रविवार, 10 अप्रैल 2011

योगेन्द्र भाई एवं समस्त संचालक मंडल एवं ब्लोगर बन्दुओं को स्पष्टीकरण

योगेन्द्र भाई..

बहुत बहुत आभार..आप ने प्रश्न उठाया है मेरे भारतीय ब्लॉग लेखक मंच: भारतीय मुसलमान,इस्लाम और आतंकवाद.. लेख पर आप के विचारों का .एक एक कर आप के प्रश्न लेता हूँ:

आप कौन होते कौन हैं दूसरे के धर्म के बारे में बोलने वाले?: योगेन्द्र भाई में एक सामान्य व्यक्ति होता हूँ जो आज भी कश्मीर में जाने से डरता है ..
मैं एक कश्मीरी पंडित हूँ जो आज कल के सेकुलर लोगो को की तरह AC में नहीं रहता..अपने घर से निकल दिया गया है और २२ सालों से सरकारी कैम्पों में रहता है.मैं वो हूँ जिसकी ३ साल की बेटी का सामूहिक बलात्कार किया गया...
और उसके बाद अगर में उन लोगो के खिलाफ लिखता हूँ तो मुझे माफ़ी मांगने खेद प्रकट करने को कहा जाता है...

योगेन्द्र भाई मैं हिंदुस्तान का हिन्दू हूँ.....

परनिंदा हमारे धर्म में नहीं सिखाई जाती: मैं सिर्फ उदहारण दे रहा हूँ राम और कृष्ण नहीं बनना चाहता.. राम और कृष्ण नें भी रावण और कंस की निंदा की थी वो हमारे आदर्श है.मैं तो निंदा से एक कदम आगे बढकर बोलता हूँ की जरुरत पड़ने पर प्राण लेना भी हमारा धर्म सिखाता है वो हत्या नहीं वध होता है..बाली कंस और रावण का वध किया गया..

याद रखिये - क्षमा बडन को चाहिए छोटन को अपराध : आप की इस पंक्ति पर कहना चाहूँगा "अतिसय रगड़ करे जो कोई,अनल प्रकट चन्दन से होई"

४ सारे मुस्लिम बंधुओं से और उनके तथाकथित रहनुमा सेकुलर लोगो से और शायद योगेन्द्र भाई आप से भी
: मित्रों मैंने इतिहास बताया है सिर्फ..किसी को गली नहीं दी है वो भी इस्लामिक इतिहासकारों द्वारा लिखा हुआ..क्या आप गोरी और गजनी को अपना आदर्श मानेंगे .. क्या आप समर्थन करते है कश्मीर का ??? क्या SIMI को बुरा कहने के लिए मुझे किसी से प्रमाणपत्र लेना पड़ेगा...या जब मेरे अपनी बेटी का सामूहिक बलात्कार होगा हिंदुस्तान में तो"क्षमा बडन को चाहिए छोटन को अपराध" कह कर उसे में परोस दू इनके सामने...
मैंने साथ में ये भी तो लिखा है की आज का ९८% भारतीय मुस्लिम समुदाय अलकायदा को नहीं मानता वरना यहाँ गृहयुद्ध हो जाता इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया..अगर सिर्फ २% लोगों को गलत कहना, अगर गोरी गजनी और बाबर को गलत कहना साम्प्रदायिकता है तो मैं हूँ सांप्रदायिक.

५ एक लेख लिख कर अपने इस लेख पर आपत्ति दर्ज कीजिये अन्यथा आपको इस मंच से निष्कासित कर दिया जायेगा : जब गलत नहीं लिखा कुछ तो माफ़ी या आपत्ति किस बात की..हाँ स्पस्टीकरण मैंने दे दिया है.इन सबके बाद भी मैं अगर गलत हूँ तो कृपया बहुमत को साथ लेते हुए मेरे ऊपर जो कार्यवाई होनी चाहिए करें.
लेकिन खेद प्रकट कर के आशुतोष से जयचंद नहीं बनना चाहता..

आशा है मेरे आशय और स्पष्टीकरण दोनों आप को मिल गए होंगे...
जय हिंद वन्दे मातरम..

