रविवार, 6 मार्च 2011

प्रेम , ममता और त्याग हिस्सा हैं नारी के वुजूद का

नारी मन में बहुत से सवाल उठते हैं और हरेक दिल उसे अपने अंदाज़ में बयान करता है. मैंने यह बयान किया है एक पोस्ट 'जीने दो सिर्फ़ एक नारी बन कर' पर :

प्रेम , ममता और त्याग
बैसाखियाँ नहीं हैं
हिस्सा हैं तुम्हारे वुजूद का
गर ये नहीं तो तुम नहीं

आत्महत्या न करो
मुक्ति के नाम पर
नारी होकर जीना है तो
बस काफ़ी है
ख़ुद की पहचान
http://sharmakailashc.blogspot.com/2011/03/blog-post_06.html

6 टिप्पणियाँ:

Atul Shrivastava ने कहा…

अच्‍छी रचना।

हरीश सिंह ने कहा…

स्वागत, सुन्दर अभिव्यक्ति.

saty bolna paap hai ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति.

Dr. shyam gupta ने कहा…

---GOOD Said...

Tarkeshwar Giri ने कहा…

ati sundar

rubi sinha ने कहा…

aabhar.

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