मंगलवार, 5 फ़रवरी 2013

ले डूबा चौटाला “सरकार” का घोटाला

मंगल यादव ( “पोल इंडिया ” पत्रिका के फरवरी 2013 अंक में प्रकाशित लेख) हाल के दिनों में भ्रष्टाचार के मामले में सज़ा पाने वाले राजनेताओं में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे विधायक अजय चौटाला भी शामिल हो गए हैं। पांच बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रह चुके ओम प्रकाश चौटाला भ्रष्टाचार के मामले में ऐसे तीसरे राजनेता हैं जिन्हें कोर्ट ने सजा सुनाई है। इससे पहले भाजपा के पूर्व अध्यक्ष बंगारु लक्ष्मण और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुखराम को भी भ्रष्टाचार के मामले में जेल की सजा हो चुकी है। हरियाणा शिक्षक भर्ती घोटाले में दस-दस साल की सजा मिलने के बाद ओमप्रकाश चौटाला और उनके पुत्र अजय चौटाला का राजनीतिक भविष्य भी खतरे में पड़ता दिख रहा है। अगर हाइकोर्ट से चौटाला पिता-पुत्र को कोई राहत नहीं मिली तो निश्चित रुप से अगले वर्ष होने वाले लोक सभा और विधानसभा चुनावों में चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। जन प्रतिनिधि कानून के मुताबिक दो वर्ष या उससे अधिक सजा पाने वाला व्यक्ति सजा शुरु होने की तिथि से अयोग्य घोषित हो जाएगा और वो जेल से रिहा होने के बाद अगले छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता। यानी चौटाला को 16 साल तक राजनीतिक वनवास झेलना पड़ेगा। ओम प्रकाश चौटाला और अजय चौटाला अगर तीन महीने के भीतर निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हैं तो उनकी अपील पर फैसला आने तक वे विधायक बने रह सकते हैं। ओम प्रकाश चौटाला इस समय हरियाणा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं जबकि अजय चौटाला डबवाली से विधायक हैं।

हरियाणा में जेटीबी घोटाले के नाम से मशहूर केस में लंबी सुनवाई के बाद 22 जनवरी को रोहिणी की विशेष सीबीआई कोर्ट ने ओमप्रकाश और अजय चौटाला समेत नौ दोषियों को 10-10 साल की सजा सुनाई। इस घोटाले में कोर्ट ने एक आरोपी को 5 साल और बाकी सभी आरोपियों को 4 - 4 साल की सजा सुनाई है। शिक्षक भर्ती घोटाले में प्राथमिक शिक्षा के तत्कालीन निदेशक संजीव कुमार, चौटाला के साथ विशेष सेवा पर तैनात पूर्व अधिकारी विद्याधर और चौटाला के राजनीतिक सलाहकार शेर सिंह बड़शामी को भी 10-10 साल जेल की सजा सुनाई गई है। क्या था मामला? वर्ष 1999-2000 में हरियाणा में जूनियर बेसिक ट्रेनिंग टीचरों के लिए 3206 पद निकाले गए। 18 जिलों में भर्ती होनी थी, लेकिन घोटालेबाजों ने मेरिट लिस्ट में फर्जीवाड़ा किया। अधिकारियों पर बेजा दबाव बनाया। फर्जी इंटरव्यू कराएं और मनमाने तरीके से पैसे लेकर टीचरों की नियुक्तियां की। सत्ता में रहते हुए पिता-पुत्र ने टीचरों की भर्ती में जमकर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। इस घोटाले में ओमप्रकाश चौटाला के पूर्व राजनीतिक सलाहकार शेर सिंह बड़शामी, चौटाला के पूर्व ओएसडी और आईएसएस अधिकारी विद्याधर और आईएएस अधिकारी संजीव ने अहम भूमिका निभाई। गलत तरीके से तीन हजार से अधिक लोगों की भर्ती की गयी। 18 जिलों में भर्ती होने वाले शिक्षकों की लिस्ट बन चुकी थी, शिक्षा अधिकारी पर लिस्ट बदलने के लिए दबाव बनाया गया। शिक्षा विभाग से संबंधित आईपीएस अधिकारी संजीव कुमार इस घोटाले को अधिक दिन तक पचा नही पाए और असली मेरिट सूची लेकर सर्वोच्य न्यायलय चले गए। कोर्ट ने मामला सीबीआई को सौंपा और जांच के बाद 6 जून, 2008 में मामला दर्ज किया गया। इस घोटाले में कुल 62 आरोपियों पर मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से 6 की मौत हो चुकी है। ओम प्रकाश चौटाला, उनके बेटे अजय चौटाला और अन्य पर आईपीसी व पीसीए की 120-बी (आपराधिक षडयंत्र), 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी) और 471 (वास्तविक की जगह जाली दस्तावेज का इस्तेमाल) धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। क्या होगा इनेलो का ? चौटाला के जेल जाने के बाद हरियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) पर सवालिया निशान लगने शुरु हो गए है। वर्ष 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में पार्टी किसके नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतरेगी ये तो समय ही बताएगा लेकिन पूर्व मूख्यमंत्री चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला के राजनीतिक भविष्य पर निश्चित रुप से संकट के बादल मंडराने लगे हैं। चौटाला परिवार को किस तरह से चुनाव में सपोर्ट मिलता है ये तो भविष्य के गर्त में है लेकिन ये तो तय है ओम प्रकाश चौटाला कोर्ट की सजा के बाद से अब चुनाव नही लड़ सकेंगे क्योंकि 78 वर्षीय चौटाला की उम्र के साथ-साथ कानून की बंदिशे भी पीछा नहीं छोड़ेगी। ओम प्रकाश चौटाला के छोटे पुत्र विधायक अभय चौटाला के ऊपर इनेलो की सारी जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी। अभय चौटाला को हरियाणा में भाजपा और हजकां गठबंधन और कांग्रेस दोनों पार्टियों से बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। सत्ताधारी कांग्रेस से जहां प्रदेश की जनता मंहगाई और भ्रष्टाचार समेत कई क्षेत्रिय समस्याओं से पीछा छुडाना चाहेगी वहीं इनेलो का भी दामन अब साफ सुथरा नही रहा है। ऐसे में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के बेटे की पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस(हजका) से लोगों की उम्मीदें बढ़ी हैं। भाजपा-हजका गठबंधन को इसका फायदा आने वाले चुनावों में मिल सकता है। ये हजकां सुप्रीमों कुलदीप बिश्नोई भी कह चुके हैं। भाजपा पहले ही हजका प्रमुख को गठबंधन की ओर से कुलदीप बिश्नोई को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में हजकां और भाजपा को कोई बड़ी उपलब्धि चुनाव में हासिल नही हुई थी। अब देखना होगा हरियाणा में सियासी ऊंट किस किधर करवट लेता है। देखना होगा आने वाले समय में अभय चौटाला को पिता और भाई के जेल जाने की सहानुभूति मिलती है या फिर कांग्रेस और बीजेपी-हजकां गठबंधन को इसका फायदा मिलेगा। बरहरहाल जो भी हो हरियाणा की राजनीति आने वाले समय में क्या मोड़ लेगी इसे तो हरियाणा की जनता ही तय करेगी। (सर्वाधिकार प्रकाशक के पास)

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