शुक्रवार, 17 जून 2011

तुमने दिल उन्हें दिया, उन्होंने सौदा रूह का किया


वो देखते अक्स
तुम्हारा अपने दिल में
तुम देखते 
अक्स उनका आईने में

तुमने दिल उन्हें दिया
उन्होंने
सौदा रूह का किया

तुमने
मोहब्बत नाम दिया
उन्होंने इबादत समझा

निरंतर मकसद तुम्हारा
उन्हें पाना
उन्होंने रास्ता
खुदा के घर का जाना

तुम्हें अपनी मंजिल
समझा 
17-06-2011
1061-88-06-11

3 टिप्पणियाँ:

sushma 'आहुति' ने कहा…

bhut hi acchi...

शालिनी कौशिक ने कहा…

तुमने
मोहब्बत नाम दिया
उन्होंने इबादत समझा
bahut sundar .nazren hi sthiti me parivartan le aati hain.

ana ने कहा…

badhiya lekh

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