गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

प्रेम काव्य-महाकाव्य --तृतीय सुमनान्जलि--प्रेम-भाव- रचना....चन्चल मन है ---डा श्याम गुप्त ......



  प्रेम काव्य-महाकाव्य--गीति विधा  --     रचयिता---डा श्याम गुप्त  

  -- प्रेम के विभिन्न  भाव होते हैं , प्रेम को किसी एक तुला द्वारा नहीं  तौला जा सकता , किसी एक नियम द्वारा नियमित नहीं किया जासकता ; वह एक विहंगम भाव है | प्रस्तुत  सुमनांजलि- प्रेम भाव को ९ रचनाओं द्वारा वर्णित किया गया है जो-प्यार, मैं शाश्वत हूँ, प्रेम समर्पण, चुपके चुपके आये, मधुमास रहे, चंचल मन, मैं पंछी आजाद गगन का, प्रेम-अगीत व प्रेम-गली शीर्षक से  हैं |---प्रस्तुत है  प्रेम का एक और भाव ... षष्ठ रचना -- चन्चल मन है ...
 
तुम कहते हो याद नहीं करना,
कोई फ़रियाद नही करना ।
अपनी इन प्यारी बातों का,
कोइ अनुवाद नहीं करना ||
 
मैं चाहूँ याद सदा आना,
इस मन में यूंही मुस्काना |
यादें ही मेरा मधुवन हैं,
ये मन मेरा चंचल मन है ||
 
तुमको कैसे विस्मृत  करदूं ,
सुस्मृति को कैसे मृत करदूं |
जड़ शुष्क नहीं एकाकी मन,
यह चेतन है, मेरा मन है |

स्मृतियाँ तो मन की लहरें हैं,
फिर फिर दस्तक देदेती हैं |
कैसे यह मन चुप रह जाए,
आखिर मेरा चंचल मन है ||
 
 
मन चंचल है, मन पागल है,
पंछी जैसा,  उड़ता  जाए |
फ़रियाद भला कैसे न करे,
यह मन तेरा ही तो मन है ||

तुम याद सदा आते रहना,
इस मन को महकाते रहना |
स्मृतियों का यह उपवन है ,
मेरा मन है चंचल मन है ||

अब इन सब प्यारी बातों का,
कोइ प्रतिवाद नहीं करना |
हैं यादें प्यार सजा बंधन,
आखिर मन है,चंचल मन है |

तुम कहते, याद नहीं करना ,
कोइ फ़रियाद नहीं करना |
पर अब इन सारी बातों का,
कोइ परिवाद  नहीं करना ||

जीवन यादों का मंथन है,
चेतन मन है चंचल मन है |
स्मृतियों का पावन उपवन है,
ये मन तेरा ही तो मन है ||

 
 

3 टिप्पणियाँ:

आशुतोष ने कहा…

तुमको कैसे विस्मृत करदूं ,
सुस्मृति को कैसे मृत करदूं |
जड़ शुष्क नहीं एकाकी मन,
यह चेतन है, मेरा मन है |
.................
अति सुन्दर ..
आप की कवितायेँ पढ़कर फिर से प्रेम रस में लिखने की इच्छा जागृत हो गयी..

Dr. shyam gupta ने कहा…

तो लिखिये---सब कुछ करने की प्रेरणा देता है प्रेम...गोपियों का कथन है..."पेम पुमर्थो महान" ..

हरीश सिंह ने कहा…

बहुत अच्छी पोस्ट, शुभकामना, मैं सभी धर्मो को सम्मान देता हूँ, जिस तरह मुसलमान अपने धर्म के प्रति समर्पित है, उसी तरह हिन्दू भी समर्पित है. यदि समाज में प्रेम,आपसी सौहार्द और समरसता लानी है तो सभी के भावनाओ का सम्मान करना होगा.
यहाँ भी आये. और अपने विचार अवश्य व्यक्त करें ताकि धार्मिक विवादों पर अंकुश लगाया जा सके.,
मुस्लिम ब्लोगर यह बताएं क्या यह पोस्ट हिन्दुओ के भावनाओ पर कुठाराघात नहीं करती.

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