बुधवार, 25 मई 2011

कहाँ गए वो चाणक्य जो एक हजार चन्द्रगुप्त तैयार कर अखंड भारत की नीव रखते थे , लगता है आधुनिकता खा गयी !


मित्रों कुछ दिनों पहले पूर्वांचल ब्लॉग लेखक मंच पर हमसे एक लेखक जुड़े थे यश पाण्डेय..मैंने उनकी पोस्ट इस ब्लॉग पर आप सब से साझा की...उस बालक की विडम्बना देखिये की उसने अपने आज कल के तथाकथित विद्यालय में सनातन शिक्षा पद्धति की बात कही तो उसके घर तक शिकायत पहुंचा दी गयी विद्यालय द्वारा की आप का बालक गलत सोहबत में है....उसके बहरी दुनिया से संचार के साधन कटवा दिए गए..अब एक ९ वीं के छात्र की अपनी मजबूरियां होती है...अपने अभिवावकों के अनुसार चलना..
प्रस्तुत है उसकी आपबीती उसी के शब्दों में..








27 टिप्पणियाँ:

yogendra pal ने कहा…

मुबारक हो, हरीश सिंह जी,

आपका यह मंच भी बाकी कई मंचों की धर्म का कुरूक्षेत्र बनता जा रहा है, जब से इस तरह के लेख इस मंच पर आने शुरू हुए हैं फोलोवर की संख्या सीमित हो गयी है तथा सब्सक्राइबर भी नहीं बढ़ रहे|

कुछ कीजिये अन्यथा इसको भी विवादित होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा|

@आशुतोष जी: मुसलमानों को आपने मुल्लों लिखा है, क्या सोच कर? बहुत मजा आता है दूसरों को इस तरह बुलाने में? मैं भी आपको आज से अशुआ बुलाना शुरू कर दूँ?

मैंने एक जगह पढ़ा था आपने लिखा था कि मैं कलम से युद्ध कर सकता हूँ जो मैं कर रहा हूँ,

यदि यह सच है तो आप कश्मीर जाइए वहाँ पर जिन हिंदुओं पर जुल्म हो रहा है उनके इंटरव्यू कीजिये जो कोई नहीं कर रहा है, उन इंटरव्यू को हम सभी के सामने लाइए, तब लगेगा कि आप कुछ कर रहे हैं, ऐसे बेमतलब का बिना आधार का बोलने से क्या लाभ?

मुझे इस लेख में लिखी आपकी किसी भी बात पर विश्वास नहीं है, उस लड़के का वीडियो बनाइये और यहाँ डालिए, मुझे पढते हुए 22 बर्ष हो चुके हैं और मुझे कोई भी ऐसी अध्यापिका तथा अध्यापक नहीं मिला जो ऐसी बातें करता हो|

ऐसे सभी लोग आपसे ही क्यूँ टकराते हैं? ये सभी मनगढंत बातें बंद करें तथा कुछ ठोस करना शुरू करें बिना बोले जिससे आपका और दूसरों का भला हो|

आशुतोष की कलम ने कहा…

मुझे लगता है की इस मंच पर मुझे दूसरी बार चेतावनी मिल गयी है..
ये पोस्ट में लिंक दे कर हटा रहा हूँ...प्रयास करूँगा आगे से इन मंच से दूर रहूँ ऐसे विचरों के साथ..
अगर मेरे कारन इस मंच की पाठक संख्या सिमित हो रही है तो मैं इस मंच पर विचार ब्यक्त करने में सावधानी बरतूँगा..

आशुतोष

आशुतोष की कलम ने कहा…

ये लेख मेरे द्वारा लिखा नहीं था में सिर्फ वाहक था ..

rashtravaad ने कहा…

haan main wo ladka hoon yadi aapko janana hai asliyat to aiyee mere school lucknow public school phir bataunga ki aapko ek nahin do aise teachers milenge

बेनामी ने कहा…

हा हा हा कितना गलत तर्क दिया है तुमने योगेन्द्र पाल उर्फ़ मुल्ला जी
तुम्हे क्या गलत लगा पहले ये तो बताओ . तुम कौन हो ये तुम्हारी भाषा से ही पता चलता है
तुम्हारे जैसे लोग ही हिन्दू जाति पर कलंक हैं !

बेनामी ने कहा…

is jagah yogendr ji sahi hai. kyonki yash ki profile sahi nahi hai. jhooth ke panv nahi hote,

yogendra pal ने कहा…

बेनामी महाशय: तुम्हारी तरह डरपोक नहीं हूँ सीधी बात करता हूँ नाम के साथ| कलंक कौन है और कौन नहीं ये फैसला वक्त के हाथ में छोडो, कर्म पर आओ क्या करते हो तुम हिंदू धर्म के लिए?