9 टिप्पणियाँ:

योगेन्द्र पाल ने कहा…

आशुतोष जी,

बहुत दुःख हुआ आपकी बेटी के बारे में जानकार, बहुत शर्म की बात है कि असामाजिक तत्व हिंदू-मुसलमानों में फूट डालने के लिए इन घिनौनी हरकतों पर उतर आते हैं|

पर आपको यह भी पता होगा कि इसी तरह के मुद्दों को लेकर हिंदू-मुस्लिम दंगे हमारे देश में होते रहे हैं और शायद होते रहेंगे, इधर ब्लॉग-वुड में भी कई ऐसे असामाजिक तत्व मौजूद हैं जो इस तरह के लेखों की प्रतीक्षा करते हैं और इनको आधार बना कर हिंदू तथा मुस्लिमों में फूट डालने का प्रयत्न करते हैं, कल को ऐसा न हो इसलिए में इस प्रकार के लेखों का विरोध करता हूँ और इसलिए आपके लेख का भी विरोध किया गया था|

राम तथा कृष्ण ने निंदा नहीं की थी, निंदा तो कमजोर और मजबूर लोग करते हैं, उन्होंने कर्म को महत्त्व दिया था और बुराई को खत्म किया था| जितनी भी बुराइयां खत्म हुई हैं वह कर्म के सहारे ही खत्म हुई हैं निंदा से नहीं, छत्रपति शिवाजी, रानी लक्ष्मीबाई आदि इसके उदहारण हैं|

आपकी बात सच है कि कश्मीर जाने से हर हिंदू डरता है मैं भी "माँ वैष्णों देवी" के मंदिर जाता हूँ पर उससे आगे कश्मीर जाने की मेरी कभी हिम्मत नहीं हुई, जाहिर है यह कट्टरवादिता एक प्रकार की पशुता है जिसने कश्मीर को एक जंगल बना कर रख दिया है, जहाँ हर मानव जाने से डरता है|

और यदि इन कट्टरवादियों का विरोध नहीं किया गया तो ये पूरे भारत को जंगल बनाने में ज्यादा वक्त नहीं लगाएंगे|

आपके साथ जो हुआ है उसमे वह बात "क्षमा बडन ....." फिट नहीं बैठती वहाँ तो "लातों के भूत बातों से नहीं मानते" सटीक बैठता है, यदि मैं आपके लिए कुछ कर सकता हूँ तो जरूर बताइए|

आशुतोष ने कहा…

योगेन्द्र भाई मैं हिंदुस्तान का हिन्दू हूँ.....
,.................
जी नहीं मेरे शायद आप ने गलत समझ लिया ..मैं पिछले हफ्ते जम्मू गया था कुछ कार्य व कुछ संकलन करना था व्यक्तियों के विचारों का..एक व्यक्ति मिले उनके साथ ये घटना हुई थी ..शायद उनमें मैंने खुद को देखा,, उनकी बेटी में मैंने अपनी बेटी को देखा..और उनकी मृतप्राय विवश जिन्दगी में एक हिंदुस्थानी को देखा ...
ये सब हुआ क्यूकी वो हिंदुस्थानी हिन्दू थे .....अब वो तो ब्लॉग लिखते नहीं सोचिये अगर वो इन्सान अपनी भावना इस ब्लॉग पर व्यक्त करता तो कितना कडवाहट मिलती हम सभी को...हम सभी सेकुलर लोग तो उनको मार ही डालते..
पुनः कहूँगा मेरे लेख के अंतिम हिस्से को आप सब पढ़े..मेरा किसी धर्म से विरोध नहीं है मगर गलत तो गलत ही है...
धन्यवाद आप ने कहा आप पूछा की मेरे लिए कुछ कर सकतें हो..मैं तो फिर भीं अपना ध्यान रख लूँगा मगर मैं इतना कहूँगा की द्वेषवश लिखी गयी कृतियों और किसी आदमी की पीड़ा जो सत्य हो..वो इतिहास जो आप पे गुजरा है उनमें कृपया फर्क करें और पीड़ा और इतिहास को लिखने की अनुमति जरुर दें..

