बुधवार, 13 अप्रैल 2011

परिवर्तन की लहर ...!!

जमाने में अब एक लहर रही है ,
सुनहरे रंगों भरी इक सहर रही है ,

कोई देखे ना देखे इसके ज़लाल को ,
बन के जलजला और कहर रही है ,

जो समझते है इसे सिर्फ पत्तों का धुवां ,
तपिश उसकी सबको अभी से नजर रही है ,

हिल जाएँगी उनकी भी इमानो की चूलें ,
अब तक जो वक़्त से बे-असर रही हैं ,

वो बे-जुबां भी अब बोलने लगे हैं ,ज़नाब ,
'कमलेश'अब जंतर-मन्तर से , सही खबर रही है

9 टिप्पणियाँ:

हरीश सिंह ने कहा…

sundar abhivyakti, abhar.

Vaanbhatt ने कहा…

jantar-mantar se khabar aa rahi hai...per bakaul sameer ji saanp doorben liye baithe hain...

सतीश सक्सेना ने कहा…

आभार इन खूबसूरत लाइनों को पढवाने के लिए ! आपको शुभकामनायें !!

आकाश सिंह ने कहा…

बदलाव तो आनी ही है | जब पाप का घड़ा भर जाता है तो फूटने में भी देर नही होता |
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सुन्दर प्रस्तुति धन्यवाद |
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एक अच्छी कविता के लिए मेरे ब्लॉग पे आप आमंत्रित हैं |
www.akashsingh307.blogspot.com

Dr. shyam gupta ने कहा…

लहर तो है....अब देखिये लहर कहां तक पहुंच पाती है..

Anita ने कहा…

कविता अच्छी लगी, सार्थक संदेश देती है !

Sawai SIingh Rajpurohit ने कहा…

बहुत सुंदर

sushma 'आहुति' ने कहा…

bhut hi khubsurat panktiya hai...

prabhat ने कहा…

bahut sahi bhai bahut sahi kaha, aasha aap mere blog apr bhi najar daalenge and commment bhi....http://prabhat-wwwprabhatkumarbhardwaj.blogspot.com/

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