और रही बात मेरे किसी धर्म के साथ जुड़े होने की तो जरा जा कर अनवर के लेखों पर मेरे कमेन्ट पढो

@राष्ट्रवाद: तुम्हारा नाम क्या है? मुझे तुम्हारे स्कूल का नंबर चाहिए साथ में तुम्हारे सहपाठियों का भी, इस मामले मैं पूरी बात पता कर के ही रहूँगा| और तुम इस समय किस कक्षा में पढते हो तथा पिछले तीन बर्षों में तुम्हारी क्लास में क्या स्थिति है? यदि 12 कक्षा में पढते हो तो अपने पापा का नंबर भी दो|

@आशुतोष: मुझे आप कुछ ठोस करते नहीं दिखते| जिस दिन ठोस करने लगेंगे उस दिन जरूर आपका साथ दूँगा|

उदहारण के लिए इस विद्यार्थी के अध्यापकों से आपने बात की? आप उसके स्कूल गए? आपने इसकी बातों की सत्यता को जानने का प्रयत्न किया? आपने इस विद्यार्थी के सहपाठियों से बात की?

क्या आपने पता किया कि गुरुकुलों जैसी पढाई भारत में कोई संस्थान करवाता है या नहीं? यदि हाँ तो कैसे यदि नहीं तो क्यूँ नहीं?

बस किसी के मुंह से सुना और धुल में लट्ठ चलाने लगे, कहाँ की समझदारी है? खुद को पत्रकार कहते हो तो उन गुणों को भी तो अपनाओ जो एक पत्रकार में होने चाहिए, तथ्य जुटाओ फिर अपनी बात रखो, बिना तथ्य के आपकी बात मानेगा कौन? और ये लेख लिखने से क्या हो गया? एक भी गुरुकुल बना?

मुल्ला लिखने का क्या अर्थ है? मुसलमान भी लिखा जा सकता है ना

बेनामी ने कहा…

बहुत अच्छा प्रयास है आपके बधाई हो आपको!
किन्तु लिखने में जरा सतर्कता बरतें | लेखों में सत्य का प्रयोग बहुत जरुरी है क्यों की सत्य ही ताकत है जिसके सहारे जमाने से भी आप लड़ सकते है ! योगेन्द्र जी की बातें विचारणीय है कृपया ध्यान दिया जाय !!

आशुतोष की कलम ने कहा…

@आशुतोष: मुझे आप कुछ ठोस करते नहीं दिखते| जिस दिन ठोस करने लगेंगे उस दिन जरूर आपका साथ दूँगा|बस किसी के मुंह से सुना और धुल में लट्ठ चलाने लगे,इस विद्यार्थी के अध्यापकों से आपने बात की? आप उसके स्कूल गए? आपने इसकी बातों की सत्यता को जानने का प्रयत्न किया?

@योगेन्द्र भाई:
आप इतने समझदार हैं..आप क्या चाहते हैं की में इस बालक के पिता और स्कूल में जाऊं..स्कूल में जाऊंगा तो स्कुल से बाहर कर दिया जाएगा पिता के पास जाऊंगा तो पिता से इसे झिडकी या कुछ और मिलेगी..क्युकी एक पिता अपने पुत्र को कैसे भी सिर्फ सफल देखना चाहेगा चाहे मैकाले की गाथा गा के..वो क्यों चाहेगा की कोई क्रांति या राष्ट्र की बात करे???...में ये तहकीकात करके इस बालक को और मुसीबत में नहीं डाल सकता ..जानकारी के लिए बता दूँ ये ९ वीं में पढता है..और शयद इश्वरप्रदत्त गुणों के कारण खेलने और घुमने की उम्र में राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की बात करने का अपराध कर रहा है..
रही बात मेरी तो मैंने मान ही लिया की मैं निराधार लिखता हूँ और आगे यहाँ नहीं लिखूंगा...
मुल्ला या मुस्लमान???? अफजल गुरु या अब्दुल कलाम..