poonam singh ने कहा…

योगेद्र जी, हमें लगता है की आप पूरी पोस्ट नहीं पढ़ते और कमेन्ट दे देते हैं. आशुतोष जी की पहली पोस्ट में आपने हिटलरशाही रवैया अपनाया. और अब कह दिया की आपकी बेटी के साथ जो हुआ वह गलत है.
यह किसी आशुतोष या योगेन्द्र या पूनम की बेटी की बात नहीं बल्कि कश्मीर में हिन्दुओ के साथ जो हुआ वह आम हिन्दुस्तानी की बेटी की बात है.
हमारे ख्याल से आशुतोष जी की यही बात ठीक है. एक बात बताईये आज गोधरा- गुजरात की बात सब करते हैं. मोदी का विरोध सब करते हैं. पर कोई मुस्लमान उनका विरोध क्यों नहीं करता जहा पर आज भी हिन्दुओ को प्रताड़ित किया जाता है. गुजरात में मुसलमान प्रगति के मार्ग का हिस्सा बने हैं. गुजरात के मुसलमानों को अब कोई शिकायत नहीं है. वे उस घटना को महज एक हादसा मानकर भूल चुके है. मैं गयी थी गुजरात वहा पर मुस्लमान अब उसकी चर्चा भी नहीं करना चाहता. पर कश्मीर में जो हो रहा है. उसके बारे में कोई क्यों नहीं बोलता. वहा के मुख्यमंत्री दोषी क्यों नहीं है. दंगे फसाद के दौरान जो घटनाये होती हैं वह एक हादसा होता है. जिसका पछतावा सभी को होता है. आज अपने ही देश में कोई भी स्थान बता दीजिये जहाँ. मुसलमानों की संख्या जादा हो और वहां रहने वाला हिन्दू खुलेमन से अपना त्यौहार मना पाता हो. मैं आपको अनगिनत ऐसे स्थान बतौंगी जहाँ. हिन्दुओ के बीच रहने वाला मुस्लमान अपने त्यौहार ही नहीं मनाता बल्कि उसका त्यौहार हिन्दू भी मनाता है. यह कैसा भेदभाव है. अपनी मानसिकता बदले लोग.

योगेन्द्र पाल ने कहा…

@poonam singh:

मेरे कई दोस्त बचपन से मुसलमान रहे हैं, मुझे तो कभी महसूस नहीं हुआ कि वे मुस्लिम हैं और मैं हिंदू, उनमे और मुझमे कोई फर्क है मैंने कभी जाना ही नहीं

एक बार आगरा (मेरे गृहनगर) में हिंदू-मुस्लिम दंगा हुआ था, उस वक्त ७ दिनों तक कर्फ्यू रहा था और हम सभी अपने घरों में बहुत परेशान थे, खाने के लिए भी कुछ नहीं बचा था

कुछ दिनों में सब शांत हो गया जैसे कुछ हुआ ही न हो, बाद में पता चला कि किसी ने जानबूझ कर एक मंदिर के सामने गाय को काट कर डाल दिया था और इसलिए दंगा हुआ था, अब किसने काट कर डाला यह तो पता नहीं चला पर यह पक्का था कि जिसने भी यह कार्य किया था वह ना तो हिंदू था और ना मुसलमान असल में ऐसे लोग किसी धर्म के होते ही नहीं वे अधर्मी होते हैं | उन दंगों के बाद से मुझे धर्म पर बात करने वालों से चिढ हो गयी है यदि हिंदू हो तो हिंदू धर्म की बात करो और यदि मुस्लिम हो तो इस्लाम धर्म की बात करो, व्यर्थ में एक दूसरे के धर्म को क्यूँ भला-बुरा कहना, जिससे परेशानी बढ़ती है

मुझे तो आज भी अपने मुस्लिम दोस्तों में कोई फर्क महसूस नहीं होता, वे मेरे साथ होली मनाते हैं और मैं उनके घर ईद की सेवइयां खाता हूँ

और आपके अगले सवालों के जबाब तो कोई मुस्लिम ही दे तो बेहतर है|

जिस तरह से आशुतोष जी ने अपनी बात को रखा था मुझे लगा कि वे अपनी बात कर रहे हैं, मैं उसके लिए माफी चाहता हूँ

