शनिवार, 14 मई 2011

शिव दरबार मे कनिमोई की याचिका

अष्टावक्र


कनिमोई की तपस्या से कैलाश हिलने लगा काफ़ी देर तक जब प्रभु ने आखें न खोली तो माता ने सोचा कौन है जरा देखा जाय । फ़रियादी को देख माता का दिल पसीज गया प्रभु से बोलीं सुनिये कितनी सुंदर और भोली लड़की है जरा इसकी प्रार्थना सुन लीजिये । प्रभु  बोले आदमी सुंदरता और भोलेपन मे ही तो फ़ंसता है वरना आज पतियों की ये दुर्दशा न होती  माता नाराज हो उठीं आपके कहने का मतलब क्या है । प्रभु आंख खोल मुस्कुराये अरे मै आपसे नहीं कह रहा था कल पत्नी पीड़ित संघ से संयुक्त रूप से बीस करोड़ प्रार्थनाएं आयीं थी उनका निपटारा करते करते मुंह से ये बात निकल गयी ।

माता की नाराजगी कम न हुयी थी  बोलीं इस बच्ची का प्रकरण पहले निपटाइये प्रभु ने मामले पर नजर डाली ।  बच्ची तो ये कहीं से नही है हां इसने आवेदन मे करूणानिधी की बच्ची हूं ऐसा अवश्य लिखा हुआ है । माता गुस्से में थी बोलीं महिला जेल जायेगी आपको अच्छा लगेगा प्रभु बोले महिलायें जेल भेज सकतीं हैं जा नही सकती ऐसा कहां लिखा हुआ है । माता ने भी डूसरा बाल फ़ेकी थी बोलीं आपकी क्रुपाद्रुष्टी के तहत लिखे गये संविधान मे । प्रभु ने हार्ड लाइन अख्तियार की वो सब बात पुरानी है आज कल मामला बराबरी का है समान अधिकार समान दंड । और पूरे मामले की मम्मी ये  लड़की ही है वो तो राडिया से इसकी बातचीत का टेप इस प्रकरण मे अभी नत्थी नही हुआ है वरना पूरी पोल अभी ही खुल जाती ।

माता ने पैतरा बदला ये तो जूनियर पार्टनर है कलईनार टीवी की इसका कैसा दोष । प्रभ बोले इसकी मां बूढ़ी है तो वो दोष मुक्त ये जूनियर पार्टनर है तो  दोष मुक्त माने नौकर लोग बिना मालिक से पूछे मालिक के हित के लिये धोखाधड़ी कर रहे थे वाह माते आजकल आप सोनिया मम्मी टाईप दयालु होती जा रंही हैं ।  माता बोलीं केस के फ़ैसले के समय आपसे न कहूंगी पर इसको अभी जमानत आपको दिलवानी ही होगी । प्रभु ने असहायता से जवाब दिया ये मेरे बस की बात नहीं हैं ।

माता ने पूछा बस की बात नही है या मैने सिफ़ारिश कर दी इसलिये आप इसे वरदान देना नही चाहते अगर ये मेरी प्रार्थना कर रही होती तो आपसे कहने की मुझे जरूरत ही क्या थी क्षण भर मे जज का निर्णय बदलवा देती । पर इस बेचारी को क्या मालूम कि वो एक पत्थर दिल भगवान को पूज रही है । प्रिये बात ऐसी नही है पर इसका निर्णय जज के हाथ मे नही है माता ने कहा जज के हाथ मे नही नही है तो जज जिससे भी पूछ कर निर्णय देता है उसका मन बदल दीजिये । प्रभु ने कहा ये एक आदमी के हाथ मे है ही नही है । माता ने कहा एक हो या दस आपके लिये क्या बड़ी बात है ।

प्रभु ने कहा ये दस बीस नही करोड़ो लोगो के हाथ मे था और वे निर्णय ले चुके हैं अब मतगणना बस की देर है तमिलनाडू का नतीजा आते ही फ़ैसला हो जायेगा कि कनिमोई अंदर रहेगी या बाहर । माता ने कहा चुनाव नतीजों से इस केस का क्या मतलब प्रभु ने मुस्कुराते हुये जवाब दिया प्रिये अगर द्रमुक तमिलनाडू का चुनाव जीतती है तो फ़िर उसे केंद्र सरकार को समर्थन देने की मजबूरी नही रहेगी ऐसे मे कांग्रेस को झक मार के इसे जमानत दिलवानी पड़ेगी हां अगर द्रमुक चुनाव हार जाती है तो फ़िर समर्थन देते रहना उसकी मजबूरी हो जायेगी और कांग्रेस इसको अंदर करवा के अपनी इमानदारी का ढोल पीटेगी