आशुतोष की कलम ने कहा…

@BENAMI YASH KI PROFILE DEKH LEN..
ITS NOT FAKE..MAEN JANTA HUN IS BACCHE KO ...

http://www.facebook.com/profile.php?id=10000106323javascript:void(0)4283&sk=info

मदन शर्मा ने कहा…

आशुतोष जी बहुत सही लिखा है आपने ! आज भी हमारे पाठ्य पुस्तकों में पढाये जाते हैं की आर्य बाहर से आये क्या ये भी गलत है ? मुझे भी बचपन में ऐसे हालात से सामना करना पडा था क्या उसे भी हम झूठ मान लें ? आज हम तथाकथित धर्मं निरपेक्षता के संवाहक बनने हेतु सत्य को स्वीकार करने की हिम्मत नहीं रखते . हाँ योगेन्द्र पाल जी के भी विचार सही हो सकते हैं ! इसलिए दुसरे के विचारों को प्रकाश में लाने से पहले उसकी सत्यता को परख लेना भी जरुरी है |

क्लीव क्यों अर्जुन! खड़ा है? घोर रणचंडी जगा
शत्रु दल के दिल हिलें, टंकार कर गांडीव का II



क्रूरता पर कंस की फिर कृष्ण बन कर वार कर

शीश रावण का उड़ा, बेड़ा सिया का पार कर II



आज क्यों लंका अधिक प्यारी सिया से है तुझे?

देखता क्या है? पवन सुत! पाप का गढ़ फूँक दे II

मदन शर्मा ने कहा…

बहुत अच्छा प्रयास है आपके बधाई हो आपको!
स्पष्ट्वादी व्यक्ति अपने खरे बोलों से समाज का तो हित कर जाता है ,किन्तु खुद को सबकी निगाह में गुनाहगार बना जाता है ।हालांकि बाद में वही सच्चा साबित होता है ..

तीसरी आंख ने कहा…

बडा अफसोस होता है, जब भगवान की ओर से दी हुई बुद्धि का हम दुरुपयोग करते हैं, दुनिया न जाने कहां पहुंच गई है और हम हिंदू.मुसलमान से बाहर नहीं निकल पा रहे, माना जाता है कि मुसलमान कट्टर होते हैं, मगर अब तो हिंदू भी धर्मांध होते जा रहे हैं, सनातन धर्म की जो थाती रही है आध्यात्मिकता की, वह तो खोती जा रही है और धर्म हावी जा रहा है

blogtaknik ने कहा…

@yogendra pal ji आप लिखते है आप कश्मीर जाइए वहाँ पर जिन हिंदुओं पर जुल्म हो रहा है उनके इंटरव्यू कीजिये जो कोई नहीं कर रहा है, योगेन्द्रजी काश्मीर में अब कोन हिंदू बचा है इंटरव्यू के लिए सबको तो मार मार के भगा दिया और मुल्ला सब्द से आप क्यों भड़क रहें है.
और हो सकता है आप वीडियो बनाने मै मास्टर हो, तो जरुरी नहीं कि सभी को इस काम मै महारथ हासिल हो. इस मंच पर कितने लोगो कि पोस्ट पर वीडियो लगे है. इस देश कि स्थिति किसी से छुपी नहीं है, सोते हुए को हम जगा सकते है पर जो जागते हुए सोने का ढोंग करे उसे हम कैसे जगाए. योगेन्द्रजी आप को मुल्ला सब्द से तकलीफ हो रही थी तो उसकी और ध्यान आकर्षित करते पर आप तो सीधा भड़क गए और कश्मीर, वीडियो जैसी बात करने लगे. कुछ चीजे हमारी हद से बहार होती है उसे हम बदल नहीं सकते पर इसका अर्थ यह नहीं कि हम बेठ जाएँ. कर्म तो करना ही पड़ेगा. हमारे घर में रोज कचरा आ जाता है तो क्या हम यह मान ले कि यह कचरे कि जगह है और जाडू लगाना बंद कर दे. आशुतोषजी आप जो समाज से गंदगी हटा ने का कार्य कर रहे है इसे करते रहें. सत्य के राह मै अडचने आती ही रहती है. भागना कायरो का कार्य है. माफ़ करें मै इस ब्लॉग का लेखक न सही पर अनुसरणकर्ता जरुर हूँ. और मै यहाँ किसी से बहस करना नहीं चाहता हू. पर मुझे जो सत्य लगा वो लिख रहा हू जय हिंद जय भारत

yogendra pal ने कहा…

@blogtaknik: जिस सत्य की आप बात कर रहे हैं उसका प्रमाण कहाँ है?