सत्य गौतम ने कहा…

आशुतोष जी ! अब आप एक लेख एक दलित बनकर भी लिखिए। किसी गांव में जाइये और देखिए कि दलितों की बेटियों के साथ तथाकथित ऊंची जातियों के लोग बलात्कार कैसे करते आए हैं हजारों साल से ?
कैसे ईश्वर, धर्मग्रंथ और मानवाधिकारों को हजारों साल से कुचला है आपके पूर्वजों ने और आज भी कैसे कुचल रहे हैं ?
आपकी नई पोस्ट पढ़ने की हार्दिक इच्छा है।
ऐसा ही तो ऐतराज़ करने वाला योगेन्द्र और ऐसे ही प्रतिउत्तर देने वाले आप। दोनों एक ही थैली के चटटे बटटे। पोस्ट पढ़ने का सलीका नहीं और आर्डर जारी कर दिया।
कौन है यह पढ़ा लिखा आदमी ?
बाबा साहेब की जीवनी पढ़ो तब आपको अपनी सूरत सही सही नजर आएगी।

सत्य गौतम ने कहा…

तुम्हारे बड़े जब हमारे बड़ों को अपने जुल्म की चक्की में पीस रहे थे और हम हा हा कार करके ऊपर वाले से प्रार्थना कर रहे थे तब हमारी इस देश में सुनने वाला कोई नहीं था। सब ओर ब्राह्मणशाही और ठकुरैत चल रही थी। जब इस देस में कोई मानव न मिला तब ऊपर वाले ने तुम्हारे जुल्म के खात्मे के लिए, तुम्हारे बड़ों के वध के लिए गजनी और अन्य हमलावरों को भेजा और उन्होंने आकर हर जालिम राजा की गर्दन या तो काट दी या झुका दी। उन हमलावरों को बुलाने वाले भी हिन्दू रजवाड़े ही थे। वे थोड़े से मुस्लिम हमलावर हिन्दुओं की लड़कियां लेकर जाने में सफल तब हो पाए जब हिन्दू राजाओं ने उनकी सहायता की। इतिहास यह सब भी तो बताता है। इसे आपने क्यों छोड़ दिया ?
इसे आप बताएंगे या फिर मैं लिखूं इस पर पोस्ट ?
अगर उन हमलावरों ने उन लोगों न मारा होता तो वे भी जनसंख्या ही बढ़ाते। जिन लड़कियों को अरब भेज दिया गया। वे ऐश कर रही हैं और उनके पेट से होने वाली संतानें भी ऐश कर रही हैं। यहां रहतीं तो उन्हें देवदासी बना दिया जाता या फिर विधवा होते ही उन्हें जला दिया जाता। बच गई उनकी जान। धन्यवाद दो हमलावरों का और उन गददारों का जिन्होंने उन्हें बुलाया और उनका साथ दिया । उनके साथ के कारण ही वे 800 वर्ष शासन कर पाए और तुम्हारी नाक में ऐसी नकेल पहना गए कि अब तुम्हारी धौंस कहीं चलती नहीं। इसके बावजूद अपने कुल गोत्र की श्रेष्ठता के फरेब से निकलने के लिए तुम आज भी तैयार नहीं हो। सत्य को दिखाता है सत्य गौतम।

हरीश सिंह ने कहा…

सत्य गौतम जी अभी मैं आशुतोष जी की पोस्ट या योगेन्द्र की बात पर कमेन्ट नहीं करना चाहता. पर आपकी बात का जवाब हम अपने ब्लॉग पर जरुर देंगे. आशुतोष दे या न दे. एक ऐसी पोस्ट जो कथित हिन्दू और कथित मुसलमान सभी के मुह पर तमाचा होगी. सच सुनने की हिम्मत है तो आईये.डंके की चोट पर

योगेन्द्र पाल ने कहा…

@सत्य गौतम जी: जो बातें बर्षों पहले हुई हों,उनको लेकर किसी से घृणा करने का क्या औचित्य है?

क्या आज भी ऐसा होता है?

आशुतोष ने कहा…

Gautam bhai
aap ki dalit post jarur likhunga..aur vyaktigat roop se maine kya kiya hai ye bhi jarur add karunga.abhi jara jaldi men hu jara sham tak intjar kar len..

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