर खरी उतर जाती हैं 
लड़कियां जब चौखट से 
बाहर आती हैं .

वो धैर्य  से ,सहनशीलता से 
पार करती हैं हर बाधा ,
छीन लेती हैं इस जग से 
लूटा गया अपना हक आधा ,
आधी दुनिया  की बुझी 
आस फिर जग जाती है .
लड़कियां जब चौखट से 
बाहर आती हैं .

सदियों से सुप्त मेधा को 
झंकझोर कर जगाती हैं ,
चहुँ ओर अपनी प्रतिभा का 
लोहा मनवाती हैं ,
बछेंद्री बन एवरेस्ट पर 
चढ़ जाती हैं ,कल्पना रूप 
में ब्रह्माण्ड घूम आती हैं .
लड़कियां जब चौखट 
से बाहर आती हैं .

''हॉरर किलिंग'' करने वालों को अपने गिरेबान में भी झांक कर   देख लेना चाहिए कि आखिर घर का बच्चा ऐसा करने के लिए क्यों विवश हो जाता है .वो क्यों बाहर के व्यक्ति पर  विश्वास कर घरवालों से बगावत कर देता है ?क्यों घर से भागने को विवश होता है ? कहीं न कहीं कमी उन में ही है जो मर्यादा का नाम लेकर अपने मासूम बच्चों  का  खून  बहा रहें हैं .
http://vicharonkachabootra.blogspot.com

10 टिप्पणियाँ:

शालिनी कौशिक ने कहा…

bahut sahi bat kahi hai aapne shikha ji ,jimmedar kahin n kahin sanskaron ki kami hai jo bachchon ko aisa karne ko vivash kar rahi hai.aaj hi supreme court ne bhi apne faisle me honour killing ko apradh mana hai aur iske liye uchit karyavahi ke sarkar ko nirdesh diye hain.

हल्ला बोल ने कहा…

क्या आप सच्चे हिन्दू हैं .... ? क्या आपके अन्दर प्रभु श्री राम का चरित्र और भगवान श्री कृष्ण जैसा प्रेम है .... ? हिन्दू धर्म पर न्योछावर होने को दिल करता है..? सच लिखने की ताकत है...? महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवा जी, स्वामी विवेकानंद, शहीद भगत सिंह, मंगल पांडे, चंद्रशेखर आजाद जैसे भारत पुत्रों को हिन्दू धर्म की शान समझते हैं, भगवान शिव के तांडव को धारण करते हैं, भारतीय संस्कृति का सम्मान करने वाले हिन्दू हैं. तो फिर एक बार इस ब्लॉग पर अवश्य आयें. जय श्री राम
हल्ला बोल

Kunal Verma ने कहा…

खूबसूरत रचना

शालिनी कौशिक ने कहा…

Shalini ji ,kunal ji ray jahir karne ke liye shukriya . ''halla bol ' par avyshay aayenge par hindustani bankar Hindu ya musalman bankar nahi .WE ARE INDIAN .jai hind !

Vaanbhatt ने कहा…

ladkiyan jab baahar aati hai to vakai kamal karti hain...baat sirf najariye ki hai ki maryadayein sirf ladkiyon ke liye hain...agar desh mein law and order ka mahaul theek ho to ladkiyan bahut aage ja sakatin hain...horror killing apane aap mein ghor crime hai...agar koi kisi ko jivan de nahin sakta to use chhinane ka haq bhi nahin banata...behad achchhi rachna...

Dr. shyam gupta ने कहा…

वाण भट्ट जी --पर ला एन्ड ओर्डर ठीक कैसे हो, कौन करेगा, क्यों खराब है....यह भी सोचिये...

---लडकियां जब बाहर आती हैं..तो सभी बछेन्द्री या कल्पना नहीं...बहुत सी( या अधिकतर) ऐश्वर्य, करीना, पूनम मिश्रा, नीर राडिया, नीरा यादव , शूर्प्णखा, ताडका, भी बनती हैं--- लडकियां जो बाहर नहीं आतीं उनमें भी..मायावती, इन्दिरागान्धी,महादेवी वर्मा, अपाला, घोषा,सीता, बनती हैं...
--अत: मूल बात मानव आचरण की है कोई बाहर-भीतर कहीं भी हो...आप देख ही रहे हैं कि जब से लडकियां तथाकथित-बाहर आयी हैं, समाज में अनाचार, भ्रष्टचार, ओनर किलिन्ग बढ गया है...
---ओनर किलिन्ग निश्चय ही अपराध है ..सभ्य समाज में कोई भी कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता....और चाहे समाज हो या स्त्री या पुरुष, बच्चे या माता-पिता...सभी को आचरण सुधारना होगा...परिवार, समाज, देश, राष्ट्र, की सन्स्क्रिति के अनुसार चलना होगा...

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" ने कहा…

अच्छी अभिव्यक्ति और विचारणीय विषय पर सार्थक लेख.

हरीश सिंह ने कहा…

shikha ji अच्छी अभिव्यक्ति और विचारणीय विषय पर सार्थक लेख.

vishwajeetsingh ने कहा…

आपने एक समसामायिक ज्वलंत विषय को चुनकर सही किया । हॉरर किलिंग का होना किसी भी सभ्य समाज के मुँह पर कालिख पोतने जैसा हैं , इसको हर हाल में बन्द होना चाहिये । हमें भी हॉरर किलिंग के मूल कारण अपनी किशोर-युवा होती पीढी के चारित्रिक भटकाव को दूर करने के लिए उन्हें चरित्र निर्माण करने वाली स्वास्थ्य शिक्षा देनी होगी ।
www.vishwajeetsingh1008.blogspot.com

दर्शन लाल बवेजा ने कहा…

विचारणीय विषय पर सार्थक लेख.

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