आशुतोष की कलम ने कहा…

मुल्ला और मुस्लमान में अंतर:

मुसलमान : इश्लम में आस्था रखने वाला ब्यक्ति

मुल्ला १ मुसलमानी धर्म-शास्त्र का आचार्य या विद्वान।
२. मकतब में छोटे बच्चों को पढानेवाला मुसलमान शिक्षक।

उम्मीद है बंधुओं को मुल्ला और मुसलमान का अंतर मिल गया होगा..


ये मेरी परिभाषा नहीं है ....इसे शब्दकोष से मान्यता है...एक मर्यादित शब्द आशुतोष के मुह से निकलते ही अमर्यादित हो गया..


१ न ही मैंने लखा है..

काकर पत्थर जोड़ के, मस्जिद लिए बनाय। तो चढी मुल्ला बांग दे, क्या बहिरा हुआ खुदाय॥ ...

इसमें भी मुल्ला शब्द है...

२ 18वीं शती ईसवी में बलोच भाषा के प्रेम कवियों में मुल्ला फ़ाज़िल सीमक, मुल्ला करीमदाद, इज्ज़त पंजगोरी, मुल्ला बहराम, मुल्ला कासिम तथा मलिक दीनार के नाग अग्रगण्य हैं। ये भी आशुतोष नहीं कहता है ये भी इतिहास है


अब कैसे मुल्ला अभद्र हुआ ...

blogtaknik ने कहा…

योगेन्द्रजी प्रमाण सिर्फ सनातन सम्प्रदाय में आस्था रखने वालो से ही क्यों माँगा जाता है.

अखिल भारत हिन्‍दू महासभा ने कहा…
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yogendra pal ने कहा…
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yogendra pal ने कहा…
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बेनामी ने कहा…

nice post

Dr. shyam gupta ने कहा…

ये सब व्यर्थ की बातें होरही हैं----- चाहे कोई कहानियां लिखकर अपने को बाल मनोवैग्यानिक समझे या कुछ भी---वस्तुत: नवीं कक्षा का औसत क्षात्र भी काफ़ी समझदार होता है, युवा व सपनों से भरपूर--विशिष्ट क्षात्र जो इतिहास, विग्यान व सन्स्क्रिति में इन्टेरेस्ट व ग्यान रखता हो उसका स्तर काफ़ी ऊंचा होसकता है....सभी महान लोगों के बारे में यह सत्य नहीं पढा क्या---"होनहार विरवान के होत चीकने पात"

योगेन्द्र पाल ने कहा…

@श्याम गुप्त जी: यदि यह इतना ही महान है तो उन अध्यापकों पर कार्यवाही करने से क्यूँ डर रहा है?

कम से कम सामने आकर अपना नाम तो बता ही सकता है|

और इस महान बच्चे के ब्लॉग को पढ़िए महात्मा गांधी के बारे में इतने गंदे विचार हैं- किस तरह की महानता है?

बेनामी ने कहा…

mahatma gandhi ne muslim prem ke chalte. hinduo ke sath chhal kiya jiska bhugtan ham aaj bhi kar rahe hai.

Dr. shyam gupta ने कहा…

---,देश भगत सिंह की फांसी रोकना चाहता था लोगों की उम्मीद गाँधी से थी की वही कुछ कर सकता है किन्तु उस गांधी ने भगत सिंह,सुखदेव और राजगुरु को बचाने के नाम पर राजनीति की गन्दी रोटियां सेंकी और उन्हें बचने का नाम नहीं लिया गांधी इरविन पैक्ट में ---
----योगेन्द्र जी यदि यश ऊपर वाली बात लिखता है तो इसमें गलत क्या है....वास्तव में क्या गान्धी जी इसके लिये अनशन पर नहीं बैठ सकते थे...???..पर उन्होंने नहीं किया...क्यों???

आशुतोष की कलम ने कहा…

जहाँ तक मेरी जानकारी है योगेन्द्र भाई आप जिस संस्थान में पढ़ते में पढ़ते हैं उसमें "तथागत" नाम का एक बालक असिस्टेंट प्रोफ़ेसर है ..जिसे शयद १४ साल की उम्र में PHD पा ली थी??????

बेनामी ने कहा…

इस्लाम को मानाने वाले कभी भी इंसान हो ही नहीं सकते क्यों की ये संभव ही नहीं है यदि संदेह हो तो इनके केवल तीन पुस्तरा/सूरा/हिदिस पढ़ लीजिए क्योकि ये लोग उसीमे लिखे सिद्धांतों का अक्षर से पालन करते है ......जिस हिंदू को इस्लाम की आंधी नज़र नहीं आ रही वः हिंदू हो ही नहीं सकता..जय श्री राम भगवन आप सब की रक्षा करे

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