सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

अगर आपने मेरी बात मान ली तो दुसरे मठाधीशों को भी अपनी कुर्सी से खिसकने के लिए मजबूर करेगा आपका भाई Anwer Jamal

मैं किसी वाद में विश्वास नहीं रखता लेकिन फिर भी अगर किसी वाद के साथ मेरा नाम जोड़ा जाये तो मुझे नारीवादी कहा जा सकता है .
जहाँ भी कोई संस्था होगी वहां संगठन ज़रूर होगा और कोई न कोई उसका प्रमुख भी होगा ही होगा.
UBA एक ऐसा संगठन है जहां विचारवान जमा हैं . जो बात मैंने LBA के संयोजक महोदय से कही थी वही बात मैं यहाँ भी कहना चाहूँगा कि
इस संगठन का प्रमुख किसी भी गंभीर महिला ब्लागर को बनाया जाये . इसके अलावा भी दुसरे अहम पद पर बहनों को नियुक्त किया जाये .
मर्द हमेशा से अपनी चौधराहट चलता आया है औरत पर . यहाँ ब्लाग जगत में भी अनवर जमाल यही देख रहा है और वह चाहता है कि मर्द अपनी मर्जी से औरत को अपने बराबर ही नहीं बल्कि अपने ऊंचा पद सौंपना सीख ले ,
औरत को आदर देना सीख ले . हिंदी ब्लागर्स फोरम इंटरनेश्नल की  मुख्य निरीक्षिका के पद पर मोहतरमा रश्मि प्रभा जी को नियुक्त किये जाने के पीछे मेरा यही इरादा है .
मुख्य पद मुख्य सम्मान रखता है . खुद को पीछे हटाकर औरत को मुख्य पद पर बैठाइए. वह ज़रूर अपनी पूरी क्षमताओं का प्रयोग करेगी और आपकी उम्मीद से बेहतर रिज़ल्ट देगी .
आज देश में हर जगह औरत का प्रदर्शन मर्द से बेहतर है.
बेहतर को बेहतर जगह सौंपिए मेरी तरह क्योंकि दूसरों को नसीहत देने से पहले मैं खुद यह नेकी कर चुका हूँ .
उम्मीद है कि आप मेरी बात पर उचित ध्यान देंगे.
अगर आपने मेरी बात मान ली तो दुसरे मठाधीशों को भी अपनी कुर्सी से खिसकने के लिए मजबूर करेगा आपका भाई अनवर जमाल, लेकिन पहले उसकी खुद उसके घर में तो सुनी जाए.
धन्यवाद.

8 टिप्पणियाँ:

Mithilesh dubey ने कहा…

भैया अनवर जमाल जी आपके जानकारी के बता दूं कि यू बी ए पर सयोंजक /संस्थापक के अलावा कोई और पद निर्धारित नहीं किया गया है . एल बी ए पर उठापटक देखकर ही हमने ये फैशला लिया है कि सयोंजक /संस्थापक के अलावा इस ब्लॉग पर अन्य सभी पद रिक्त ही रहेंगे. अनवर भइया आपके इस सुझाव का हम सम्मान करते हैं तथा आपसे माफी चाहते हैं कि हम इस पर अमल नहीं कर सकते . आपके इस पोस्ट से पता चलता है कि आपके दिल मे नारी के लिए कितनी इज्जत है. इसीलिए तो हम कायल हैं आपके

शालिनी कौशिक ने कहा…

narivadi hain aur aap ye kar chuke hain sahi bhi hai karni aur kathni me antar nahi hona chahiye,nari ki prashansa ke liye aabhar..

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

@ जनाब मिथिलेश दुबे जी ! आप इस ब्लाग के स्वामी हैं और जो भी नीति आप नियत करें मुझे स्वीकार है और मैं आपके फैसले का सम्मान करता हूँ लेकिन इतनी विनती मैं जरूर करूँगा कि प्लीज़ आप ध्यान दें कि जो कुछ उठा पटख़ हुई वह मेरे , श्याम गुप्ता जी के और हरीश जी के दरमियान हुई है ।
अध्यक्ष जी की शान में तो किसी ने भी कुछ नहीं कहा । हम तीनों आज भी वहीं के वहीं हैं तो फिर आपने यह निष्कर्ष कैसे निकाल लिया कि अध्यक्ष पद रखने से ख़तरा पैदा होता है ?
मेरी सलाह पर ग़ौर करेंगे तो UBA को होने वाला फ़ायदा आप देख लेंगे ।

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

@ शालिनी जी ! अभी आप देखना कि मैं एक और बड़ी कुर्सी के लिए औरत की सिफ़ारिश करने वाला हूं ।

हरीश सिंह ने कहा…

अनवर भाई. मैं मिथिलेश की इस बात से सहमत नहीं हु की LBA में कोई उठापटक है. वह एक मजबूत परिवार है. और रहेगा. दूसरी बात हम आपके सुझाव का सम्मान करते है. महिलाओ के प्रति आपके दिल में जो सम्मान है उसे हम सलाम करते है. पर UPA एक मकसद के तहत बना है. अगर इसमें कभी कोई अध्यक्ष बनाने की प्रक्रिया शुरू हुयी या पद बाँटने की शुरुआत हुयी तो सबसे पहले आपकी राय सर्वोपरि होगी. इस संगठन का प्रत्येक सदस्य हमारे लिए सम्मानित है, हम सभी का आदर करते हैं . हम जिम्मेदारियों को पद के दायरे में नहीं बांधना चाहते. सभी से सम्मान के साथ अनुरोध है की वे UPA के साथ भावनात्मक जुडाव रखे.

pratibha ने कहा…

जमाल भाई मैं आपकी बात से सहमत हूं।

हरीश सिंह ने कहा…

pratibha ji vichar hoga.

Dr. shyam gupta ने कहा…

अर्थात नारी को कुर्सी नर के कहने से ही मिलेगी... क्या नारी की अपनी कोई औकात नहीं है कि अपने गुणों से खुद कुछ हाशिल करे....

--यही तो नर की आजकल की चाल है....
---नारी जब तक तू स्वयं अपने पैरों पर नहीं खडी होगी कुछ प्रप्त नहीं कर पायेगी....उठो..जागो...

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