बुधवार, 6 जुलाई 2011

भ्रष्टाचार का क्या इलाज है , कोई ब्लोगी भाई बताएगा ....!


भ्रष्टाचार का इलाज

   

प्रिय ब्लोगी भाइयो,

मैंने पिछले कुछ दिन पहले एक निवेदन किया था कि कुछ बातों में कोई मतभेद नहीं है जैसे :
 भ्रस्ताचार है ,
सभी स्तरों पर है ,
सरकार इसे खत्म करने के प्रति उदासीन है
रामदेव , हजारे जैसे लोग कोशिश कर रहे हैं.
विपक्षी दलों में भी कोई सक्रियता नहीं है,
पिसने वाली आम जनता है ,
पता नहीं लोकपाल बिल बने न बने,
बने तो कैसा बने !

ऐसे में मैंने निवेदन किया था कि आम आदमी क्या इसे हटाने में कोई सार्थक  पहल कर सकता है  !

मुझे बहुत लोगों से फोन व अलग अलग लोगों से विभिन्न प्रतिक्रिया मिली , उनमे से जो मुझे सबसे अच्छी लगी , व ये है .

हर सरकारी दफ्तर के बाहर , उस नगर, कसबे , गाँव , शहर कि जो भी संस्था भ्रष्टाचार के खिलाफ है , वो अपना काउंटर लगाएं.  जगह मिले तो पक्के मकान में , नहीं तो खुले में ही कुर्सी मेज लगा कर.

उसमें. एक बरा बोर्ड लगा हो , जिसमें , जिनके खिलाफ शिकायत हो , उसका नाम , पद, और रिश्वत के पैसे कि रकम , इत्यादि लिखी हो ,

वह काउंटर , अपने यहाँ शिकायतों का रजिस्टर रखे, अपने आधार पर , आर .टी . आई . से सहायता ले, पुलिस कम्प्लेंट करें , उसे आफिस में कम्प्लेंट करें.

जहाँ सरक टूटी हो वहाँ , उस जगह के पार्षद, एम्. एल, ए .,  एम् . पी. , पार्टी का नाम लिख कर लगाएं.

ये छोटे मोटे कामों से भी बेईमानों को थोडा सा डर तो होगा.

एक मुख्य-सुझाव यह था कि एक एजेंसी हो जो  हरेक बरे पद पर के कर्मचारी की संपत्ति का ब्यौरा ले , और हर महीने सर्टिफिकेट इस्सू करे कि यह व्यक्ति ईमानदार है .

हर सरकारी पद पर नियुक्ति से पहले , उनसे , ईमान दारी की शपथ उस आफिस में सबके सामने खिलायी जाए , और नौकरी देने से पहले उसको लिख कर बता दिया जाय , कि उसे केवल तनखा में ही गुजारा करना होगा, यदि वह आपने को होशिअर समझता है तो , वाह नौकरी छोर कर व्यापार करे. मगर उस पद को व्यापार नहीं बना सकेगा.

सरकारी पद पर रिश्वत खाना , देश-द्रोह माना जायेगा .

यदि अभी भी आप कोई सुझाव दे सकते हों तो कृपया दीजिए, आपकी तरफ से आपका सुझाव ही भ्रष्टाचार के ताबूत में एक कील माना जायेगा, आपका सहयोग मन जायेगा, चाहे , आप अपने अपने ब्लॉग में सुझाव ले कर , इस ब्लॉग को दें.

बुद्धिजीवी का तो यही सहयोग माना जायेगा, क्योंकि वह सरक पर जा कर प्रदर्शन तो करेगा नहीं, क्योंकि वह तो बुद्धिजीवी है , कलम का , कम्पुटर का, उंगलिओं का खिलारी ही है .

विचार भी बहुत आवश्यक है , विचार ही नहीं होगा तो कार्य किस दिशा में होगा,

है ब्लोगी भाइयों के पास कोई सुझाव...............................!

जय हिंद

          

8 टिप्पणियाँ:

शिखा कौशिक ने कहा…

honesty is the best policy .everyone trying to blame another person for corruption but this is true no one doing honest act for removing this .

शालिनी कौशिक ने कहा…

sabse zaroori hai apne swahit ko kisi bhi tarah poora karane ki aakanksha ko chhodna jiske liye log khud hi bharshtachar badha rahe hain aur kahte fir rahe hain 'ki aaj to vah imandar hai jo paisa lekar bhi kam kar de''jab tak ham ekjut hokar ise door nahi bhagayebge tab taq yah hamse door nahi hone vala bhale hi kitne anna baba ramdev aa jayen.

I and god ने कहा…

धन्यवाद दोनों कौशिक जी,

मैं कहीं भी लिखूं, आपकी पैनी नज़र वहाँ पहुँच ही जाती है , और मुझे एक विश्वास हो जाता है कि अब ये विचार अनुमोदित हो गया,

बहुत बहुत धन्यवाद,
अशोक गुप्ता

Dr. shyam gupta ने कहा…

एक जुट होने की जरूरत ही नहीं है यदि हम सब...हाँ हम सब..स्वयं की जरूरतों को कम करें व अपना कार्य किसी भी कीमत पर कराने की आकांक्षा भूल जायं ..चाहे काम हो या नहो ...

तीसरी आंख ने कहा…

कानूत जरूर अपना काम करता है, मगर जब तक सबसे छोटी इकाई में नैतिक मूल्य नहीं होंगे, कुछ खास परिणाम आने वाला नहीं है

mahendra srivastava ने कहा…

मुझे लगता है कि हम भ्रष्टाचार का इलाज तब खोज सकते हैं, पहले भ्रष्टाचार को अपने पास से दूर भगाएं। मतलब कितना बड़ा नुकसान क्यों ना हो जाए, रिश्वत ना देने का संकल्प लें।

I and god ने कहा…

प्रिय डा. गुप्ता, तेजवानी , एवं श्रीवास्तव जी,

आपने , मेरी निवेदन पर गौर किया इसका धन्यवाद,

मगर इस पोस्त के जरिये में कोई उपाय जो वक्तिगत एवं सामूहिक स्तर पर, सुझाने कि बात कर रहा हूं, न कि भ्रस्ताचार के बारे में आपके विचार, जो कि बहुत अमूल्य हैं , ये भी सही है.

आपका
अशोक

rubi sinha ने कहा…

एक जुट होने की जरूरत

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