माता समझने को तैयार फ़िर भी न हुई बोली एक तो देश मे इतनी कम महिलायें राजनीति मे हैं उपर से ये राज्यसभा की सदस्य भी है । इसके अंदर जाने से क्या महिलाओ की छवि धूमिल न होगी जरूर पत्नी पीड़ित संघ की अपीलो का आप पर असर हो गया है तभी आपको इतनी मासूम महिला की गुहार सुनाई न पड़ रही है ।  वरना संसार मे ऐसा कोई काम न है जो आपके बस मे न हो । प्रभु को क्रोध तो बहुत आया पर वे जानते थे कि कलियुग मे पत्नियो से पार पाना किसी पति के बस मे नही चाहे वो स्वयं महादेव क्यों न हो । भगवान भोलेनाथ ने अब आखिरी अस्त्र का सहारा लिया प्रिये अगर आप एक भी उदाहरण बता सको कि इस महिला ने आम जनता के हित मे कोई काम किया हो  या किसी दुखियारी महिला की मदद की हो तो मै पूरा मामला ही खारिज करवा दूंगा ।

कनिमोई के भविष्य का फ़ैसला होने मे अभी चंद दिन है । माता को अब तक कोई सफ़लता हाथ न लगी है आपमे से किसी को कनिमोई का कोई भी अच्छा काम नजर आये तो प्रिंट आउट निकाल कर माता पार्वती के मंदिर मे अवश्य पहुंचा आये

3 टिप्पणियाँ:

mahendra srivastava ने कहा…

क्या बात है, बहुत बढिया

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" ने कहा…

प्रिय दोस्तों! क्षमा करें.कुछ निजी कारणों से आपकी पोस्ट/सारी पोस्टों का पढने का फ़िलहाल समय नहीं हैं,क्योंकि 20 मई से मेरी तपस्या शुरू हो रही है.तब कुछ समय मिला तो आपकी पोस्ट जरुर पढूंगा.फ़िलहाल आपके पास समय हो तो नीचे भेजे लिंकों को पढ़कर मेरी विचारधारा समझने की कोशिश करें.
दोस्तों,क्या सबसे बकवास पोस्ट पर टिप्पणी करोंगे. मत करना,वरना......... भारत देश के किसी थाने में आपके खिलाफ फर्जी देशद्रोह या किसी अन्य धारा के तहत केस दर्ज हो जायेगा. क्या कहा आपको डर नहीं लगता? फिर दिखाओ सब अपनी-अपनी हिम्मत का नमूना और यह रहा उसका लिंक प्यार करने वाले जीते हैं शान से, मरते हैं शान से
श्रीमान जी, हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु सुझाव :-आप भी अपने ब्लोगों पर "अपने ब्लॉग में हिंदी में लिखने वाला विजेट" लगाए. मैंने भी लगाये है.इससे हिंदी प्रेमियों को सुविधा और लाभ होगा.क्या आप हिंदी से प्रेम करते हैं? तब एक बार जरुर आये. मैंने अपने अनुभवों के आधार आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है.मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.
क्या ब्लॉगर मेरी थोड़ी मदद कर सकते हैं अगर मुझे थोडा-सा साथ(धर्म और जाति से ऊपर उठकर"इंसानियत" के फर्ज के चलते ब्लॉगर भाइयों का ही)और तकनीकी जानकारी मिल जाए तो मैं इन भ्रष्टाचारियों को बेनकाब करने के साथ ही अपने प्राणों की आहुति देने को भी तैयार हूँ.
अगर आप चाहे तो मेरे इस संकल्प को पूरा करने में अपना सहयोग कर सकते हैं. आप द्वारा दी दो आँखों से दो व्यक्तियों को रोशनी मिलती हैं. क्या आप किन्ही दो व्यक्तियों को रोशनी देना चाहेंगे? नेत्रदान आप करें और दूसरों को भी प्रेरित करें क्या है आपकी नेत्रदान पर विचारधारा?
यह टी.आर.पी जो संस्थाएं तय करती हैं, वे उन्हीं व्यावसायिक घरानों के दिमाग की उपज हैं. जो प्रत्यक्ष तौर पर मनुष्य का शोषण करती हैं. इस लिहाज से टी.वी. चैनल भी परोक्ष रूप से जनता के शोषण के हथियार हैं, वैसे ही जैसे ज्यादातर बड़े अखबार. ये प्रसार माध्यम हैं जो विकृत होकर कंपनियों और रसूखवाले लोगों की गतिविधियों को समाचार बनाकर परोस रहे हैं.? कोशिश करें-तब ब्लाग भी "मीडिया" बन सकता है क्या है आपकी विचारधारा?

हरीश सिंह ने कहा…

सोच रहा हूँ तारीफ में क्या लिखू. बहुत अच्छे.

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