शुक्रवार, 11 मार्च 2011

आरोप-प्रत्यारोप आखिर कब तक ……?



मंगल यादव , नोएडा
घोटाला दर घोटाला आरोप पर आरोप कांग्रेस सरकार पर लगते जा रहें हैं। प्रधानमंत्री खुद को निर्दोस बता कर अपनी जिम्मेदारियों से बच नही सकते। देश के जिम्मेदार व्यक्ति होने के नाते प्रधानमंत्री जी को देश के भविष्य पर ध्यान देते हुए खुद के भीतर कमी को सुधारना चाहिए। सिर्फ पी.जे थामस मामले में अपनी गलती मानने से सरकार अपनी जिम्मेदारियों से भाग नही सकती। चाहे आय से अधिक धन रखने, टैक्स चोरी या भ्रष्टाचार से जुड़े मामले हों मनमोहन सरकार को अभी बहुत सारे कार्य करने को बाकी हैं।
हां मीडिया के भीतर भी कुछ कमी है जिसको सुधारने की जरुरत है। लेकिन ऐसा भी नही है मीडिया अपनी जिम्मेदारी को निभाने में विफल रहा है। सरकार के दबाव में कहीं न कहीं मीडिया के कुछ लोग ऐसे भी हैं जो लैपडॉग के रुप में काम करते हैं। लेकिन हमें यह नही भूलना चाहिए कि मीडिया ही आम लोगों का एक ऐसा हथियार है जो समाज को दिखाता है कि आज क्या हो रहा है। लोगों को मीडिया का डर अगर न हो तो लोग और भ्रष्ट होते चले जायेगें। समाज कूप-मंडूप बनकर रह जायेगा। मीडिया हमारे बीच आइने के रुप में काम करता है जिनसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष से लोग प्रभावित होते हैं।
यह विल्कुल सत्य है कि विपक्ष विरोध न करने के लिए विरोध करता है। क्योकि सत्ता पक्ष हो विपक्ष हो दोनो एक ही रंग में रंगे है। जिसकी जहां सरकार है वहां आम आदमी को लूट रहा है। कोई पूरे देश तो कोई देश के कुछ हिस्सों में। किसी का प्लान कर्नाटक में बनता है तो किसी का तमिलनाडु में तो किसी का महाराष्ट में।



चुनाव सुधार के जो मुद्दे हैं आजतक कोई सुधार नही हो पाये हैं । जब भ्रष्टाचार की बात आती है तो राजनीतिज्ञ पार्टियां अलग-अलग राग अलापती हैं। एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते रहते हैं ऐसे में मीडिया ही है जो आग लोगों को उनके अधिकार को लेकर सचेत करती है। आज के राजनेता पार्टियां बनाते है सिर्फ पैसा कमाने के लिए और यदि सत्ता में आज गये तो करोडों के मालिक बन बैठते हैं। सरकारी अधिकारियों का गलत उपयोग करके अपने दोषो को छुपाने का प्रयास भी करते हैं।
मीडिया की आर्थिक मजबूरी कहें या नाम कमाने का गलत तरीका जो भी हो नीरा राडिया जैसे कुछ मामलों की वजह से बेशक मीडिया की विश्वनीयता में थोड़ी कमी आयी है लेकिन मीडिया आज भी आम लोगों की आवाज बना हुआ है।
हम सभी को अपनी-अपनी जिम्मेदारी को समझना चाहिए। एक-दूसरे पर आरोप लगाने से समाज को निश्चित रुप से गलत संदेश जायेगा और लोगों की विश्वनीयता दिनों-दिन और घटती चली जायेगी। यह कल्पना करना भी कठिन हो जायेगा कि जानवर और इंसान में क्या अन्तर है। हर जगह हाहाकार होगा, इन्सान अपनो को ही नही पहचानेगा। ईमानदार नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ता और वॉचडॉग मीडिया के बगैर साफ-सुधरा समाज की कल्पना करना बेमानी होगी।

4 टिप्पणियाँ:

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

आपने ठीक कहा है कि पक्ष हो या विपक्ष जिसका जहाँ बस चल रहा है जनता को लूट रहा है। मीडिया भी कम नहीं है । सभी राष्ट्रीय समाचार पत्र , पत्रिकाएं सीधे या परोक्ष रूप से किसी न किसी राजनैतिक पार्टी का समर्थन करती हैं और उसके हक में जनमत तैयार करती हैं । इस तरह ये भी इनके जुर्मों में बराबर के भागी हैं ।

योगेन्द्र पाल ने कहा…

मुझे तो यह सरकार ही पसंद नहीं जितने घोटाले इस सरकार ने किये हैं उतने कभी किसी सरकार में नहीं हुए,

हरीश सिंह ने कहा…

anwar bhai ki bat se samat.

saty bolna paap hai ने कहा…

सत्य बोलना पाप है.

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