गुरुवार, 14 जुलाई 2011

सज़ा-ऐ-मौत के अलावा इनका कोई इलाज नहीं

फैला रहे 
अन्धेरा मनों में
बढ़ा रहे 
नफरत दिलों में
मार रहे उनको
जिनसे 
रंजिश भी नहीं
दहशतगर्दों का कोई
धर्म ईमान नहीं है
शमशान को निरंतर
 लाशों से सज़ा रहे
बच्चों को अनाथ 
कर रहे
सुकून को दहशत में
बदल रहे
सज़ा-ऐ-मौत के
अलावा इनका
कोई इलाज नहीं 
14-07-2011
1182-65-07-11

2 टिप्पणियाँ:

तीसरी आंख ने कहा…

वाकई ठीक कह रहे हैं आप

मदन शर्मा ने कहा…

किसी भी धर्म को मानने वाले लोग इस तरह का जघन्य कांड करने का कभी नही सोचेंगे | इस तरह का कांड तो कोई शैतान को मानने वाला ही कर सकता है| मेरी भगवान से प्रार्थना है की वह इन शैतानो को पालने वालो के साथ इन शैतानो को भी पूरी दुनिया से ख़त्म करे|

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