गुरुवार, 24 मार्च 2011

प्रेम


जिसके वशीभूत हो प्रभु ने जगत ये रच दिया ,
कृष्ण की बंसी बजी ;किसने इसको सुर दिया ,
हर ह्रदय में बस रहा वो भाव जो वरदान है ,
पवित्र व् कल्याणमय ''प्रेम ''उसका नाम है .

प्रेम की शक्ति से ही जगत का विस्तार है ,
हर मनुज उर में सदा बहती यही रसधार है ,
नलिनी सम सौन्दर्य युक्त ,आकार निराकार है ,
त्रिलोक की संजीवनी ,ये जगत आधार है .

गौरा बनकर अर्पणा हो गयी भोलेनाथ की ,
लक्ष्मी -नारायण मिले ,श्री राम संग हैं जानकी,
कृष्ण राधा के हुए,मीरा हुई घनश्याम की,
ये सभी साकार रचना प्रीति-प्रेम भाव की .

शब्दहीन जिसकी भाषा ,बोलते दो नैन हैं ,
कर्ण सुन रहे है किन्तु रसना जिसकी मौन है ,
जो प्रिया के मुख पे लाली बन विराजती ,
प्रेम की ये भावना रूप को निखारती .

द्वेष की खडग को जो आगे बढ़ के काटती ,
भेदभाव खाई को भली प्रकार पाटती   ,
पाप के समुंद्र में फंस गए यदि कभी 
पुण्य नौका बन के प्रीति भव निधि से तारती .

प्रेम अनल ,प्रेम अनिल, प्रेममय संसार है ,
प्रेम धरा,प्रेम गगन ,प्रेम जल की धार है ,
प्रेम श्रद्धा ,प्रेम मान,प्रेम सदाचार है ,
प्रेम दया ,प्रेम कृपा,प्रेम ही उपकार है.

होली आई -होली आई प्रेम रंग चढ़ गया ,
राखियों के रूप में कलाई पर है बंध गया ,
ईद के मौके पे आ गले जो लग गया ,
दीवाली रात में ये प्रेम दीप बन के सज गया .

त्याग और कल्याण ही जिस के पुण्य पुत्र है ,
करुना और उदारता जैसी न अन्यत्र है ,
जो 'अहम' से मुक्त ,सर्वत्र जिसका मान है ,
अमृत तुल्य 'प्रेम पितृ 'मानवता की पहचान है .

जो सखा ,जो प्रिय,जिसका ह्रदय में वास है,
श्वास-श्वास में रमा,जो अटल विश्वास है ,
जो सुगंध प्रसून की ,न बुझने वाली प्यास है ,
प्रेम मानव देह में प्रभु का अमर आभास है .

                शिखा कौशिक 
            http://shikhakaushik666.blogspot.com/             



5 टिप्पणियाँ:

Anita ने कहा…

प्रेम इतना विशाल है इतना महान कि शब्द छोटे पड़ते हैं, आपकी यह सुंदर रचना प्रेम के राज को खोलने में बहुत सफल हुई है ! प्रेम के विविध सतरंगी रूपों को दिखाती इस भाव पूर्ण कविता को पढ़कर मन प्रेममय हो गया ! हार्दिक बधाई !

हरीश सिंह ने कहा…

जो सखा ,जो प्रिय,जिसका ह्रदय में वास है,
श्वास-श्वास में रमा,जो अटल विश्वास है ,
------------------------------
बहुत सुन्दर रचना, प्रेम ही तो जगत का सार है. यदि जीवन में प्रेम न हो तो जीवन किस काम का. आभार.

Dr. shyam gupta ने कहा…

सुन्दर ,अति सुन्दर , प्रेम मयी रचना....

मंगल यादव ने कहा…

बहुत अच्छी कविता। प्रेम की सुन्दर प्रस्तुति

शिखा कौशिक ने कहा…

Anita ji ,hareesh singh ji ,shyam gupt ji ,Mangal ji protsahit karne ke liye hardik dhanywad .

Add to Google Reader or Homepage

 
Design by Free WordPress Themes | Bloggerized by Lasantha - Premium Blogger Themes | cna certification