रविवार, 3 जुलाई 2011

भटकी हुयी माँओं को रास्ता दिखा दो

निरंतर
ख़बरों में पढता हूँ
सास ने बहू को

सताया
मिटटी का तेल डाल
जलाया
माँ ने बच्चे को

कूएं में फैंका
नवजात को
मरने के लिए छोड़ा
सोच कर व्यथित

होता हूँ
हर माँ से सवाल

पूछता हूँ
क्यों उस माँ की

ममता को ग्रहण लगा
उस के ममत्व का
क्या हुआ ?
क्यों काम हैवान
का किया ?
सवाल का जवाब

अभी तक नहीं मिला
कब मिलेगा ?

जानता नहीं
परमात्मा से दुआ

करता हूँ

ऐसी माँओं को उनका

ममत्व लौटा दो

वो माँ हैं,उन्हें याद

दिला दो

भटकी हुयी माँओं को

रास्ता दिखा दो
03-07-2011

1129-13-07-11

4 टिप्पणियाँ:

Prarthana gupta ने कहा…

thnx for appreciating ..............

halat aur majbooree bahut kuch aur sikha deti hai....haalat wahan khrab hona shuru hote hai jab uska galat istimal hota hai................

शालिनी कौशिक ने कहा…

bhagwan kare aapki ye ichchha zaroor safal ho jaye.bahut sarthak abhivyakti.

शिखा कौशिक ने कहा…

sarthak bat rakhi hai aapne kavita ke madhyam se .aabhar

हरीश सिंह ने कहा…

gr8..

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