रविवार, 27 मार्च 2011

प्रकृति का इशारा

है एक इशारा, दुनिया देख ले
जापान का उदाहरण देख ले
नश्वर है संसार सब जानते हैं
है वो शक्ति कौन जो
दुनिया चला रही है
फिर न क्यूं किस नशे गुरुर रहते हैं
प्रकृति से छेड़छाड़ कर
खुद मौत को दावत दे रहें हैं
सृष्टि को जानने की लालसा से
आन्तरिक्ष पर जा चुके हैं
और न जाने क्या-क्या कर
हद से बाहर जा चुके हैं
प्रकृति का यह इशारा
अब समय रहते समझ न पाये तो
होगा और विनाश मानव जाति का ।।





6 टिप्पणियाँ:

शिखा कौशिक ने कहा…

इशारा
अब समय रहते समझ न पाये तो
होगा और विनाश मानव जाति का ।।
aise hi hona sambhav hai yadi ham n mane to..sarthak prastuti..

हरीश सिंह ने कहा…

मंगल जी अच्छी कविता, पर नियमो पर ध्यान दे. एक दिन में मात्र तीन पोस्ट लगायी जाएगी. और एक लेखक एक सप्ताह में एक लेख लगाएगा. कृपया "हमारे बारे में" अवश्य पढ़े. यदि तीन पोस्ट प्रकाशित हो चुकी है तो ड्राफ्ट में छोड़ दे दूसरे दिन मैं स्वयं लगा दूंगा.

kirti hegde ने कहा…

अच्छी कविता.

नेहा भाटिया ने कहा…

good mangal ji.

गंगाधर ने कहा…

अब समय रहते समझ न पाये तो
होगा और विनाश मानव जाति का ।। badhai sahi kaha.

poonam singh ने कहा…

अच्छी कविता.sochna hoga..

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